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Lunar Swirls: क्या है चंद्रमा के चमकीले भंवर का रहस्य? वैज्ञानिकों को नए शोध में मिला जवाब

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sun, 12 Nov 2023 12:15 PM IST
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'Lunar swirls' have confused scientists for years New NASA moon data might clear things up
Lunar swirls - फोटो : NASA

Lunar Swirls: नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा के बारे में एक बेहद रोचक खोज की है। ऑर्बिटर की यह खोज चांद की सतह पर स्थित चक्करों से जुड़ी है। बताया गया है कि यह चक्कर चांद की भौतिक विशेषताओं में बदलाव संबंधित हैं। चंद्रमा की सतह पर मुड़े हुए नजर वाले धब्बे चंद्र भंवर हैं। यह सूर्य के प्रकाश को उच्च स्तर पर प्रतिबिंबित करने की वजह से अधिक चमकते हैं। किसी भी वस्तु की तर से अंतरिक्ष में सूर्य के प्रकाश की मात्रा वापस परावर्तित होती है, तो उसे अल्बेडो कहा जाता है। चंद्रमा के इन भंवरों को अक्सर हाई अल्बेडो कहा जाता है। 



चंद्रमा के सुदूर भाग पर प्राचीन ज्वालामुखी से बेसाल्ट चट्टान बने हैं। यह चक्कर बेसाल्ट चट्टान के अंधेरे मैदान और उजाले वाले चंद्रमा के हिस्से पर मौजूद हैं। लेकिन इनके निर्माण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस चलती है। इनके बनने को यह समझने के लिए महत्वपूर्ण यह है कि आखिर चंद्रमा के सतह का निर्माण कैसे हुआ?

 

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Lunar Swirls - फोटो : iStock

इसके अलावा ग्रह और चंद्रमा की सतहें आसपास के अंतरिक्ष वातावरण पर कैसे प्रभाव डालती हैं? वैज्ञाकिों की रुचि इस खोज में बढ़ी है कि यह चक्कर कैसे बने? क्योंकि इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। 
 

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Lunar Swirls - फोटो : iStock

नए शोध में मिली यह जानकारी

अब इस बीच इससे जुड़ा एक शोध सामने आया है। ग्रह विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक जॉन वेरिच इस शोध के मुख्य लेखक हैं। उनका कहना है कि माना जाता है कि चंद्र भंवर से स्थान या आकार पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

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Lunar Swirls - फोटो : iStock

उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि हाल के शोध ने भंवर को लेकर जो पारंपरिक धारणा है, उसको चुनौती दी है। चंद्रमा के पिछले हिस्से पर भंवर है। अंधेरे वाले क्षेत्र से करीब 9.8 फीट नीचे यह भंवर है, तो वहीं प्रकाश क्षेत्र में मौजूद भंवर अंधेरे इलाकों से 13 फीट नीचे रहे।

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Lunar Swirls - फोटो : iStock

अभी समझ नहीं सके हैं वैज्ञानिक

शोधकर्ताओं का कहना है कि चमकीले क्षेत्र नीचे रहते हैं, लेकिन यह कहना आसान नहीं है। अगर ऐसा होता है, तो इसके लिए ऊंचाई वाले मानचित्र से संबंध जोड़ना आसान है। इसके बजाय यह संबंध सिर्फ कभी देखते हैं। जब चमकीले क्षेत्रों की औसत ऊंचाई और अंधेरे क्षेत्रों की औसत ऊंचाई की तुलना की जाती है। 

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