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कभी मांगते थे भीख, आज चला रहे हैं 40 करोड़ की कंपनी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 21 Aug 2016 11:29 AM IST
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एक समय था जब उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं होते थे। वो घर-घर जाकर लोगों से भीख मांगता था। आज यही भिखारी 40 करोड़ की कंपनी का मालिक है और 150 एंप्लाई उसकी कंपनी में काम करते हैं। हम बात कर रहे हैं मेहनत से अपनी किस्मत बदलने वाले रेणुका आराध्य की। 50 साल के रेणुका बेंगलुरु के पास गोपसांद्रा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता एक मंदिर में पुजारी थे। उन्हें सिर्फ 1.50 रुपए महीने के हिसाब से मिलते थे।
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रेणुका कक्षा 9 तक ही पढ़े हैं। वो 10वीं क्लास में फेल हो गए थे। पूजा के बाद रेणुका और पिता घर-घर जाकर लोगों से चावल, आटा और दाल मांगते थे। इसी से उनके घर का गुजारा होता था। पढ़ाई छूट जाने के बाद पिता ने उन्हें दूसरे के घरों में घरेलू कामकाज के लिए लगवा दिया। रेणुका तब से घरों में जाकर झाड़ू-पोछा और बर्तन धुलने का काम करने लगे।
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इसी बीच उनके पिता का देहांत हो गया। सारे घर की जिम्मेदारी रेणुका के ऊपर आ गई। पैसे कामने के लिए उन्होंने ऐडलैब्स में स्वीपर का काम भी किया। साथ ही अलग-अलग जगहों पर मजदूरी भी की। जब वे 18 साल के हुए तो उन्होंने शराब पीना और जुआं खेलना शुरू कर दिया। इससे घर की दशा और खराब हो गई। जब सबकुछ खत्म हो गया तो जैसे-तैसे वे इन सब से बाहर निकले।
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20 साल की उम्र में रेणुका ने शादी कर ली। रेणुका का मानना था कि शादी उन्हें जिम्मेदार बना देगी। इस बीच वे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी और मजदूरी करते रहे। उनकी पत्नी भी किसी फर्म में हेल्पर का काम करती थीं जो बाद में दर्जी बन गईं। रेणुका पर जिम्मेदारी बढ़ रही थी। इसके चलते उन्होंने लैथ मशीन पर काम शुरू किया। फिर प्लास्टिक फैक्टरी में काम किया।
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किसी तरह 30 हजार रुपए जोड़े और टीवी, फ्रिज के कवर्स बेचने का काम शुरू किया। लेकिन ये काम नहीं चला और सारा पैसा डूब गया। फिर से वे 600 रुपए महीने पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगे। साथ ही सिर्फ 15 रुपए के लिए नारियल के पेड़ पर चढ़कर उसकी देखभाल करते थे।
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