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MP: एयरपोर्ट पर अमचूर और गरम मसाले को बताया ड्रग्स, 57 दिन जेल में रहे इंजीनियर को कोर्ट से मिला 10 लाख मुआवजा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 21 May 2026 09:09 PM IST
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सार

भोपाल एयरपोर्ट पर ETD मशीन ने अमचूर और गरम मसाले को ड्रग्स बता दिया, जिसके बाद इंजीनियर अजय सिंह को NDPS एक्ट में गिरफ्तार कर 57 दिन जेल में रखा गया। बाद में फॉरेंसिक रिपोर्ट में निर्दोष साबित होने पर हाईकोर्ट ने 10 लाख मुआवजा देने के निर्देश दिए।

Dry mango powder and garam masala were declared as drugs during airport check
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोपाल एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान यात्री के बैग में रखे अमचूर और गरम मसाले को एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर (ETD) मशीन ने हेरोइन और एमडीईए ड्रग्स बता दिया। इसके बाद यात्री के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की जांच में सैंपल में किसी भी प्रतिबंधित पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई।

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मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ के जस्टिस दीपक कुमार खोट ने 57 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रखे जाने को व्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन माना और राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए।

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ग्वालियर निवासी इंजीनियर अजय सिंह ने वर्ष 2011 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि वह मई 2010 में भोपाल से दिल्ली जाने के लिए जेट एयरवेज की फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पहुंचे थे। नियमित सुरक्षा जांच के दौरान उनके सामान में रखे ब्रांडेड अमचूर और गरम मसाले के पैकेटों की जांच ETD मशीन से की गई। मशीन ने इन पैकेटों में हेरोइन और एमडीईए जैसे प्रतिबंधित पदार्थ होने का संकेत दिया।

इसके बाद गांधी नगर थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। जब्त सैंपल 10 मई 2010 को क्षेत्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजे गए, लेकिन वहां आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच नहीं हो सकी और सैंपल वापस लौटा दिए गए। बाद में सैंपल हैदराबाद स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए।

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30 जून 2010 को आई CFSL रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि सैंपल में किसी प्रकार का प्रतिबंधित पदार्थ नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने विशेष न्यायालय में खात्मा रिपोर्ट पेश की और 2 जुलाई 2010 को अजय सिंह को जमानत मिल गई। इस दौरान उन्हें 57 दिन न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा। बाद में दिसंबर 2010 में अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। याचिका में 10 करोड़ रुपये मुआवजा, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, एयरपोर्ट पर बेहतर जांच मशीनें लगाने और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की मांग की गई थी। साथ ही मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठाई गई।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में प्रदेश की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि प्रयोगशालाओं में जरूरी उपकरण ही उपलब्ध नहीं हैं तो विशेषज्ञ अधिकारियों और बड़े ढांचे का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि संसाधनों की कमी के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को 57 दिन जेल में बिताने पड़े, जो उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर प्रदेश की सभी रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी का निरीक्षण कर वहां आवश्यक उपकरण और स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

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