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Jabalpur News: आईवीएफ कराने में उम्र बाधक नहींं, जवान बेटे की मौत के बाद 52 वर्षीय महिला को हाईकोर्ट की अनुमति
Thu, 16 Jul 2026 09:31 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 09:31 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 52 वर्षीय महिला को आईवीएफ के जरिए संतान प्राप्ति की अनुमति देते हुए कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक अधिनियम विवाहित दंपती के लिए संयुक्त आयु सीमा तय नहीं करता। केवल उम्र के आधार पर मातृत्व के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अस्पताल चिकित्सा आधार पर अंतिम निर्णय लेगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 52 वर्षीय महिला को आईवीएफ के जरिए संतान प्राप्ति की अनुमति देते हुए कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक अधिनियम विवाहित दंपती के लिए संयुक्त आयु सीमा तय नहीं करता। केवल उम्र के आधार पर मातृत्व के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अस्पताल चिकित्सा आधार पर अंतिम निर्णय लेगा।
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मप्र हाईकोर्ट
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा है कि सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 एक यूनिट के तौर पर विवाहित युगल के लिए उम्र की कोई संयुक्त सीमा तय नहीं करता है। इसके साथ ही एकलपीठ ने 52 वर्षीय महिला को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन आईवीएफ (आईवीएफ) के माध्यम से संतान प्राप्ति की अनुमति प्रदान कर दी। यह महिला चिकित्सकीय रूप से गर्भधारण के लिए पूरी तरह सक्षम है। ऐसे में निर्धारित आयु सीमा उसके मातृत्व के अधिकार में बाधा नहीं बन सकती।
भोपाल निवासी दंपती की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि उनके 21 वर्षीय इकलौते पुत्र की पीलिया से असामयिक मृत्यु हो गई थी। दंपती जवान बेटे की मौत के बाद बच्चा चाहते थे परंतु प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं। इसके बाद उन्होंने आईवीएफ तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया और अस्पताल ने सभी मेडिकल जांच करवाई। मेडिकल जांच में वह फिट पाए गए, लेकिन सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत 50 साल से कम उम्र की महिला तथा 21 साल से ज्यादा और 55 साल से कम उम्र के पुरुष के लिए ही आईवीएफ की अनुमति होने का हवाला देकर संबंधित अस्पताल ने यह प्रक्रिया करने से इनकार कर दिया।
ये भी पढ़ें-शहडोल में अजब मामला: भतीजे की डिग्री पर चाचा बना डॉक्टर, तीन जिलों में करता रहा सरकारी नौकरी; ऐसे खुली पोल
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माता-पिता बनने की खुशी छीनी नहीं जा सकती
सुनवाई के दौरान दंपती की तरफ से तर्क दिया गया कि माता-पिता बनने की खुशी उन्हें मिलनी चाहिए और इसे कानून की बाधाओं से छीना नहीं जा सकता है। विवाहित जोड़े को इसे पाने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इसलिए, एक और बच्चा पाने की इच्छा से वह असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के जरिए बच्चा पैदा करने के लिए जरूरी इलाज करवाने के लिए अस्पताल गए थे, सिर्फ उम्र के कारण उसने यह अधिकार नहीं छीना जा सकता है।
हाईकोर्ट में दंपती ने सभी संभावित जोखिमों की जिम्मेदारी स्वयं लेने का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि दंपती किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान में आईवीएफ करा सकते हैं। संस्थान मेडिकल आधार पर अंतिम निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा, लेकिन केवल 52 वर्ष की आयु होने के आधार पर आवेदन निरस्त नहीं किया जा सकेगा।
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भोपाल निवासी दंपती की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि उनके 21 वर्षीय इकलौते पुत्र की पीलिया से असामयिक मृत्यु हो गई थी। दंपती जवान बेटे की मौत के बाद बच्चा चाहते थे परंतु प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं। इसके बाद उन्होंने आईवीएफ तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया और अस्पताल ने सभी मेडिकल जांच करवाई। मेडिकल जांच में वह फिट पाए गए, लेकिन सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत 50 साल से कम उम्र की महिला तथा 21 साल से ज्यादा और 55 साल से कम उम्र के पुरुष के लिए ही आईवीएफ की अनुमति होने का हवाला देकर संबंधित अस्पताल ने यह प्रक्रिया करने से इनकार कर दिया।
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माता-पिता बनने की खुशी छीनी नहीं जा सकती
सुनवाई के दौरान दंपती की तरफ से तर्क दिया गया कि माता-पिता बनने की खुशी उन्हें मिलनी चाहिए और इसे कानून की बाधाओं से छीना नहीं जा सकता है। विवाहित जोड़े को इसे पाने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इसलिए, एक और बच्चा पाने की इच्छा से वह असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के जरिए बच्चा पैदा करने के लिए जरूरी इलाज करवाने के लिए अस्पताल गए थे, सिर्फ उम्र के कारण उसने यह अधिकार नहीं छीना जा सकता है।
हाईकोर्ट में दंपती ने सभी संभावित जोखिमों की जिम्मेदारी स्वयं लेने का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि दंपती किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान में आईवीएफ करा सकते हैं। संस्थान मेडिकल आधार पर अंतिम निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा, लेकिन केवल 52 वर्ष की आयु होने के आधार पर आवेदन निरस्त नहीं किया जा सकेगा।
