वैज्ञानिकों ने खतरनाक खुलासा किया है कि भारत के इस भाग में प्रलय आ मचा सकती है। वैज्ञानिकों के इस खुलासे से हड़कंप मच गया है।
{"_id":"59dc3ee74f1c1b79548b68ab","slug":"flood-may-hit-again-uttarakhand","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"वैज्ञानिकों का खुलासा: ध्यान नहीं दिया तो भारत में यहां आएगी 'प्रलय'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैज्ञानिकों का खुलासा: ध्यान नहीं दिया तो भारत में यहां आएगी 'प्रलय'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 Oct 2017 08:24 AM IST
विज्ञापन
most horrible photos of kedarnath disaster
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदारनाथ आपदा
- फोटो : amar ujala
केदारनाथ धाम को लेकर भूवैज्ञानिकों ने खुलासा किया है। धाम में अभी जो काम चल रहा है अगर वह ऐसे ही चलता रहा तो जल्द ही फिर से साल 2013 जैसी महाप्रलय आ सकती है। केदारनाथ क्षेत्र में किए जा रहे अंधाधुंध निर्माण कार्य पर एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के भूविज्ञानी प्रो. एमपीएस बिष्ट ने गाद के ऊपर और एवलांच शूट के मुहाने पर किए जा रहे निर्माण कार्यों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चेताया कि केदारनाथ में निर्माण कार्य करवाकर महा विनाश को दोबारा न्यौता दिया जा रहा है।
avalanche
- फोटो : FILE PHOTO
प्रो. बिष्ट ने कहा कि वर्ष 2013 के महाविनाश से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। केदारपुरी हो या गौरीकुंड-पैदल मार्ग सभी जगह अवैज्ञानिक ढंग से ग्लेशियर द्वारा लाए गए हिमोढ़ या गाद (मोरेन) के ऊपर और एवलांच शूट (ग्लेशियरों के तीव्रता से बहने वाला मार्ग) के मुहाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। यह विस्फोटक स्थिति है और आपदा को दोबारा आमंत्रित करने जैसा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाबा केदारनाथ
- फोटो : AmarUjala
प्रो. बिष्ट ने दो दिन पूर्व केदारनाथ का भ्रमण किया। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अमर उजाला को बताया कि केदारपुरी दोनों तरफ पहाड़ियों से ग्लेशियर द्वारा लाए गए मोरेन पर बसी है। केदारनाथ से रामबाड़ा तक की प्रकृति समान है। मोरेन मिट्टी और कंकड़ का मिश्रण होता है। इनके बीच तगड़ा जुड़ाव नहीं होता है। जब इसमें पानी का रिसाव होता है तो यह लूज मैटरियल बह जाता है। इसका नतीजा भूस्खलन के रूप में सामने आता है।
विज्ञापन
president of india kedarnath visit postponed
प्रो. बिष्ट ने बताया कि मोरेन के ऊपर और एवलांच के मुहाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। यानी कि दोहरा खतरा है। पहले केदारनाथ क्षेत्र में सीधे हिमपात ही होता था। ग्लेशियर धीरे-धीरे गलते थे और इसका पानी नुकसान नहीं पहुंचाता था, लेकिन वातावरण में बढ़ते तापमान से अतिवृष्टि होने लगी है। इससे एवलांच शूट खतरनाक हो गए हैं। बारिश का पानी एवलांच शूट के जरिए तीव्रता से हिमोढ़ में आएगा और सब कुछ बहा ले जाएगा।