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Satna News: सरकारी स्कूलों में मरम्मत के नाम पर 28 लाख का फर्जीवाड़ा, बिना काम किए पास कराए बिल, एफआईआर दर्ज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: सतना ब्यूरो Updated Sat, 24 Jan 2026 07:16 PM IST
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सार

जिले में शासकीय स्कूलों की मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने की साजिश सामने आई है। बिना कोई काम कराए लाखों रुपये के भुगतान की तैयारी कर ली गई थी, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया। इस खेल पर अब पुलिस की जांच शुरू हो गई है।

28 lakh rupees fraud in repair of schools, bills passed without work done, FIR against contractor
सरकारी स्कूलों में मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का एक और गंभीर मामला सामने आया है। जिले में शासकीय विद्यालयों की मरम्मत के नाम पर बिना एक ईंट जोड़े और बिना एक दीवार रंगे ही शासन को करीब 28 लाख 98 हजार 293 रुपये का चूना लगाने की साजिश रची गई। मामले में शिक्षा विभाग की शिकायत पर पुलिस ने संविदाकार के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का प्रकरण दर्ज कर लिया है।

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जानकारी के अनुसार जिले के शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों में भवन मरम्मत, रंगाई-पुताई एवं अन्य सुधार कार्यों के लिए टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर के तहत सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन नामक फर्म को जिले के छह शासकीय विद्यालयों में मरम्मत कार्य का जिम्मा सौंपा गया।
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आरोप है कि संविदाकार सत्यव्रत तिवारी ने किसी भी विद्यालय में वास्तविक रूप से कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया लेकिन कागजों में सभी काम पूरे दिखा दिए। इसके बाद करीब 5-5 लाख रुपये प्रति विद्यालय के हिसाब से फर्जी बिल तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

इन छह शासकीय विद्यालयों के नाम पर बनाए गए फर्जी बिल
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खम्हरिया तिवरियान
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गौरैया,
सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बगहा 
कन्या हाईस्कूल, माधवगढ़
हाईस्कूल, मूढ़हा
हाईस्कूल, सिजहटा 
इन सभी स्कूलों के नाम पर भवन मरम्मत, रंगाई-पुताई एवं सुधार कार्य दर्शाते हुए बिल तैयार किए गए।

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प्राचार्यों के फर्जी हस्ताक्षर से किया फर्जीवाड़ा
फर्जी बिलों को वैध दिखाने के लिए संविदाकार ने सभी विद्यालयों के प्राचार्यों के हस्ताक्षर भी कूटरचित तरीके से कर दिए। बिल भुगतान की फाइल जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची, तो दस्तावेजों में दर्ज हस्ताक्षर संदिग्ध प्रतीत हुए। 

इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों से सीधे संपर्क कर यह जानकारी ली कि क्या उनके स्कूलों में मरम्मत कार्य पूरे हो चुके हैं। बातचीत में जब प्राचार्यों ने किसी भी प्रकार के कार्य से इंकार किया, तब पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं।

भौतिक सत्यापन में सामने आई सच्चाई
मामले के संदेहास्पद होने पर शिक्षा विभाग द्वारा सभी छह विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में यह साफ हो गया कि किसी भी विद्यालय में न तो रंगाई-पुताई हुई थी और न ही किसी प्रकार का मरम्मत कार्य किया गया था। इसके बावजूद भुगतान की फाइल पूरी कर ली गई थी। घोटाले के सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में संविदाकार को तलब किया गया लेकिन वह विभाग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की लिखित शिकायत सिटी कोतवाली थाना पुलिस को सौंपी।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन के मालिक सत्यव्रत तिवारी के खिलाफ जालसाजी, कूटरचना और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच, हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच और भुगतान प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

मामले पर सीएसपी देवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि यह सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का मामला है। छह शासकीय विद्यालयों में मरम्मत कार्य के फर्जी देयक प्रस्तुत किए गए थे, जबकि वास्तविकता में कोई कार्य नहीं हुआ था। जिला शिक्षा अधिकारी से प्राप्त पत्र के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।

हालांकि फिलहाल मामला संविदाकार तक सीमित है लेकिन सूत्रों की मानें तो बिल भुगतान की प्रक्रिया में शामिल विभागीय कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस जांच के बाद आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं।

 

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