हिंदी सिनेमा एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी, हॉरर, रोमांटिक, थ्रीलर और बायोपिक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि समय-समय पर सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में भी दर्शकों के लिए पेश की गई हैं। जिसके जरिए देश के लोगों को जागरूक कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। सिनेमा का इतिहास है कि वह कभी समाज के संवेदनशील मुद्दों पर आधारित फिल्मों से दूर नहीं भागा है क्योंकि दर्शक इन फिल्मों की सबसे ज्यादा डिमांड करते हैं। ऐसे में आधुनिक हिंदी सिनेमा के नए दौर में बात करेंगे उन 5 फिल्मों की जिन्होंने समाज में बदलाव का नया संदेश छोड़ा...
समाज के असल मुद्दों पर आधारित हैं ये 5 बॉलीवुड फिल्में, एक-एक फिल्म देती है सुधरने का संदेश
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न्यूटन
इस कड़ी में सबसे पहले बात करेंगे नौजवान अभिनेता राजकुमार राव की। राजकुमार ने हिेदी सिनेमा में अपनी पहचान को खुद के अभिनय के दम पर स्थापित किया है। जब उन्हें फिल्म 'न्यूटन' में देखा गया तो फिल्म आलोचकों ने भी उनके अभिनय का लोहा माना। फिल्म न्यूटन की अगर बात करें तो ये समाज में बहुत ही प्रासंगिक संदेश छोड़ती है। मतदान देश का शुरुआती दौर से ही ज्वलंत मुद्दा रहा है। ऐसे में इस फिल्म में भी मतदान के दौरान होने वाली हेराफेरी को जड़ से मिटाने का काम किया गया।
टॉयलेट एक प्रेमकथा
शौचालय पर आधारित इस फिल्म में स्वच्छ भारत अभियान की झलक साफ देखने को मिलती है। फिल्म में दिखाया गया है कि महिलाएं खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं क्योंकि प्रशासन की मक्कारी के चलते गांव में शौचालय का निर्माण अधर में लटक जाता है। ऐसे में फिल्म के मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार पर जब इस कुरीति की मार पड़ती है तो वह गांव में शौचालय बनवाने के लिए नये-नये तरीके अपनाते हैं। फिल्म खुलेतौर पर महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी ये नसीहत देती हैं कि वह खुले शौच करने की कभी गलती ना करें।
सुई-धागा
शरत कटारिया निर्देशित फिल्म 'सुई-धागा' भी वर्तमान सरकार के 'मेक इन इडिया' अभियान को पेश करती नजर आती है। फिल्म के जरिए लोगों को में मेक इन इंडिया के संदेश को पहुंचाने की कोशिश की गई है। फिल्म में अभिनेता वरुण धवन पत्नी (अनुष्का शर्मा) संग एक छोटे से कस्बे में रहते हैं। बड़े सपने रखने वाली ये दंपति दिन-रात मेहनत कर खुद का बनाया हुआ उत्पाद बाजार में उतारती है। फिल्म की कहानी में मेड इन चाइना उत्पादों पर करारा तंज कसने की भी कोशिश की गई है।
पैडमैन
अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म पैडमैन बहुत ही संवेदनशील विषय पर आधारित फिल्म है। कैसे लड़कियां मासिक धर्म के दौरान तरह-तरह की परेशानियाों का सामना करती हैं फिल्म में इस पर रोशनी डाली गई है। फिल्म अरुणाचलम मुरुगुनांथम नामक व्यक्ति की असल कहानी पर आधारित है। फिल्म में अक्षय कुमार ने इस व्यक्ति का किरदार बखूबी निभाया है। गांव-कस्बे की लड़कियों और महिलाओं के लिए सेनेटरी नैपकिन को तैयार कर उन्हें इसके इस्तेमाल और फायदे से अवगत कराने की कोशिश की गई है। साथ ही इसके ना इस्तेमाल करने के अनेक नुकसान भी इस फिल्म में गिनवाए गए हैं। फिल्म का निर्देशन आर बाल्की ने किया था।