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53 की उम्र में इस अभिनेत्री ने लिया था शादी करने का फैसला, एक हादसे ने उजाड़ दी दुनिया

Wed, 25 Mar 2020 12:10 PM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: भावना शर्मा Updated Wed, 25 Mar 2020 12:10 PM IST
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actress nanda death anniversary know about her life journey
nanda - फोटो : social media

बॉलीवुड की मशहूर अदाकरा रहीं नंदा की आज पुण्यतिथि है । नंदा ने आज ही के दिनद 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। नंदा अपने दौर की बेहद खूबसूरत और लाजवाब अदाकारा थीं। जब बॉलीवुड में नंदा ने काम करना शुरू किया था तो उनकी छवि 'छोटी बहन' की बन गई थी। क्योंकि पांच साल की उम्र में उन्होंने हीरो की छोटी बहन के रोल करने शुरू कर दिए थे लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पहचान बदली और हीरोइन बनीं । नंदा ने फिल्म 'जब-जब फूल खिले', 'गुमनाम' और 'प्रेम रोग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया है। नंदा की फिल्मों में उनकी एंट्री की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है।

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nanda - फोटो : social media

साल 1944, वो पांच साल की थीं। एक दिन जब वो स्कूल से लौटीं तो उनके पिता ने कहा कि कल तैयार रहना। फिल्म के लिए तुम्हारी शूटिंग है। इसके लिए तुम्हारे बाल काटने होंगे। बता दें कि नंदा के पिता विनायक दामोदर कर्नाटकी मराठी फिल्मों के सफल अभिनेता और निर्देशक थे। बाल काटने की बात सुनकर नंदा नाराज हो गईं। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई शूटिंग नहीं करनी।' बड़ी मुश्किल से मां के समझाने पर वो शूटिंग पर जाने को राजी हुईं। वहां उनके बाल लड़कों की तरह छोटे-छोटे काट दिए गए। इस फिल्म का नाम था 'मंदिर'। 

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nanda - फोटो : social media
इसके निर्देशक नंदा के पिता दामोदर ही थे। फिल्म पूरी होती इससे पहले ही नंदा के पिता का निधन हो गया। घर की आर्थिक हालत बिगड़ने के चलते नंदा के छोटे कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ आ गया। मजबूरी में उन्होंने फिल्मों में अभिनय करने का फैसला लिया। चेहरे की सादगी और मासूमियत को उन्होंने अपने अभिनय की ताकत बनाई । वो रेडियो और स्टेज पर भी काम करने लगीं। नन्हे कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी उठाए हुए नंदा महज 10 साल की उम्र में ही हीरोइन बन गईं। लेकिन हिन्दी सिनेमा की नहीं बल्कि मराठी सिनेमा की।

 

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nanda - फोटो : social media

दिनकर पाटिल की निर्देशित फिल्म ‘कुलदेवता’ के लिये नंदा को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विशेष पुरस्कार से नवाजा था। नंदा ने कुल 8 गुजराती फिल्मों में काम किया। हिंदी में नंदा ने बतौर हीरोइन 1957 में अपने चाचा वी शांता राम की फिल्म 'तूफान और दिया' में काम किया था। 1959 में नंदा ने फिल्म 'छोटी बहन' में राजेंद्र कुमार की अंधी बहन का किरदार निभाया था। उनका अभिनय दर्शकों को बहुत पसंद आया। उस दौरान लोगों ने नंदा को सैकड़ों राखियां भेजी थीं। इसी साल राजेंद्र कुमार के साथ उनकी फिल्म 'धूल का फूल' सुपरहिट रही। 

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nanda - फोटो : social media

इस फिल्म ने नंदा को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। बहन के रोल उनका पीछा नहीं छोड़ रहे थे। नंदा एक बार फिर 1960 की फिल्म काला बाजार में देवआनंद की बहन बनीं। नंदा ने सबसे ज्यादा 9 फिल्में शशिकपूर के साथ कीं। उन्होंने उनके साथ 1961 में ‘चार दीवारी’ और 1962 में ‘मेंहदी लगी मेरे हाथ’ जैसी फिल्में कीं लेकिन शशिकपूर के साथ सुपरहिट फिल्म रही ‘जब जब फूल खिले’। कई हिट फिल्में देने के बावजूद नंदा की अभिनय प्रतिभा का सही इस्तेमाल कम ही किया गया। शायद उनके अभिनय का पारखी निर्देशक उनकी किस्मत में नहीं था। नाजुक, छुई-मुई और प्यारी सी लड़की की छवि को तोड़ने के लिए नंदा छटपटा रही थीं।

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