दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आतंकी फंडिंग के मामले में दोषी करार यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यासीन मलिक का जन्म 3 अप्रैल 1963 को श्रीनगर के मैसूमा इलाके में हुआ था। यासीन मलिक 1988 में जेकेएलएफ से जुड़ा था। मलिक ने 2009 में पाकिस्तान की मुशाल हुसैन के साथ शादी की। यासीन मलिक की एक बेटी है। यासीन मलिक मकबूल भट्ट को अपना आदर्श मानता है। बता दें कि मकबूल भट्ट जेकेएलएफ का फाउंडर था। जिसे 1984 में फांसी पर चढ़ा दिया गया था।
Yasin Malik: कश्मीर के मैसूमा में जन्मा यासीन मकबूल भट्ट को मानता है आदर्श, पढ़ें- पाक'लव' से लेकर इसकी नापाक हरकत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1989 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी डॉ. रूबिया सईद का आतंकियों ने अपहरण कर लिया था। घटना कुछ इस प्रकार थी- रूबिया सईद ललद्यद हॉस्पिटल से ड्यूटी पूरी होने के बाद घर के लिए निकलती हैं। इस दौरान वह एक बस में सवार हो जाती हैं। आतंकी पहले से इस बस में सवार रहते हैं और मौके का फायदा उठाकर उनका अपहरण कर लेते हैं। रूबिया के बदले में अपने आतंकी साथियों की रिहाई की मांग रखते हैं।
इस समय तक देश की सियासत में रूबिया के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद का कद काफी ऊंचा हो चुका था। इसके साथ ही इस घटना ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। सड़क से लेकर संसद तक चर्चा थी तो बस एक नाम की...रूबिया सईद। इस अपहरण को लेकर कई तरह की बातें भी हुई थीं, कई तरह के दावे भी हुए थे। आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चरम पर था।
चंद घंटों के भीतर ही जेकेएलएफ ने इस अपहरण की जिम्मेदारी ले ली थी। साथ ही शर्त रखी थी उसके साथियों को रिहा करने की। इसके बाद शुरू होता है बातचीत का दौर। वीपी सिंह सरकार आखिर मान जाती है और उनके पांच साथियों को रूबिया सईद के बदले रिहा कर दिया जाता है। अपहरण के पांच दिन बाद 13 दिसंबर को रूबिया को छोड़ दिया जाता है और स्पेशल फ्लाइट से उन्हें दिल्ली लाया जाता है। इन सबके बीच मुफ्ती सईद का बयान आता है जिसमें वह कहते हैं कि एक पिता के रूप में मैं बहुत खुश हूं लेकिन एक नेता के रूप में यहीं कहना चाहूंगा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था।
चूंकि इस अपहरण की जिम्मेदारी जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट द्वारा ली गई थी। इसी कारण यासीन मलिक को इसमें आरोपी बनाया गया है। अपहरण कांड का यह मामला सदर पुलिस स्टेशन श्रीनगर में दर्ज हुआ था। राज्य सरकार की सिफारिश पर 22 फरवरी, 1990 को सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। 18 सितंबर, 1990 को सीबीआई ने चार्जशीट दायर की थी।

कमेंट
कमेंट X