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‘तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं, हट जाओ', कह दुश्मनों से भिड़ गए थे विक्रम बत्रा, पढ़ें शहीद की शौर्य गाथा

Sun, 07 Jul 2019 05:59 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 07 Jul 2019 05:59 PM IST
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Indian Army, Kargil War, Story of Kargil War Hero Captain Vikram Batra
परमवीर विक्रम बत्रा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे हो चुके हैं। अदम्य साहस और वीरता की जो कहानियां इस युद्ध से निकलकर आईं वो आज भी हमारी रगों में जोश भर देती हैं। आज ही के दिन यानि 07 जुलाई 1999 को भारत मां का एक सपूत देश पर न्यौछावर हुआ था। लेकिन उनकी वीरता के किस्से देश के हर नागरिक की जुबां पर हैं। हम बात कर रहे हैं कैप्टन विक्रम बत्रा की। युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा घायल अफसर से बोले- ‘तुम हट जाओ, तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं’ और जाकर दुश्मनों से भिड़ गए। शहादत भी प्राप्त की। पढ़िए इस परमवीर की शहादत की गौरव गाथा...

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कैप्टन विक्रम बत्रा - फोटो : फाइल

कारगिल युद्ध में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु को जीतने में अहम भूमिका निभाने वाले शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा अब भी अपने साथियों के दिलों में जिंदा हैं। चंडीगढ़ का डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 हो या फिर पंजाब यूनिवर्सिटी का एमए अंग्रेजी विभाग या फिर सेक्टर-17 का एक सैलून। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा यहां के हीरो हैं। एक बार शहीद के पिता गिरधारी लाल बत्रा ने खुद बेटे की वीरगाथा सुनाई थी।

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परमवीर विक्रम बत्रा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

गिरधारी लाल बत्रा ने बताया था कि विक्रम डीएवी कॉलेज में चार साल पढ़े, उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। सीडीएस की तैयारी भी यहीं की और एमए अंग्रेजी में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ से शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के दोस्त अब भी उन्हें फोन करते हैं। हिमाचल प्रदेश पालमपुर के घुग्गर गांव में 9 सितंबर 1974 को विक्रम बत्रा का जन्म हुआ था।

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कैप्टन विक्रम बत्रा (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल

विक्रम ने स्नातक के बाद सेना में जाने का पूरा मन बना लिया और सीडीएस (सम्मिलित रक्षा सेवा) की भी तैयारी शुरू की। विक्रम को ग्रेजुएशन के बाद हांगकांग में भारी वेतन में मर्चेन्ट नेवी में भी नौकरी मिल रही थी लेकिन सेना में जाने के जज्बे वाले विक्रम ने इस नौकरी को ठुकरा दिया। विक्रम को 1997 को जम्मू के सोपोर में सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली। 1999 में कारगिल की जंग में विक्रम को भी बुलाया गया।

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कैप्टन विक्रम बत्रा (फाइल फोटो) - फोटो : ADGPI- Indian Army

इस दौरान विक्रम के अदम्य साहस के कारण उन्हे प्रमोशन भी मिला और वे कैप्टन बना दिए गए। श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने का जिम्मा भी कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया था। बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को इस पोस्ट पर विजय हासिल की। इसके बाद सेना ने प्वाइंट 4875 पर कब्जा करने की कवायद शुरू की थी। फिर इसका भी जिम्मा कैप्टन विक्रम बत्रा को ही दिया गया था।

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