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जज्बे की तस्वीरें: मातृ दिवस पर मां ने शहीद बेटे को दिया कंधा, बिलखते देख हर आंख हो गई नम

Sun, 09 May 2021 08:14 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 09 May 2021 08:14 PM IST
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Last rites of army jawan performed with military honours in Gurdaspur
शहीद बेटे को मां ने दिया कंधा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

21 पंजाब रेजिमेंट के तीन सपूत बरनाला के गांव कर्मगढ़ के सिपाही अमरदीप सिंह, मानसा के गांव हाकम वाला के सिपाही प्रभजोत सिंह और कस्बा कलानौर के गांव दबुर्जी के 24 वर्षीय सिपाही प्रगट सिंह 25 अप्रैल को सियाचिन में बर्फीले तूफान की चपेट में आ गए थे। अमरदीप सिंह और प्रभजोत सिंह तूफान की चपेट में आने से शहीद हो गए थे, जबकि सिपाही प्रगट सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ स्थित सेना के कमांड अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। दो दिन पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और शनिवार को वह शहीद हो गए। रविवार को मातृ दिवस के दिन सिपाही प्रगट सिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा तो मां सुखविंदर कौर, बहन किरणदीप व अमनदीप की करुणामयी सिसकियां देख सभी की आंखें नम हो गईं। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

Last rites of army jawan performed with military honours in Gurdaspur
शहीद प्रगट सिंह का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

शहीद की मां सुखविंदर कौर ने शहीद व अविवाहित इकलौते बेटे प्रगट सिंह के सिर पर सेहरा सजाया और अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक पहुंचाया। बिलखते हुए मां ने कहा कि उनका बेटा तीन साल पहले 21 पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुआ था।

Last rites of army jawan performed with military honours in Gurdaspur
शहीद को सेहरा बांधते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पिछले साल नवंबर में छोटी बहन की शादी पर एक माह की छुट्टी लेकर घर आया था और शादी के दूसरे दिन ही ड्यूटी पर लौट गया था। पिछले पांच माह से वह सियाचिन की ऊंची पोस्ट पर ड्यूटी दे रहा था। 29 अप्रैल को निचली पोस्ट पर लौटना था। मगर 25 अप्रैल को यह अनहोनी हो गई।

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Last rites of army jawan performed with military honours in Gurdaspur
शहीद बेटे को मां ने दिया कंधा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

शस्त्र उल्टे कर शहीद को दी सलामी
तिब्बड़ी कैंट से आए 20 डोगरा रेजिमेंट के जवानों ने शस्त्र उल्टे कर, बिगुल की मातमी धुन के साथ हवा में गोलियां दागते हुए शहीद को सलामी दी। पिता प्रीतम सिंह ने शहीद बेटे की चिता को मुखाग्नि दी।  कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि शहीदों का मोल कभी नहीं चुकाया जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की तरफ से शहीद परिवार को 50 लाख रुपये की एक्सग्रेशिया ग्रांट व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की।

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सियाचिन - फोटो : पीटीआई

शहीद की यूनिट की ओर से सूबेदार पुष्पेंद्र सिंह, 20 डोगरा यूनिट के नायब सूबेदार दविंदर सिंह के अलावा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व गवर्नर वीपी सिंह बदनौर की ओर से कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा व जिला प्रशासन की ओर से जिलाधीश मोहम्मद इश्फाक, एसडीएम अर्शदीप सिंह लुबाणा, तहसीलदार नवदीप सिंह व शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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