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MP News: ओंकारेश्वर हादसे पर पहली कार्रवाई, उपयंत्री निलंबित; अब बाकी जिम्मेदारों पर उठे सवाल
Mon, 27 Jul 2026 10:11 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:11 PM IST
सार
Madhya Pradesh: ओंकारेश्वर की ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से महाराष्ट्र के नागपुर निवासी तीन वर्षीय मासूम की दर्दनाक मृत्यु को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने नगर परिषद ओंकारेश्वर के उपयंत्री सुरेशचंद्र पाटीदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओंकारेश्वर की ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से महाराष्ट्र के नागपुर निवासी तीन वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर परिषद के उपयंत्री सुरेशचंद्र पाटीदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने यह कार्रवाई की। हालांकि, इस फैसले के बाद अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या केवल एक अधिकारी का निलंबन इस गंभीर लापरवाही के लिए पर्याप्त माना जा सकता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई
मासूम की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। घटना को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर परिषद ओंकारेश्वर के उपयंत्री सुरेशचंद्र पाटीदार को निलंबित कर दिया गया। प्रशासन ने इसे प्रारंभिक कार्रवाई बताया है।
क्या केवल उपयंत्री ही जिम्मेदार हैं?
घटना ऐसे स्थान पर हुई, जहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सेप्टिक टैंक खुला छोड़ दिया गया था। यदि समय रहते टैंक को ढक दिया जाता, मजबूत बैरिकेडिंग की जाती, चेतावनी बोर्ड लगाए जाते और सुरक्षा मानकों का पालन होता, तो संभव है कि यह हादसा टल सकता था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पूरी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी तक सीमित है या अन्य संबंधित अधिकारी, एजेंसियां और ठेकेदार भी इसके लिए जवाबदेह हैं।
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उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग
इस मामले को केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है। मांग उठ रही है कि अतिक्रमण हटाने वाली एजेंसी, संबंधित ठेकेदार, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और कार्य की निगरानी करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय की जाए।
यह भी पढ़ें: राहुल गांधी का बड़ा हमला: केन-बेतवा परियोजना को लेकर साधा निशाना, बोले-आदिवासियों की आवाज दबा रही मोदी सरकार
धार्मिक नगरी में सुरक्षा पर उठे सवाल
ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल निलंबन तक सीमित रहती है या वास्तविक जिम्मेदारों तक भी कार्रवाई पहुंचती है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई
मासूम की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। घटना को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर परिषद ओंकारेश्वर के उपयंत्री सुरेशचंद्र पाटीदार को निलंबित कर दिया गया। प्रशासन ने इसे प्रारंभिक कार्रवाई बताया है।
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क्या केवल उपयंत्री ही जिम्मेदार हैं?
घटना ऐसे स्थान पर हुई, जहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सेप्टिक टैंक खुला छोड़ दिया गया था। यदि समय रहते टैंक को ढक दिया जाता, मजबूत बैरिकेडिंग की जाती, चेतावनी बोर्ड लगाए जाते और सुरक्षा मानकों का पालन होता, तो संभव है कि यह हादसा टल सकता था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पूरी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी तक सीमित है या अन्य संबंधित अधिकारी, एजेंसियां और ठेकेदार भी इसके लिए जवाबदेह हैं।
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उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग
इस मामले को केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है। मांग उठ रही है कि अतिक्रमण हटाने वाली एजेंसी, संबंधित ठेकेदार, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और कार्य की निगरानी करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय की जाए।
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धार्मिक नगरी में सुरक्षा पर उठे सवाल
ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल निलंबन तक सीमित रहती है या वास्तविक जिम्मेदारों तक भी कार्रवाई पहुंचती है।
