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उत्तराखंड: शहीद दिनेश की मां-पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल, पिता के भी नहीं थम रहे आंसू, पार्थिव शरीर का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, पिथौरागढ़
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 17 Aug 2022 08:35 PM IST
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शहीद दिनेश के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू के पहलगाम में मंगलवार को बस दुर्घटना में जान गंवाने वाले उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के भुरमुनी गांव के दिनेश सिंह बोहरा के घर पहुंचकर आईटीबीपी के अधिकारियों ने सांत्वना दी। दिनेश की मां गीता बोहरा और पत्नी बबीता बोहरा का रो-रोकर बुरा हाल है।
पिता पूरन सिंह भी बड़े बेटे की मौत से गहरे सदमे में हैं और तीन साल की पोती के साथ ही खुद को भी संभाल रहे हैं। लाड़ले का पार्थिव शरीर आने का इंतजार कर रहे परिजनों के लिए एक-एक पल भारी हो रहा है।
आईटीबीपी के इंस्पेक्टर धाम सिंह के नेतृत्व में बुधवार को आईटीबीपी के जवान दिनेश के घर पहुंचे। टीम को देखते ही मां गीता बिलख-बिलख कर रोने लगी तो पत्नी बबीता भी खुद को नहीं संभाल पाई।
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शहीद दिनेश सिंह बोहरा के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
उनके रोने से पूरा माहौल और अधिक गमगीन हो गया। आईटीबीपी की महिला जवानों ने दिनेश की मां और इंस्पेक्टर धाम सिंह ने पिता को सांत्वना दी। दो घंटे तक आईटीबीपी की टीम दिनेश के घर रही। बता दें कि आईटीबीपी की चौथी वाहिनी में तैनात जवान दिनेश सिंह बोहरा की मंगलवार को जम्मू के पहलगाम में बस दुर्घटना में मौत हो गई थी।
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शहीद दिनेश सिंह बोहरा के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों को देर रात में सूचना मिली तो घर में मातम छा गया। दिनेश की पत्नी बबीता अपनी तीन साल की बेटी के साथ पिथौरागढ़ शहर में किराए के कमरे में रहती हैं। परिजन रात में ही बबीता को गांव ले गए और उसे पति की मौत की जानकारी दी।
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शहीद दिनेश सिंह बोहरा के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
खबर सुनते ही बबीता बदहवास हो गई। पड़ोसियों और परिजनों ने उसे बमुश्किल संभाला। दिनेश वर्ष 2008 में आईटीबीपी में भर्ती हुए थे। उनके छोटा भाई राकेश बोहरा हल्द्वानी में नर्सिंग अधिकारी हैं। दिनेश सिंह दो महीने पहले ही घर आए थे। उनकी तीन साल की बेटी को दो महीने पहले ही पिथौरागढ़ शहर के एक स्कूल में प्रवेश दिलाया है।
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शहीद दिनेश सिंह बोहरा
- फोटो : अमर उजाला
दिनेश सिंह की शहादत की खबर मिलने के बाद भुरमुनी गांव में आज बुधवार को होने वाला घी त्यार (त्योहार) महोत्सव स्थगित कर दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता ललित धानिक ने बताया कि महोत्सव की तैयारियां चल रही थीं, सभी ग्रामीण इसमें जुटे हुए थे। लेकिन दुखद समाचार मिलने के बाद हर कोई गम में डूब गया। उन्होंने बताया कि इस बार गांव में हिलजात्रा का आयोजन भी नहीं किया जाएगा।
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