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तस्वीरें: मलबे में दबे युवक का आखिरी फोन, पढ़कर आप भी रो पड़ेंगे, लगाई थी ये गुहार
गगन सूरी, संवाद न्यूज एजेंसी, खरड़/ मोहाली (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 09 Feb 2020 12:03 AM IST
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राहत एवं बचाव कार्य जारी।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के मोहाली में एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां के खरड़-लांडरां रोड पर एक तीन मंजिला इमारत जमीदोंज हो गई। हादसे में एक लोग की मौत की खबर तो वहीं कई जिंदगियां पिछले नौ घंटों से फंसी हुई हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ एनडीआरएफ की टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई है। आइए जानते हैं पूरा मामला...
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‘बिल्डिंग गिर गई है। मैं मलबे में दबा हूं। दम घुट रहा है। सांस नहीं ले पा रहा हूं। मुझे निकलवा दो। भगवान के लिए कुछ करो।’ मलबे में दबे हरबिंदर की यह पुकार मोबाइल पर परिजनों ने सुनी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह भागे भागे मोरिंडा से खरड़ पहुंचे। तो आंखों के आगे गड्ढ़े में जमींदोज इमारत थी और मलबे में दबा था हरबिंदर सिंह। हरबिंदर सिंह उसी जेसीबी का चालक था, जिससे बेसमेंट की खुदाई हो रही थी।
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परिजनों के अनुसार हरबिंदर ने उन्हें फोन कर हादसे की जानकारी दी और बचाने की गुहार लगाई। एनडीआरएफ की टीम ने हरबिंदर को बचाने की कोशिश तो बहुत की लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। रात साढ़े नौ बजे उसका शव ही बाहर निकला। परिजनों ने बताया कि हरबिंदर दो महीने पहले ही विदेश से लौटा था। यहां आकर उसने जेसीबी का काम शुरू किया था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह जेसीबी ही उसकी मौत का कारण बन जाएगी।
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मलबे में दबकर जेसीबी चालक हरबिंदर तो मौत के पंजे से नहीं बच पाया लेकिन कर्मचारी हरजीत आठ घंटे बाद भी सकुशल बचा लिया गया। मोबाइल फोन और स्नीफर डॉग उसके लिए मसीहा बन गए। असल में हादसा होने की खबर सुनते ही हरजीत के परिजन मौके पर पहुंचे और बोले कि हरजीत मलबे में दबा है और लगातार उनसे मोबाइल के जरिए बात कर रहा है। एनडीआरएफ यह सुनते ही सक्रिय हो गई। तुरंत हरजीत से संपर्क साधा गया।
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हरजीत ने बताया कि वह ठीक है। प्यास बहुत लगी है। एनडीआरएफ ने उसका हौसला बढ़ाया और कहा कि वह उसे जल्द निकाल लेंगे। हिम्मत रखो। इसके बाद वहां स्नीफर डॉग बुलाए गए। डॉग्स ने कुछ देर की मशक्कत के बाद हरजीत की लोकेशन बता दी। वहां जाकर टीम ने देखा तो हरजीत की आवाज अंदर से आ रही थी।
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