ब्लू व्हेल गेम बच्चों की जान ले रहा है, ऐसे में अभिभावकों और स्कूलों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है। इस जानलेवा गेम की तरफ खिंचे चले जाने की वजह जिज्ञासा है। अभिभावकों और स्कूलों को उनकी इस जिज्ञासा को प्यार से समझाकर शांत करना है, डांट की कतई जरूरत नहीं। एक वजह चुनौती भी है, महज चुनौती लेना पसंद होने की वजह से भी बच्चे इस गेम की ओर खिंचे चले जा रहे हैं। जो खतरे की घंटी है। मनोचिकित्सक डा. संजीव त्यागी ने बताया कि बच्चों में अकेलापन, आईडेंटिटी क्राइसिस, खुद को कमतर समझना भी इस गेम को खेलने की वजह हैं। पढ़ाई में कमजोर, माता-पिता से कम बात करने, कम घुलने-मिलने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ब्लू व्हेल गेम खेल रहे बच्चे में इसके लक्षण उनकी मौत के एक महीने पहले से सामने आने लगते थे, अभिभावकों को इन लक्षणों की जानकारी होना जरूरी है। बच्चा अकेला रहने के साथ ही रात में जागे, दिन भर बेचैन रहे, रात में भी इंटरनेट का इस्तेमाल करे, शरीर पर कटे का निशान मिले तो अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए।
इन बातों का रखेंगे ध्यान तो आपका बच्चा नहीं होगा ब्लू व्हेल गेम का शिकार
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कराई जा रही है कांउसलिंग : ब्लू व्हेल गेम के मद्देनजर बच्चों की वन-टू-वन काउंसलिंग की गई है। अभिभावकों को भी एसएमएस भेजे गए हैं। असेंबली में भी ब्लू व्हेल गेम के खतरों से आगाह करते रहते हैं। - सचिन वत्स, निदेशक गुरुकुल स्कूल,
रेड कार्ड कर रहे जारी: बच्चों को ब्लू व्हेल गेम की बात करना सख्त मना है। अभिभावकों को सर्कुलर भेजा गया है। काउंसलिंग के बाद भी गेम की बात करने पर येलो और रेड कार्ड जारी किया जा रहा है। -ज्योति गुप्ता, डीपीएसजी मेरठ रोड
रात में 12 बजे के बाद शुरू होता है गेम: ब्लू व्हेल गेम रात में एक बजे से तीन बजे तक चलता है। इसके टारगेट पूरे करने होते हैं। इसलिए देर रात तक बच्चे अगर पढ़ाई के नाम पर इंटरनेट यूज करना चाहें तो अभिभावक उसको चेक करते रहें।
ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह तोड़ना मुश्किल: ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह इतना जटिल है कि बच्चों का इससे निकलना बहुत मुश्किल होता है। बच्चा गुमसुम होकर चुपचाप इस व्यूह में फंसकर इसका शिकार हो जाता है। 50 दिन के इस खेल क ा अंतिम टास्क ऊंची छत से छलांग लगाना है। प्रतिदिन क्यूरेटर से मिलने वाले हर टास्क को पूरा करना और उसकी फोटो व वीडियो अपलोड करनी होती है। वीडियो, फोटो अपलोड करते ही आप व्हेल बनते जाते हैं, अतिरिक्त मार्क्स मिलते हैं।
इन बातों पर दें ध्यान
1. ब्लू व्हेल गेम के बारे में बच्चे पूछें तो उसे पूरी जानकारी दें
2. इस गेम से बच्चों को होने वाले नुकसान की बात बताएं
3. बच्चे की इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखें
4. बच्चा अकेला रहे तो उस पर ध्यान दें।
5. बच्चे के व्यवहार और रूटीन में फर्क होने पर सावधान हो जाएं।
6. बच्चा अगर रात में जगता रहे और दिन भर बेचैन रहे
गेम की इन बातों पर रखें खास ध्यान: बच्चे का सारा दिन हॉरर मूवी देखना। सुबह 4:20 बजे पर उठकर मोबाइल पर डरावने वीडियो देखना। हाथ में रेजर से तीन कट लगाकर, उसकी तस्वीर शेयर करना। प्लेन पेपर पर व्हेल की आकृति बनाकर फोटो खींचना। ब्लू व्हेल बनने क ो तैयार होने पर पैर पर यस लिखना या खुद को सजा देने के लिए शरीर में कई जगहों पर कट लगाकर फोटो भेजना। इंदिरापुरम स्थित जेकेजी इंटरनेशनल स्कूल की टीचर नीलम त्यागी ने बताया कि ब्लू व्हेल गेम को लेकर अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर काउंसलिंग की जा रही है। अभिभावकों को बताया जा रहा है कि अगर बच्चे के व्यवहार में बदलाव आता है तो इसकी जानकारी स्कूल को दें।
वहीं स्कूल में लगने वाली एक्स्ट्रा क्लास में बच्चों को मोबाइल से दूर रहने के बारे में समय समय पर समझाया जाता है। इंदिरापुरम स्थित सेंट टेरेसा स्कूल की प्रधानाचार्य रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चे मोबाइल में कौन सा गेम खेल रहे हैं, इस पर अभिभावकों से नजर रखने को कहा गया है। इधर कई अभिभावकों ने बच्चों के मोबाइल पर अधिक गेम खेलने की शिकायत की है। ऐसे बच्चों को काउंसलिंग और सख्ती के साथ इसके नुकसान बताकर जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। ब्लू व्हेल गेम को लेकर बच्चों को अभिभावकों के साथ बैठाकर काउंसलिंग कराने का विचार किया जा रहा है।