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भारतीय क्रिकेट की नई 'क्रांति': शेफाली-जेमिमा और ऋचा से चरणी और अमनजोत तक, ये युवा हैं महिला क्रिकेट का भविष्य
Mon, 03 Nov 2025 10:44 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 03 Nov 2025 10:44 AM IST
सार
शेफाली की निडरता, जेमिमा की शालीनता, ऋचा की ताकत, अमनजोत की स्थिरता, चरणी की लगन और क्रांति की कहानी, ये सब मिलकर भारतीय क्रिकेट की नई 'क्रांति' का प्रतीक हैं।
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भारतीय टीम विश्व चैंपियन बनी
- फोटो : Twitter
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भारतीय महिला क्रिकेट आज एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। विश्व कप जीत के साथ भारत की बेटियों ने न केवल इतिहास रचा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई राह भी बना दी। इस सफलता की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इस टीम में अनुभव के साथ-साथ नई ऊर्जा, साहस और निडरता का अद्भुत संगम है। शेफाली वर्मा, जेमिमा रॉड्रिग्स, ऋचा घोष, श्री चरणी, अमनजोत कौर और क्रांति गौड़, ये वो नाम हैं जिन्होंने अपने संघर्ष, प्रतिभा और जुनून से महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
शेफाली वर्मा
- फोटो : BCCI Women
शेफाली वर्मा: हरियाणा की बिंदास लड़की, जो कभी नहीं डरती
21 साल की शेफाली वर्मा आज भारतीय क्रिकेट की पहचान बन चुकी हैं। हरियाणा के रोहतक की रहने वाली शेफाली का बचपन उस माहौल में बीता, जहां लड़कियों का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था। लेकिन उनके पिता संजीव वर्मा ने बेटी की आंखों में चमक देखी और उसे बेटों जैसा हर मौका दिया। मोहल्ले के लड़कों के बीच खेलते हुए शेफाली ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींचा। सिर्फ 15 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने वाली शेफाली आज विश्व कप की प्लेयर ऑफ द फाइनल हैं। उन्होंने दिखा दिया कि अगर जुनून सच्चा हो तो सपने पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता।
21 साल की शेफाली वर्मा आज भारतीय क्रिकेट की पहचान बन चुकी हैं। हरियाणा के रोहतक की रहने वाली शेफाली का बचपन उस माहौल में बीता, जहां लड़कियों का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था। लेकिन उनके पिता संजीव वर्मा ने बेटी की आंखों में चमक देखी और उसे बेटों जैसा हर मौका दिया। मोहल्ले के लड़कों के बीच खेलते हुए शेफाली ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींचा। सिर्फ 15 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने वाली शेफाली आज विश्व कप की प्लेयर ऑफ द फाइनल हैं। उन्होंने दिखा दिया कि अगर जुनून सच्चा हो तो सपने पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता।
जेमिमा रॉड्रिग्स
- फोटो : PTI
जेमिमा रॉड्रिग्स: मुस्कुराती मुंबई की जादूगरनी
मुंबई की जेमिमा रॉड्रिग्स क्रिकेट और संगीत दोनों में माहिर हैं। बचपन से ही गिटार बजाने और गीत लिखने वाली जेमिमा मैदान पर अपने क्लास और टाइमिंग के लिए जानी जाती हैं। 2025 विश्व कप में उन्होंने अपने बल्ले से भारत को कई मुश्किल स्थितियों से निकाला। जेमिमा का सफर आसान नहीं था। 2022 के खराब फॉर्म के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने वापसी के लिए खुद को नए सिरे से तैयार किया, और आज वही फिनिशर बन गईं जिसने भारत को पहली बार विश्व चैंपियन बनाया।
मुंबई की जेमिमा रॉड्रिग्स क्रिकेट और संगीत दोनों में माहिर हैं। बचपन से ही गिटार बजाने और गीत लिखने वाली जेमिमा मैदान पर अपने क्लास और टाइमिंग के लिए जानी जाती हैं। 2025 विश्व कप में उन्होंने अपने बल्ले से भारत को कई मुश्किल स्थितियों से निकाला। जेमिमा का सफर आसान नहीं था। 2022 के खराब फॉर्म के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने वापसी के लिए खुद को नए सिरे से तैयार किया, और आज वही फिनिशर बन गईं जिसने भारत को पहली बार विश्व चैंपियन बनाया।
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ऋचा घोष
- फोटो : BCCI Women-x
ऋचा घोष: सिलिगुड़ी की 'सिक्सर क्वीन'
सिर्फ 21 साल की ऋचा घोष ने दिखाया कि महिला क्रिकेट में पावर हिटिंग का मतलब क्या होता है। बंगाल के छोटे से शहर सिलिगुड़ी से आने वाली ऋचा ने बचपन में अपने पिता की कोचिंग में क्रिकेट सीखा। उनका सपना था कि लोग महिला क्रिकेट में भी 'सिक्सर क्वीन' की बात करें और आज वो वही बन चुकी हैं। विश्व कप के फाइनल में ऋचा ने डेथ ओवर्स में जो निडर बल्लेबाजी की, उसने भारत को जीत की राह पर ला दिया। ऋचा ने खिताबी मुकाबले में 24 गेंदों पर तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 34 रन बनाकर आउट हुईं। ऋचा ने महत्वपूर्ण रन बनाए और इस दौरान उपलब्धि अपने नाम दर्ज करने में भी सफल रहीं। ऋचा महिला विश्व कप के एक संस्करण में सर्वाधिक छक्के लगाने वाली भारतीय बल्लेबाज बन गई हैं।
सिर्फ 21 साल की ऋचा घोष ने दिखाया कि महिला क्रिकेट में पावर हिटिंग का मतलब क्या होता है। बंगाल के छोटे से शहर सिलिगुड़ी से आने वाली ऋचा ने बचपन में अपने पिता की कोचिंग में क्रिकेट सीखा। उनका सपना था कि लोग महिला क्रिकेट में भी 'सिक्सर क्वीन' की बात करें और आज वो वही बन चुकी हैं। विश्व कप के फाइनल में ऋचा ने डेथ ओवर्स में जो निडर बल्लेबाजी की, उसने भारत को जीत की राह पर ला दिया। ऋचा ने खिताबी मुकाबले में 24 गेंदों पर तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 34 रन बनाकर आउट हुईं। ऋचा ने महत्वपूर्ण रन बनाए और इस दौरान उपलब्धि अपने नाम दर्ज करने में भी सफल रहीं। ऋचा महिला विश्व कप के एक संस्करण में सर्वाधिक छक्के लगाने वाली भारतीय बल्लेबाज बन गई हैं।
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अमनजोत कौर
- फोटो : BCCI Women
अमनजोत कौर: नई उम्मीद की चमक
पंजाब की अमनजोत कौर को शुरुआत में खेल छोड़ने की सलाह दी गई थी, क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। लेकिन अमनजोत ने अपनी मां के सपनों को ताकत बनाया। उनकी शांत बल्लेबाजी और टीम के प्रति समर्पण ने भारत को संतुलन दिया।
पंजाब की अमनजोत कौर को शुरुआत में खेल छोड़ने की सलाह दी गई थी, क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। लेकिन अमनजोत ने अपनी मां के सपनों को ताकत बनाया। उनकी शांत बल्लेबाजी और टीम के प्रति समर्पण ने भारत को संतुलन दिया।