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Operation Safed Sagar: कारगिल में वायुसेना ने दागा पहला लेजर गाइडेड बम, फिर हार से घबराए नवाज पहुंचे अमेरिका

Tue, 26 Jul 2022 03:51 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 26 Jul 2022 03:51 PM IST
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Kargil Vijay Diwas 2022 Indian Air Force Fights in Kargil War Know About Operation Safed Sagar in Hindi
Operation Safed Sagar - फोटो : अमर उजाला

कारगिल युद्ध को बीते 23 साल हो गए। युद्ध के दौरान भारतीय सेना द्वारा दिखाए गए शौर्य और पराक्रम की गाथाएं आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा हैं। 24 जून 1999 को ऑपरेशन सफेद सागर के तहत टाइगर हिल पर भारतीय वायुसेना ने पहली बार लेजर गाइडेड बमों से हमला किया था। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमा में घुसकर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चोटियों पर अवैध कब्जा कर लिया। युद्ध में भारतीय सेना ने अदम्य साहस और शौर्य का प्रदर्शन किया। जिसमें थलसेना के साथ वायुसेना भी कदम से कदम मिलाकर चली और नापाक मंसूबों को ध्वस्त कर दिया।



टाइगर हिल समुद्र तल से 5062 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। वायुसेना द्वारा किए गए हवाई हमले की निगरानी तत्कालीन वायुसेना प्रमुख अनिल यशवंत टिपनिस ने खुद एक विमान में बैठकर की थी। इस हमले में मिराज 2000 विमानों का प्रयोग कर दुश्मन के ठिकानों पर लेजर गाइडेड बम गिराए गए। 

Kargil Vijay Diwas 2022 Indian Air Force Fights in Kargil War Know About Operation Safed Sagar in Hindi
Kargil war - फोटो : अमर उजाला

अचानक हुए हवाई हमले में पाकिस्तान के कई घुसपैठिए मारे गए। इस हमले के कारण ही 4 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर भारत का कब्जा हो सका। आपको बता दें कि बालाकोट स्ट्राइक के दौरान भारतीय वायुसेना ने मिराज 2000 विमानों का ही उपयोग किया था। एयफोर्स के इतिहास में यह पहला मौका था जब युद्ध के दौरान लेजर गाइडेड बमों का उपयोग किया गया। इस बमों को इजरायल से खरीदा गया था। जिसे विमानों में फिट करने के लिए उनके इंजीनियरों की एक टीम भी भारत आई हुई थी।

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कारगिल युद्ध जीतने के बाद भारतीय सेना - फोटो : twitter

कारगिल युद्ध में हार और जीत को तय करने वाले सबसे अहम पड़ाव 'टाइगर हिल' सेना और वायुसेना के अदम्य साहस और शौर्य की अनूठी मिसाल बनी। ऊंचाई पर बंकर बनाकर बैठे दुश्मन तक पहुंचने के लिए रस्सी से चढ़ना था। 18 ग्रेनेडियर की घातक टीम को इसका जिम्मा मिला। योगेंद्र सिंह यादव ने स्वैच्छिक रूप से प्लाटून को चोटी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली। चोटी पर रस्सी फंसाने के बाद वह अपनी टीम के साथ चढ़ाई कर रहे थे तो दुश्मन ने गोलियों की बौछार कर तीन साथियों को शहीद कर दिया। 

 

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kargil war - फोटो : अमर उजाला

बुरी तरह से घायल योगेंद्र ने चढ़ाई जारी रखी। करीब चार बजे ऊपर पहुंचते ही घायल योगेंद्र क्रॉलिंग से दुश्मन के बंकर तक पहुंचे और ग्रेनेड से चार दुश्मन ढेर कर दिए। घायल योगेंद्र को सुरक्षित निकालने को कहा गया लेकिन वे नहीं माने।


 
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कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

खून से लथपथ योगेंद्र ने दूसरा बंकर उड़ाकर दुश्मन की फायरिंग को पूरी तरह से शांत कर दिया। घातक प्लाटून के असाधारण शौर्य प्रदर्शन से टाइगर हिल पर फतह मिल गई। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया।


 
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