सीधी जिले के धौहनी विधानसभा क्षेत्र के कुसमी स्थित शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इन दिनों एक अनोखी प्राकृतिक घटना को लेकर चर्चा में है। स्कूल की छत के अंदरूनी हिस्से में मिट्टी जैसे दिखने वाले रहस्यमयी घोंसले पाए गए हैं, जिन्हें एक खास पक्षी ने अपनी लार और मिट्टी को मिलाकर बनाया है। स्थानीय लोग इस पक्षी को ‘कन्हैया चिड़िया’ के नाम से जानते हैं।
यह स्कूल बरी नदी के पास स्थित है, जिसे कुसमी क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी माना जाता है। यह नदी कोडार से निकलकर पूरे इलाके में बहती है और संजय टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों को भी कवर करती है। बरी नदी का इलाका औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और घने पेड़ों से भरपूर है, जिससे यहां का पर्यावरण काफी अनुकूल बना रहता है। ग्रामीणों का मानना है कि ‘कन्हैया चिड़िया’ ऐसे ही प्राकृतिक और औषधीय क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती है।
विधायक ने किया मौके का निरीक्षण
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम मौके पर पहुंचे और घोंसलों का निरीक्षण किया। उन्होंने करीब से इन घोंसलों को देखा और वन विभाग को इसकी जानकारी दी। निरीक्षण में सामने आया कि ये घोंसले सामान्य नहीं हैं, बल्कि पक्षी ने अपनी लार और मिट्टी को मिलाकर बेहद कुशलता से इन्हें तैयार किया है।
ग्रामीणों के लिए बना कौतूहल
स्थानीय ग्रामीण बाबादीन यादव ने बताया, “हम लोग इस चिड़िया को कन्हैया के नाम से जानते हैं। यह बहुत मीठी आवाज में चहचहाती है और जहां पेड़-पौधे और औषधीय वातावरण ज्यादा होता है, वहीं दिखाई देती है। पहली बार इसे स्कूल में इस तरह घोंसला बनाते देख रहे हैं, जो हमारे लिए हैरानी की बात है।” जानकारी के अनुसार, इस पक्षी को वैज्ञानिक रूप से वायर-टेल्ड स्वैलो (Hirundo smithii) कहा जाता है। यह एक छोटी और आकर्षक अबाबील प्रजाति है, जो आमतौर पर नदियों और जल स्रोतों के आसपास पाई जाती है। यह पक्षी उड़ते हुए छोटे कीड़े-मकोड़ों को खाकर जीवित रहता है और अपने अनोखे घोंसले बनाने के लिए जाना जाता है।
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वन विभाग की जांच शुरू
शनिवार सुबह वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और घोंसलों व पक्षियों का निरीक्षण किया। टीम में वन परिक्षेत्राधिकारी टमसार बफर हर्षित मिश्रा, वन रक्षक चन्द्र पनिका, मोहित प्रजापति, चौकीदार हीरालाल यादव और स्वीपर कैलाश बंशल शामिल थे। वन परिक्षेत्राधिकारी हर्षित मिश्रा ने बताया, “प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह पक्षी अपने घोंसले लार और मिट्टी से बनाता है, जो इसकी खास पहचान है। टीम द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही प्रजाति की पूरी पुष्टि की जाएगी।”