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Indore News: इंदौर की संस्थाओं ने दिया सामाजिक समानता का संदेश, बच्चों से बुजुर्गों तक ने लिया भाग
Tue, 30 Jun 2026 05:05 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 30 Jun 2026 05:05 PM IST
सार
कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिभागियों ने प्लांट-बेस्ड व्यंजन साझा किए और संवाद व संगीत के माध्यम से मानवीय एकता का संदेश दिया।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर शहर में एक बेहद अनूठी और संवेदनशील पहल देखने को मिली। उबंटूवर्स नामक संस्था ने तपिश फाउंडेशन के सहयोग से एक आयोजन किया। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान LGBTQIA+ समुदाय के सदस्यों के साथ दोनों संस्थाओं ने एक मंच पर अपने विचार साझा किए। उपस्थित सदस्यों ने समाज में करुणा, व्यापक समावेशिता और अटूट मानवीय एकता का एक मजबूत संदेश देते हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाया। सदस्यों ने कहा कि समाज में ट्रांसजेंडर्स के लिए कई तरह की भ्रांतियां हैं और इसी वजह से वे कई तरह की परेशानियां उठा रहे हैं। सदस्यों ने अपनी परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी संविधान के अनुरूप बेहतर जीवन जीने का पूरा अधिकार है।
सरकारी दस्तावेज बनवाने में आती है परेशानी
आयोजन के दौरान सदस्यों ने कहा कि आज भी उन्हें सरकारी दस्तावेजों को बनवाने में परेशानी आती है। पिछले कुछ साल में सरकार ने बेहद सकारात्मक निर्णय लिए हैं और बहुत कुछ आसान हुआ है पर अभी भी कई मंच पर यह समुदाय अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। कार्यक्रम के बाद सभी प्रतिभागियों ने मिलकर विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे प्लांट-बेस्ड स्वादिष्ट व्यंजन आपस में साझा किए। इसके साथ ही सुरमयी गीत-संगीत, सार्थक संवाद और अपने निजी अनुभवों के जीवंत आदान-प्रदान के माध्यम से उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को गहराई से समझने, सम्मान देने और सहर्ष अपनाने का एक अनुकरणीय प्रयास किया।
करुणा और मानवीय गरिमा पर संदेश दिया
आयोजन के विषय में बात करते हुए उबंटूवर्स के प्रमुख प्रतिनिधि प्रतीक जैन ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि वास्तविक करुणा कभी भी किसी व्यक्ति का रंग नहीं देखती, न वह जाति देखती है, न धर्म, न प्रजाति और न ही किसी प्रकार की संकीर्ण पहचान को मानती है। सच्ची करुणा तो संसार के हर एक जीव में केवल और केवल उसकी मानवीय गरिमा, आत्मसम्मान और उसके जीवन के वास्तविक मूल्य को ही पहचानती है। उन्होंने आगे यह भी रेखांकित किया कि यह विशेष आयोजन हम सभी को इस बात का गहराई से स्मरण कराता है कि करुणा की कोई तय सीमा नहीं होती है और हम सभी इंसानों को अपने संवेदनशीलता के दायरे को समाज के हित में निरंतर विस्तारित करते रहना चाहिए।
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मानवता का मूल मंत्र
इस पूरे कार्यक्रम को धरातल पर उतारने और इसके सफल आयोजन में स्वामी उज्ज्वल की बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका दर्ज की गई। उन्होंने उबंटूवर्स और तपिश फाउंडेशन जैसी दो संवेदनशील संस्थाओं के बीच इस सार्थक संवाद और अनूठी सहभागिता को संभव बनाने के लिए एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही तपिश फाउंडेशन के निकुंज जैन एवं उनकी पूरी कर्मठ टीम ने कार्यक्रम में पधारे सभी प्रतिभागियों का अत्यंत आत्मीय और गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसने इस पूरे आयोजन को बेहद विशेष और हमेशा के लिए यादगार बना दिया। उबंटूवर्स के संस्थापक अभिनव की दूरदर्शी पहल पर आयोजित हुए इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम ने वहां मौजूद सभी लोगों को यह गहराई से अनुभव कराया कि सामाजिक विविधताओं का दिल से सम्मान करते हुए एक समावेशी और करुणामय समाज का निर्माण करना ही वास्तविक मानवता का मुख्य आधार है। इस खूबसूरत कार्यक्रम का औपचारिक समापन उबंटूवर्स के विश्वप्रसिद्ध मूल मंत्र आई एम बिकॉज वी आर की महान भावना को दोहराते हुए किया गया।
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सरकारी दस्तावेज बनवाने में आती है परेशानी
आयोजन के दौरान सदस्यों ने कहा कि आज भी उन्हें सरकारी दस्तावेजों को बनवाने में परेशानी आती है। पिछले कुछ साल में सरकार ने बेहद सकारात्मक निर्णय लिए हैं और बहुत कुछ आसान हुआ है पर अभी भी कई मंच पर यह समुदाय अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। कार्यक्रम के बाद सभी प्रतिभागियों ने मिलकर विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे प्लांट-बेस्ड स्वादिष्ट व्यंजन आपस में साझा किए। इसके साथ ही सुरमयी गीत-संगीत, सार्थक संवाद और अपने निजी अनुभवों के जीवंत आदान-प्रदान के माध्यम से उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को गहराई से समझने, सम्मान देने और सहर्ष अपनाने का एक अनुकरणीय प्रयास किया।
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करुणा और मानवीय गरिमा पर संदेश दिया
आयोजन के विषय में बात करते हुए उबंटूवर्स के प्रमुख प्रतिनिधि प्रतीक जैन ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि वास्तविक करुणा कभी भी किसी व्यक्ति का रंग नहीं देखती, न वह जाति देखती है, न धर्म, न प्रजाति और न ही किसी प्रकार की संकीर्ण पहचान को मानती है। सच्ची करुणा तो संसार के हर एक जीव में केवल और केवल उसकी मानवीय गरिमा, आत्मसम्मान और उसके जीवन के वास्तविक मूल्य को ही पहचानती है। उन्होंने आगे यह भी रेखांकित किया कि यह विशेष आयोजन हम सभी को इस बात का गहराई से स्मरण कराता है कि करुणा की कोई तय सीमा नहीं होती है और हम सभी इंसानों को अपने संवेदनशीलता के दायरे को समाज के हित में निरंतर विस्तारित करते रहना चाहिए।
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मानवता का मूल मंत्र
इस पूरे कार्यक्रम को धरातल पर उतारने और इसके सफल आयोजन में स्वामी उज्ज्वल की बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका दर्ज की गई। उन्होंने उबंटूवर्स और तपिश फाउंडेशन जैसी दो संवेदनशील संस्थाओं के बीच इस सार्थक संवाद और अनूठी सहभागिता को संभव बनाने के लिए एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही तपिश फाउंडेशन के निकुंज जैन एवं उनकी पूरी कर्मठ टीम ने कार्यक्रम में पधारे सभी प्रतिभागियों का अत्यंत आत्मीय और गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसने इस पूरे आयोजन को बेहद विशेष और हमेशा के लिए यादगार बना दिया। उबंटूवर्स के संस्थापक अभिनव की दूरदर्शी पहल पर आयोजित हुए इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम ने वहां मौजूद सभी लोगों को यह गहराई से अनुभव कराया कि सामाजिक विविधताओं का दिल से सम्मान करते हुए एक समावेशी और करुणामय समाज का निर्माण करना ही वास्तविक मानवता का मुख्य आधार है। इस खूबसूरत कार्यक्रम का औपचारिक समापन उबंटूवर्स के विश्वप्रसिद्ध मूल मंत्र आई एम बिकॉज वी आर की महान भावना को दोहराते हुए किया गया।
