{"_id":"62fcf3f7d7eca609580ea531","slug":"quarter-of-pregnant-women-taking-blood-thinners-are-critical-aiims-study-reveals","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Health: खून पतला करने की दवा ले रहीं एक चौथाई गर्भवती महिलाएं गंभीर, एम्स में हुआ अध्ययन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Health: खून पतला करने की दवा ले रहीं एक चौथाई गर्भवती महिलाएं गंभीर, एम्स में हुआ अध्ययन
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Thu, 18 Aug 2022 04:18 AM IST
सार
बीते पांच साल में एम्स में करीब 6,000 महिलाओं की डिलीवरी हुई है। इसमें से 183 गर्भवती महिलाओं को खून पतला करने की दवा दी जा रही थी। इनमें 46 महिलाओं की हालत बेहद गंभीर पाई गई, जिनमें से 42 मरीज हृदय रोग जबकि 4 मरीज लीवर की समस्या से परेशान थीं।
खून पतला करने की दवा ले रहीं करीब एक चौथाई गर्भवती महिलाओं की हालत गंभीर हो रही हैं। इन्हें डिलीवरी के बाद लंबे समय तक अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखना पड़ रहा है। यदि ऐसा नहीं करते, तो मरीज की मौत भी हो सकती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने बीते पांच साल में डिलीवरी करवाने आई महिलाओं पर हुए एक अध्ययन में इसका खुलासा किया है।
Trending Videos
2 of 6
एम्स, दिल्ली
- फोटो : अमर उजाला
अध्ययन के दौरान देखा गया कि बीते पांच साल में एम्स में करीब 6,000 महिलाओं की डिलीवरी हुई है। इसमें से 183 गर्भवती महिलाओं को खून पतला करने की दवा दी जा रही थी। इनमें 46 महिलाओं की हालत बेहद गंभीर पाई गई। इन 46 महिलाओं में से 42 मरीज हृदय रोग जबकि 4 मरीज लीवर की समस्या से परेशान थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 6
गर्भवती महिला
- फोटो : shutterstock
एम्स के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की वरिष्ठ डॉक्टर नीना मल्होत्रा ने बताया कि पिछले 5 साल में एम्स में डिलीवरी करवाने आईं जिन महिलाओं को खून पतला करने की दवा दी जा रही थी, उसमें 46 की हालत गंभीर मिली। इनमें से 91 फीसदी से अधिक को हृदय रोग की समस्या के कारण दवा दी जा रही थी। उन्होंने कहा कि हृदय रोग, लीवर की समस्या, नसें बंद होने व अन्य कारणों से महिलाओं को खून पतला करने की दवा देने की जरूरत पड़ती है। इन महिलाओं पर गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
4 of 6
दवाइयां
- फोटो : amar ujala
हार्ट के साथ गायनी विभाग में भी करें संपर्क
डॉ. नीना मल्होत्रा ने कहा कि अध्ययन के दौरान पाया गया कि महिलाओं के परिजन हार्ट का उपचार करवाने के दौरान गायनी विभाग से संपर्क नहीं करते, जबकि महिला को गर्भधारण करने से पहले गायनी विभाग में भी संपर्क करना चाहिए, जिससे समस्या आगे चलकर बड़ा रूप न ले। उन्होंने कहा कि गायनी के डॉक्टर महिलाओं की स्थिति देखकर उन्हें गर्भधारण करने का उचित समय व अन्य को लेकर सलाह दे सकते हैं जिससे समस्या बड़ी नहीं होगी। इसके अलावा माता-पिता व समाज को भी ऐसी लड़की या महिला पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
विज्ञापन
5 of 6
गर्भवती महिला
- फोटो : gjk
6 माह तक अस्पताल में रही भर्ती
डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि दवा ले रहीं 46 मरीजों में से एक मरीज को 6 माह तक अस्पताल में निगरानी में रखना पड़ा। वहीं एक मरीज 30-40 दिन तक आईसीयू में रहीं। जबकि ज्यादातर महिलाओं को 30 दिन डॉक्टर की निगरानी में रखना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं पर ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है। इन महिलाओं को अपने शरीर के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का भी भार झेलना होता है, जो काफी कष्टदायक होता है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।