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भारत के वो तीन राष्ट्रपति, जो दान कर देते थे अपने वेतन का 70 से 75 फीसदी हिस्सा

Sat, 22 Aug 2020 09:12 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sat, 22 Aug 2020 09:12 AM IST
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3 president of India who cut their own salaries 70 percent
भारत का राष्ट्रपति भवन - फोटो : सोशल मीडिया

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में इन दिनों देश में प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री और सांसद-विधायक अपनी सैलरी में 30 फीसदी की कटौती करा रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी अपनी सैलरी का केवल 70 फीसदी हिस्सा ही ले रहे हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इससे पहले भी हमारे देश में 3 ऐसे राष्ट्रपति हुए, जो अपने वेतन का केवल 25 से 30 फीसदी भाग ही लेते थे।

3 president of India who cut their own salaries 70 percent
डॉ राजेंद्र प्रसाद - फोटो : फाइल फोटो

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद
डॉ राजेंद्र प्रसाद हमारे देश के पहले राष्ट्रपति थे। आजादी की लड़ाई में भाग लेने से पहले डॉ. राजेंद्र प्रसाद पटना के महंगे वकीलों में थे, लेकिन महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया। राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी उन्होंने अपनी साधारण जिंदगी और कम खर्च के कई उदाहरण पेश किए। साल 1950 में जब डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने, तो उन्हें लंबे-चौड़े वायसराय हाउस में रहने में भी हिचकिचाहट थी। इस भवन में राजेंद्र प्रसाद के प्रवेश करने के साथ ही इसका नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन हो गया। भारत का राष्ट्रपति भवन आज भी दुनिया के सबसे बड़े परिसर वाले प्रेसीडेंट हाउस में है।

3 president of India who cut their own salaries 70 percent
डॉ राजेंद्र प्रसाद - फोटो : फाइल फोटो

वेतन का मात्र 25 फीसदी हिस्सा लेने वाले डॉ राजेंद्र प्रसाद
उस समय राष्ट्रपति का वेतन 10,000 रुपये प्रतिमाह होता था। इसमें से राजेंद्र प्रसाद ने केवल 50 फीसदी लेना स्वीकार किया और शे राशि सरकारी निधि में दे देते थे। राष्ट्रपति रहते हुए राजेंद्र प्रसाद ने बाद के बरसों में अपने वेतन से और भी कटौती करानी शुरू कर दी। बाद में वो केवल अपने वेतन का 25 फीसदी हिस्सा लेते थे।

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डॉ. राधाकृष्णन - फोटो : फाइल फोटो

देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन
भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने डॉ. राधाकृष्णन भी अपने वेतन का 75 फीसदी हिस्सा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दे देते थे। इसके बाद आयकर काटने के बाद उन्हें 1900 रुपए ही मिलते थे। डॉ. राधाकृष्णन 1962 से लेकर 1967 तक राष्ट्रपति रहे। राधाकृष्णन भी अपनी साधारण जीवनशैली के लिए जाने जाते थे

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नीलम संजीव रेड्डी - फोटो : फाइल फोटो

देश के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी
आंध्र प्रदेश के रहने वाले नीलम संजीव रेड्डी देश के छठे राष्ट्रपति थे। जब आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना, तो वो उसके पहले मुख्यमंत्री बने। अमीर और जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले नीलम संजीव रेड्डी ने अपनी 60 एकड़ जमीन सरकार को दे दी। साल 1977 में नीलम संजीव रेड्डी देश के छठे राष्ट्रपति बने। नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रपति के तौर पर मिलने वाले वेतन में केवल 30 फीसदी हिस्सा ही लेते थे। बाकी राशि वो सरकारी निधि में दे देते थे।

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