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नाभिकुंड: 1321 KM लंबी नर्मदा नदी के ठीक बीच स्थित नाभिस्थल है आस्था का केंद्र, जलस्तर गिरने पर होने लगे दर्शन

Wed, 24 Jun 2026 09:38 PM IST
हरदा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदा Published by: हरदा ब्यूरो Updated Wed, 24 Jun 2026 09:38 PM IST
सार

Midpoint of Narmada River: हरदा के हंडिया स्थित नर्मदा का पावन नाभि कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यह नर्मदा नदी का मध्य बिंदु है। गर्मी में इसके दर्शन होते हैं। यहां स्नान और पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है। क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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MP News: Situated right in the middle of the 1321 km long Narmada River, Nabhikund is a centre of faith
नर्मदा के नाभिस्थल पर स्थित मंदिर, जहां भगवान गणेश और छिपा हुआ स्वयंभू शिवलिंग मौजूद है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी का नाभिस्थल हरदा जिले के हंडिया स्थित प्रसिद्ध रिद्धनाथ घाट के समीप मां नर्मदा का पावन नाभिस्थल (नाभि कुंड) श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यह स्थान नर्मदा नदी की 1321 किलोमीटर लंबी यात्रा का ठीक मध्य बिंदु है। यहां से नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक और गुजरात की खंभात की खाड़ी में समुद्र के संगम स्थल की दूरी लगभग समान है। ये स्थान अधिकांश नर्मदा में जलमग्न रहता है। साल के कुछ दिनों में जलस्तर कम होने पर इसके दर्शन होने लगते हैं। इन दिनों यहां दर्शन हो रहे हैं। इसके लिए देश-विदेश से भी लोग पहुंच रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाभि कुंड के दर्शन और यहां स्नान करने से अनेक प्रकार के रोग, कष्ट एवं दुख दूर होते हैं। 
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सिद्ध व चमत्कारिक स्थान के रूप में मान्यता
हरदा के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं संत पुजारी संघ के जिलाध्यक्ष पंडित मुरलीधर व्यास के अनुसार नर्मदा का नाभि कुंड देवास जिले के नेमावर स्थित सिद्धनाथ मंदिर और हरदा जिले के हंडिया के रिद्धनाथ घाट के मध्य स्थित है। धार्मिक दृष्टि से यह स्थान अत्यंत सिद्ध एवं चमत्कारी माना जाता है। यहां किए गए पूजा-पाठ, अनुष्ठान, दान-पुण्य और तपस्या का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। 
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नर्मदा का जलस्तर कम होने पर होते हैं यहां के दर्शन - फोटो : अमर उजाला
महाभारत काल में था नाभिपुर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में इस क्षेत्र को नाभिपुर कहा जाता था और यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। वर्तमान सरकारी अभिलेखों में यह क्षेत्र मामा कदम के नाम से दर्ज है। नाभि कुंड में प्राकृतिक रूप से निर्मित स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। मान्यता है कि भगवान गणेश ने भी यहां कठोर तपस्या की थी, जिसकी स्मृति में उनकी प्रतिमा स्थापित है। सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध नाभि कुंड को सिद्ध क्षेत्र माना जाता है। कहा जाता है कि यहां सिद्धनाथ जी की स्थापना आदि शंकराचार्य परंपरा के संतों द्वारा की गई थी। नर्मदा परिक्रमा करने वाले साधु-संत और श्रद्धालु इस स्थान को विशेष महत्व देते हैं। हंडिया-नेमावर क्षेत्र नर्मदा परिक्रमा मार्ग के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। 

 

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अब नजर आने लगा है नर्मदा का नाभिस्थल - फोटो : अमर उजाला
नर्मदा के दर्शन मात्र से पापों का क्षय 
मैकल पर्वत पर अंधकासुर नामक राक्षस का अत्याचार बढ़ गया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उसका वध किया। युद्ध के दौरान शिवजी के शरीर से निकली पसीने की बूंदें मैकल पर्वत पर गिरीं, जिनसे मां नर्मदा का प्राकट्य हुआ। जब देवताओं ने उन्हें पृथ्वी पर प्रवाहित होने का आग्रह किया, तब मां नर्मदा ने गंगा के समान पवित्रता का वरदान मांगा। कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि जहां गंगा के नाम स्मरण मात्र से पाप नष्ट होंगे, वहीं मां नर्मदा के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होगा। यही कारण है कि नर्मदा को भारत की सबसे दिव्य और पूजनीय नदियों में स्थान प्राप्त है। 

 
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मंदिर के बीच में गड्ढे में शिवलिंग मौजूद है, मान्यता है कि ये स्वयंभू शिवलिंग है। - फोटो : अमर उजाला
गर्मी में आसान होते हैं नाभिकुंड के दर्शन
स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी के मौसम में नर्मदा का जलस्तर कम होने से श्रद्धालु नाव के माध्यम से नाभि कुंड तक पहुंचकर दर्शन कर पाते हैं। वहीं वर्षा ऋतु में जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाने के कारण नाभि कुंड पूरी तरह जलमग्न हो जाता है और कई बार दिखाई भी नहीं देता। मंदिरों और आस्था का संगम हंडिया-नेमावर घाट क्षेत्र में अनेक प्राचीन मंदिर स्थित हैं। यहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा, स्नान, पूजा-अर्चना और जल संग्रह के लिए पहुंचते हैं। नर्मदा धाम हंडिया-नेमावर आज मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। 

 

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लोग शिवलिंग के दर्शन करने दूर-दूर से पहुंचते हैं। - फोटो : अमर उजाला
हंडिया में ऋषि जमदग्नि और सहस्रार्जुन का हुआ था मिलन
नर्मदा नदी के मध्य बिंदु पर स्थित माने जाने वाले हंडिया का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व सदियों पुराना है। नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा की शुरुआत अक्सर इसी स्थान से करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां ऋषि जमदग्नि और हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन का मिलन हुआ था। मुगलकाल में हंडिया प्रशासनिक, व्यापारिक, धार्मिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र रहा। आइने-अकबरी में इसे मालवा सूबे की एक महत्वपूर्ण सरकार के रूप में उल्लेखित किया गया है। 

नर्मदा पर नए फोरलेन पुल से इंदौर-हरदा आवागमन होगा आसान 
नर्मदा नदी के दोनों तटों पर बसे ऐतिहासिक और धार्मिक नगर नेमावर एवं हंडिया को जोड़ने के लिए भारतमाला परियोजना के अंतर्गत नए फोरलेन पुल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना देवास जिले की कन्नौद तहसील के ग्राम ननासा से हरदा जिले के पिड़गांव तक लगभग 47.5 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का हिस्सा है, जिसकी कुल लागत 867 करोड़ रुपये बताई जा रही है। नई सड़क परियोजना तहत बनने वाला पुल हंडिया के शिव करुणाधाम मार्ग से नेमावर के मेलघाट क्षेत्र तक बनाया जा रहा है। फोरलेन पुल और सड़क निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इनके निर्माण से देवास, हरदा और इंदौर के बीच यातायात सुगम होगा तथा क्षेत्र के आर्थिक एवं पर्यटन विकास को भी नई गति मिलेगी। क्षेत्र के लोगों को धार्मिक नगरी नेमावर और ऐतिहासिक नगर हंडिया में पर्यटन एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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