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B'day Spcl: गुरदास मान से जुड़े 3 किस्से और 7 अनकही बातें, मौत का मंजर देख लिखा था गाना
मशहूर पंजाबी सिंगर और एक्टर गुरदास मान का 4 जनवरी को जन्मदिन होता है। गुरदास मान ने अपनी खूबसूरत आवाज से लाखों दिलों को जीता है। मौत का मंजर देखने के बाद ऐसा गाना लिखा कि सर्वश्रेष्ठ गीत का अवार्ड मिला। पढ़ें गुरदास मान की जिंदगी से जुड़े 3 किस्से और 7 अनकही बातें, जिन्हें शायद कोई जानता हो।
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गुरदास मान
इस मशहूर गायक का जन्म 4 जनवरी 1957 को पंजाब के गिद्दड़बाहा में हुआ। उनकी मां का नाम बीबी तेज कौर और पिता का नाम सरदार गुरुदेव सिंह मान था। उनकी पत्नी का नाम मनजीत कौर और बेटा गुरिक हैं। मलोट में शिक्षा शुरू हुई और फिर बाद में पटियाला आ गए। पटियाला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से डिग्री ली। कई एथलेटिक प्रतिस्पर्धाओं में और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप स्तर तक पदक जीते।
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गुरदास मान
सितंबर 2010 में ब्रिटेन के वोल्वरहैम्टन विश्विद्यालय ने गुरदास मान को विश्व संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। उनके साथ सर पॉल, मॅक्कार्टनी, बिल कॉस्बी और बॉब डिलन को भी इस सम्मान से नवाजा गया। 14 दिसंबर 2012 को उनको पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के 36वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने डॉक्टर ऑफ लिट्रेचर की मानद उपाधि से सम्मानित किया।
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गुरदास मान
1980 में अपने गाने 'दिल दा मामला है' के साथ गुरदास मान को दुनिया भर में शोहरत मिली। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 9 जनवरी 2001 को रोपड़ के पास एक भयानक हादसे में मान बाल-बाल बचे, लेकिन हादसे में इनके ड्राइवर तेजपाल की मौत हो गई। वे उसे अपना अच्छा दोस्त भी मानते थे, उसे समर्पित करते हुए उन्होंने एक गाना भी लिखा व गाया। ये गाना था 'बैठी साडे नाल सवारी उतर गयी...'।
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Gurdas Mann
- फोटो : File Photo
गुरदास मान मार्शल आर्ट एक्पर्ट भी हैं। उन्होंने जूडो में ब्लैक बेल्ट भी जीती है। गुरदास मान को बतौर बेस्ट प्लेबैक सिंगर नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिल चुका है। 1980 और 1990 में अपने गानों और उसके बाद अपनी फिल्मों के माध्यम से पंजाब में पुलिस अत्याचार को उजागर करने वाले गुरदास मान पहले कलाकार थे। कॉलेज के दिनों में मान ने विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित युवक मेलों में हिस्सा लिया और कई पुरस्कार जीते।
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