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Umaria News: वन्यजीवों को केनाइन वायरस से बचाने की तैयारी, 1500 से ज्यादा आवारा कुत्तों का होगा टीकाकरण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 12:10 PM IST
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सार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बाघों और अन्य वन्यजीवों में केनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे को देखते हुए रिजर्व क्षेत्र और आसपास के गांवों में रहने वाले 1500 से अधिक आवारा कुत्तों के टीकाकरण की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व
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विस्तार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने वन्यजीवों को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के संभावित खतरे को देखते हुए टाइगर रिजर्व क्षेत्र और उसके आसपास के गांवों में रहने वाले 1500 से अधिक आवारा कुत्तों के व्यापक टीकाकरण की तैयारी पूरी कर ली गई है। वैक्सीन की खेप पहुंचते ही अगले एक-दो दिनों के भीतर अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार केनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्य रूप से कुत्तों में पाया जाने वाला अत्यंत संक्रामक रोग है। यह संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आने से अन्य वन्यजीवों तक भी पहुंच सकता है। विशेष रूप से बाघ, तेंदुआ और अन्य मांसाहारी वन्यजीव इस वायरस की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इस बीमारी की रोकथाम बेहद जरूरी मानी जा रही है।
टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने अभियान शुरू करने से पहले क्षेत्रीय सर्वे कराकर 1500 से अधिक आवारा कुत्तों की पहचान की है। इनमें रिजर्व क्षेत्र के आसपास के गांवों, बस्तियों और वन सीमा से सटे इलाकों में घूमने वाले कुत्ते शामिल हैं। इन सभी को चरणबद्ध तरीके से टीका लगाया जाएगा।
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ये भी पढ़ें: MP News: चंदा जुटाया, श्रमदान से पहाड़ काटकर बना दी दो किमी सड़क; वर्षों तक नहीं बनी सड़क तो ग्रामीणों ने की पहल
अभियान को सफल बनाने के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है। टीम के सदस्यों को कुत्तों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उन्हें टीका लगाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। टीकाकरण के दौरान पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी मानकों का पालन किया जाएगा। टीकाकरण के बाद प्रत्येक कुत्ते के गले में विशेष पहचान पट्टा लगाया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि संबंधित कुत्ते का टीकाकरण हो चुका है। साथ ही भविष्य में निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान भी यह पहचान उपयोगी साबित होगी।
बीटीआर प्रबंधन ने केवल प्रारंभिक टीकाकरण तक ही अभियान को सीमित नहीं रखा है। सभी चिन्हित कुत्तों को निर्धारित समय पर बूस्टर डोज भी दी जाएगी, ताकि उन्हें लंबे समय तक वायरस से सुरक्षा मिल सके और संक्रमण फैलने की संभावना न्यूनतम हो।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि वैक्सीन और आवश्यक दवाइयां पहुंचते ही टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। उनके अनुसार इस पहल से केनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और बांधवगढ़ के बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सकेगा। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह अभियान न केवल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए बल्कि देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार केनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्य रूप से कुत्तों में पाया जाने वाला अत्यंत संक्रामक रोग है। यह संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आने से अन्य वन्यजीवों तक भी पहुंच सकता है। विशेष रूप से बाघ, तेंदुआ और अन्य मांसाहारी वन्यजीव इस वायरस की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इस बीमारी की रोकथाम बेहद जरूरी मानी जा रही है।
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टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने अभियान शुरू करने से पहले क्षेत्रीय सर्वे कराकर 1500 से अधिक आवारा कुत्तों की पहचान की है। इनमें रिजर्व क्षेत्र के आसपास के गांवों, बस्तियों और वन सीमा से सटे इलाकों में घूमने वाले कुत्ते शामिल हैं। इन सभी को चरणबद्ध तरीके से टीका लगाया जाएगा।
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अभियान को सफल बनाने के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है। टीम के सदस्यों को कुत्तों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उन्हें टीका लगाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। टीकाकरण के दौरान पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी मानकों का पालन किया जाएगा। टीकाकरण के बाद प्रत्येक कुत्ते के गले में विशेष पहचान पट्टा लगाया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि संबंधित कुत्ते का टीकाकरण हो चुका है। साथ ही भविष्य में निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान भी यह पहचान उपयोगी साबित होगी।
बीटीआर प्रबंधन ने केवल प्रारंभिक टीकाकरण तक ही अभियान को सीमित नहीं रखा है। सभी चिन्हित कुत्तों को निर्धारित समय पर बूस्टर डोज भी दी जाएगी, ताकि उन्हें लंबे समय तक वायरस से सुरक्षा मिल सके और संक्रमण फैलने की संभावना न्यूनतम हो।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि वैक्सीन और आवश्यक दवाइयां पहुंचते ही टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। उनके अनुसार इस पहल से केनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और बांधवगढ़ के बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सकेगा। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह अभियान न केवल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए बल्कि देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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