घड़ियां हमें सही वक्त बताने के लिए होती हैं ताकि हम वक्त पर अपने काम पूरे कर सकें। देर न हो, न ही वक्त से पहले कोई काम हो। पर, अगर घड़ी ही लेट हो जाए, या तेज चले तो? हमारा तो सारा का सारा शेड्यूल ही बिगड़ जाएगा। समय पर दफ्तर पहुंच नहीं पाएंगे। काम में देरी होगी या वक्त से पहले पहुंच जाएंगे।
दुनिया की सबसे अजीब घड़ी, जो साल में सिर्फ एक दिन ही बताती है सही समय
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यूं तो एडिनबरा शहर गोथिक शैली में बनी अपनी ऐतिहासिक इमारतों और खास स्कॉटिश जीवनशैली के लिए मशहूर है। मगर, यहां की ये घड़ी भी सैलानियों को खूब लुभाती है। एडिनबरा की प्रिंसेस स्ट्रीट पर स्थित है बालमोरल होटल और इसी के घंटाघर में लगी ये घड़ी काफी मशहूर है। 58 मीटर ऊंचे घंटाघर को अगर एडिनबरा के काल्टन हिल इलाके से देखें तो लगता है कि ये शहर की खूबसूरत इमारतों का हर्फे-आखिर है।
वेवरले ट्रेन स्टेशन के ऊपर से झांकती ये घड़ी, डुगाल्ड स्टेवर्ट स्मारक के करीब है। इसे एडिनबरा कासल से देखें तो यूं लगता है कि सदियों पहले इस महल के इर्द-गिर्द हुई जंगों की गवाह है ये घड़ी। हालांकि ये उतनी पुरानी है नहीं।
ग्रीनविच मीनटाइम यानी जीएमटी से तीन मिनट आगे इस घड़ी के पीछे अजब सोच है। पहली दफा 1902 में बालमोरल होटल को खोला गया था। इसे उस वक्त नॉर्थ ब्रिटिश स्टेशन होटल नाम दिया गया था। उस वक्त मानो ये वेवरले स्टेशन की पहरेदार के तौर पर वहां खड़ी होती थी। इलाके में ट्रेनों की आवाजाही के लिए जिम्मेदार कंपनी नॉर्थ ब्रिटिश रेलवे कंपनी ने ये घड़ी मानो इसलिए वहां लगा दी थी कि कोई भी मुसाफिर लेट न हो।
होटल और रेलवे कंपनी के प्रबंधकों का मानना था कि जब मुसाफिरों के पास तीन मिनट ज्यादा वक्त होगा तो वो आराम से टिकट ले सकेंगे। गाड़ियों से अपना सामान उतार कर ट्रेन में रख सकेंगे। मगर, आज भी बेवक्त की चाल चलने वाली इस घड़ी की तेजी, एडिनबरा शहर को वक्त का पाबंद बनाए रखती है।
साल में एक दिन सही समय बताती है घड़ी
होटल आने वाले लोगों को घड़ी दिखाने वाले गाइड इयान डेविडसन कहते हैं कि, "ये एडिनबरा की सबसे दिलचस्प मगर खुफिया जगह है। लोग अक्सर सोचते हैं कि ऊपर से देखने पर शहर की सड़कें और गलियां कैसी दिखती हैं।"
डेविडसन बताते हैं कि 1902 से लेकर अब तक यानी 116 सालों में इस घड़ी में एक ही बदलाव आया है। पहले जहां ये घड़ी हाथ से चलाई जाती थी, वहीं अब ये बिजली से चलती है। वैसे, ये घड़ी हर वक्त गलत समय बताती है, ऐसा भी नहीं है। हर नए साल की पूर्व संध्या पर यहां एक इंजीनियर भेजा जाता है जो घड़ी का वक्त सही करे ताकि नए साल की परेड सही वक्त पर ही निकले। डेविडसन कहते हैं कि उस एक दिन के सिवा सब को लगता है कि ये घड़ी गलत समय बताती है।
घड़ी में भले ही 116 में कोई बदलाव न आया हो, इसके इर्द-गिर्द एडिनबरा में बहुत कुछ बदल गया है। दूसरे विश्व युद्ध के खात्मे के बाद 1948 में ब्रिटेन ने रेलवे का राष्ट्रीयकरण कर दिया। भाप के इंजन बंद हो गए। नॉर्दर्न ब्रिटिश स्टेशन होटल का ताल्लुक भी रेलवे से खत्म हो गया। 1990 में इस होटल को नया नाम दिया गया- द बालमोरल होटल। मालिक बदले तो करोड़ों रुपए लगाकर होटल को नए सिरे से संवारा गया। नहीं बदला, तो घड़ी का गलत होना।