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MP News: MP के इस जिले में नवरात्रि के पहले ही दिन मां जगदंबा की मूर्ति चोरी, हजार साल पुराना मंदिर भी ध्वस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 03 Oct 2024 05:49 PM IST
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सार
प्रसिद्ध तुर्रानाथ धाम में माता का एक प्राचीन मंदिर था जो कि लगभग 1000 साल से भी ज्यादा पुराना बताया गया है। उसकी कलाकृतियां बेहद ही प्राचीन हैं और एक बड़े से चट्टान को काटकर मंदिर का निर्माण किया गया था।
सीधी में प्राचीन मंदिर मलबे के रूप में बदल गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सीधी जिले के आदिवासी अंचल कुसमी के इकलौते आस्था का केंद्र माने जाने वाले तुर्रानाथ धाम में स्थित पार्वती मंदिर को अज्ञात लोगों ने ध्वस्त कर दिया है। साथ ही मंदिर की मूर्ति को भी चुरा लिया गया है।
बता दें कि सीधी जिला मुख्यालय से 130 किलोमीटर की दूरी पर जंगलों के बीच तुर्राधाम स्थित है। जहां मां भगवती के साथ भोलेनाथ विद्यमान हैं। प्रसिद्ध तुर्रानाथ धाम में माता का एक प्राचीन मंदिर था जो कि लगभग 1000 साल से भी ज्यादा पुराना बताया गया है। उसकी कलाकृतियां बेहद ही प्राचीन हैं और एक बड़े से चट्टान को काटकर मंदिर का निर्माण किया गया था। लगभग 10 टन से ज्यादा का मंदिर का वजन था, जिसे नवरात्रि के पहले ही दिन उसे चोरी कर लिया गया। हालांकि कुछ अवशेष अभी भी मंदिर के बचे हुए हैं।
वहीं पास की ही रहने वाले दयाराम प्रजापति ने बताया कि आज से तीन दिन पहले मैं गया हुआ था, लेकिन मंदिर वहां पर मौजूद था। आज सुबह जब मैं मां का दर्शन करने पहुंचा तो मंदिर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। मंदिर की जगह पर जेसीबी के माध्यम से गड्ढा खोदा हुआ दिखाई दे रहा है। मूर्ति गायब है और मंदिर के अवशेष मात्र बचे हैं।
पूरे मामले को लेकर थाना प्रभारी कुसमी भूपेश बैस ने बताया कि शायद यह मामला पुराना है, पर किसी ने देखा नहीं है। मामले की जानकारी आज लगी है जहां मूर्ति और मंदिर गायब है। यह मंदिर जंगल के बीचो-बीच है, जिसकी वजह से लोगों को पता नहीं चला। साथ ही वन विभाग के अंतर्गत यह आती है, इसलिए वन विभाग के टीम को सूचना दे दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।
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बता दें कि सीधी जिला मुख्यालय से 130 किलोमीटर की दूरी पर जंगलों के बीच तुर्राधाम स्थित है। जहां मां भगवती के साथ भोलेनाथ विद्यमान हैं। प्रसिद्ध तुर्रानाथ धाम में माता का एक प्राचीन मंदिर था जो कि लगभग 1000 साल से भी ज्यादा पुराना बताया गया है। उसकी कलाकृतियां बेहद ही प्राचीन हैं और एक बड़े से चट्टान को काटकर मंदिर का निर्माण किया गया था। लगभग 10 टन से ज्यादा का मंदिर का वजन था, जिसे नवरात्रि के पहले ही दिन उसे चोरी कर लिया गया। हालांकि कुछ अवशेष अभी भी मंदिर के बचे हुए हैं।
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वहीं पास की ही रहने वाले दयाराम प्रजापति ने बताया कि आज से तीन दिन पहले मैं गया हुआ था, लेकिन मंदिर वहां पर मौजूद था। आज सुबह जब मैं मां का दर्शन करने पहुंचा तो मंदिर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। मंदिर की जगह पर जेसीबी के माध्यम से गड्ढा खोदा हुआ दिखाई दे रहा है। मूर्ति गायब है और मंदिर के अवशेष मात्र बचे हैं।
पूरे मामले को लेकर थाना प्रभारी कुसमी भूपेश बैस ने बताया कि शायद यह मामला पुराना है, पर किसी ने देखा नहीं है। मामले की जानकारी आज लगी है जहां मूर्ति और मंदिर गायब है। यह मंदिर जंगल के बीचो-बीच है, जिसकी वजह से लोगों को पता नहीं चला। साथ ही वन विभाग के अंतर्गत यह आती है, इसलिए वन विभाग के टीम को सूचना दे दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।

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