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संकट में टाइगर स्टेट का ताज! कैसे उजड़ा कान्हा में बाघ का परिवार? नौ दिन में बाघिन समेत पांच मौतों से हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला
Published by: मंडला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:49 PM IST
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सार
कान्हा टाइगर रिजर्व में अमाही बाघिन T-141 और उसके आखिरी शावक की मौत से वन्यजीव जगत में हड़कंप मच गया है। नौ दिनों के भीतर पूरे बाघ परिवार के खत्म होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पढ़ें टाइगर स्टेट के ताज को संकट में डालने वाली ये पूरी खबर
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। बुधवार को अमाही बाघिन T-141 और उसके आखिरी बचे शावक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही महज नौ दिनों के भीतर इस बाघ परिवार के सभी पांच सदस्य खत्म हो गए, जिससे वन विभाग और पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इलाज के बावजूद नहीं बच सकी जिंदगी
बाघिन और उसके इकलौते बचे शावक को गंभीर हालत में मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। लेकिन बुधवार सुबह बाघिन ने दम तोड़ दिया, जबकि शाम को शावक की भी मौत हो गई।
जानें कब-कब हुई मौते
बाघ परिवार में मौत का सिलसिला 21 अप्रैल से शुरू हुआ था। लेकिन कब थमेगा ये बड़ा सवाल है? चलिए बता रहे हैं कब और किस शावक की मौत हुई है।
▪️ 21 अप्रैल-पहले शावक की मौत
▪️ 24 अप्रैल-दूसरा शावक मृत मिला
▪️ 25 अप्रैल-तीसरे शावक ने दम तोड़ा
▪️ 29 अप्रैल सुबह-बाघिन की मौत
▪️ 29 अप्रैल शाम-आखिरी शावक की भी मौत
फेफड़ों में संक्रमण बना वजह!
पार्क प्रबंधन के मुताबिक, मृत बाघिन की उम्र 8 से 10 साल के बीच थी, जबकि शावक की उम्र 15 से 18 महीने बताई गई है। शुरुआती जांच में फेफड़ों में गंभीर संक्रमण मौत की बड़ी वजह माना जा रहा है। दोनों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं, ताकि संक्रमण की असली वजह सामने आ सके।
ये भी पढ़ें- MP News: ट्रॉली पर चढ़े सीएम, किसानों से सीधे संवाद…सामने आया मोहन यादव का अलग अंदाज
अब उठ रहे बड़े सवाल?
एक ही बाघ परिवार के सभी सदस्यों की लगातार मौत ने कान्हा की सुरक्षा, स्वास्थ्य मॉनिटरिंग और वन्यजीव प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर संक्रमण इतना घातक कैसे हुआ.? क्या समय रहते बीमारी की पहचान नहीं हो सकी? और क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था.? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल कान्हा ने अपना एक पूरा बाघ परिवार खो दिया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण पर चिंता गहरा गई है।
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इलाज के बावजूद नहीं बच सकी जिंदगी
बाघिन और उसके इकलौते बचे शावक को गंभीर हालत में मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। लेकिन बुधवार सुबह बाघिन ने दम तोड़ दिया, जबकि शाम को शावक की भी मौत हो गई।
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जानें कब-कब हुई मौते
बाघ परिवार में मौत का सिलसिला 21 अप्रैल से शुरू हुआ था। लेकिन कब थमेगा ये बड़ा सवाल है? चलिए बता रहे हैं कब और किस शावक की मौत हुई है।
▪️ 21 अप्रैल-पहले शावक की मौत
▪️ 24 अप्रैल-दूसरा शावक मृत मिला
▪️ 25 अप्रैल-तीसरे शावक ने दम तोड़ा
▪️ 29 अप्रैल सुबह-बाघिन की मौत
▪️ 29 अप्रैल शाम-आखिरी शावक की भी मौत
फेफड़ों में संक्रमण बना वजह!
पार्क प्रबंधन के मुताबिक, मृत बाघिन की उम्र 8 से 10 साल के बीच थी, जबकि शावक की उम्र 15 से 18 महीने बताई गई है। शुरुआती जांच में फेफड़ों में गंभीर संक्रमण मौत की बड़ी वजह माना जा रहा है। दोनों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं, ताकि संक्रमण की असली वजह सामने आ सके।
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अब उठ रहे बड़े सवाल?
एक ही बाघ परिवार के सभी सदस्यों की लगातार मौत ने कान्हा की सुरक्षा, स्वास्थ्य मॉनिटरिंग और वन्यजीव प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर संक्रमण इतना घातक कैसे हुआ.? क्या समय रहते बीमारी की पहचान नहीं हो सकी? और क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था.? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल कान्हा ने अपना एक पूरा बाघ परिवार खो दिया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण पर चिंता गहरा गई है।

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