ये कहानी है उस जबरदस्त अभिनेता की, जिन्होंने अलग अलग कई फिल्मों में जबरदस्त अभिनय कर कलकत्ता से बम्बई तक का सफर तय किया। इनका नाम अनवर हुसैन है। अनवर का जन्म 11 नवंबर 1925 को कोलकाता में हुआ था। इनकी मां का नाम जद्दनबाई था और पिता उस्ताद इरशाद मीर खान थे। अनवर की पढ़ाई-लिखाई कोलकाता में ही हुई। यहां से इन्होंने मैट्रिक पास किया, लेकिन हालात कुछ ऐसे हुए कि स्कूल से निकाल दिया गया। इस कारण ये अपनी आगे की पढ़ाई पूरी न कर सके। अपने फिल्मी सफर में अनवर हुसैन ने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया था। ये फिल्मों में जितने अच्छे से सकारात्मक भूमिका निभाते थे उतनी ही बारीकी से नकारात्मक भूमिका भी। श्वेत-श्याम और रंगीन सिनेमा दोनों में इन्होंने दोनों में अपनी कला का जलवा दिखाया। अनवर फिल्म अभिनेता ही नहीं बल्कि निर्माता भी थे। 1940 से लेकर 1982 तक वह लोकप्रिय कैरेक्टर एक्टर रहे। अपने फिल्मी करियर में उन्होंने 200 से अधिक बॉलीवुड फिल्मों में काम किया।
अनवर हुसैन: रोमियो जूलियट से बनी थी पहचान, कभी दिलीप कुमार के विलेन तो कभी देवानंद के यार बने
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मशहूर अभिनेत्री नरगिस के भाई थे अनवर
अनवर हुसैन की मां की तीसरी शादी से जो लड़की हुई उसका नाम नरगिस था। वही नरगिस जिन्होंने बड़े होकर एक समय में बॉलीवुड पर राज किया। वह अनवर की बहन थीं। कहते हैं कि जद्दनबाई के गाने सुनकर मोहन बाबू उनपर मोहित हो गए थे। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर जद्दन से शादी की। इसके लिए उन्होंने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम अब्दुल रशीद रखा। इन्हीं की बेटी थीं नरगिस। नरगिस और सुनील दत्त से अनवर के ताल्लुकात हमेशा अच्छे रहे। ये संजय दत्त के मामा और सुनील दत्त के साले थे। अनवर के एक और भाई थे, जिनका नाम अख्तर हुसैन था। अख्तर हुसैन की बेटी और अनवर की भतीजी जाहिदा हुसैन भी फिल्मों में काम करती थीं।
ऑल इंडिया रेडियो में किया काम
1939 में अनवर हुसैन भोपाल रियासत में कमीशन एजेंट और जनरल सप्लायर का काम करते थे। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और यहां ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण लिया। मौका मिलने पर ये ऑल इंडिया रेडियो में बतौर रेडियो आर्टिस्ट काम करने लगे। वहां पर इन्होंने लगभग 3 साल काम किया।
निर्देशक ए आर कारदार दिया मौका
अनवर हुसैन पहले तो अपने ही माता-पिता की फिल्मों में छोटे मोटे किरदार निभाया करते थे। इनकी जिंदगी ने एक बार फिर पलटी मारी और उस समय के मशहूर निर्देशक एआर कारदार ने अनवर के हुनर को पहचाना। उन्होंने फिल्म 'संजोग' में खुद को साबित करने का मौका दिया। इस पिक्चर में अनवर ने अपने अभिनय से लोगों को काफी प्रभावित किया। फिर 'पहले आप', 'हमलोग', 'आवाज’, 'बारिश' और 'फुटपाथ' जैसी फिल्मों में बतौर नायक नजर आए। हालांकि फिल्म कुछ कमाल नहीं कर पाई।
रोमियो जूलियट के लिए हुए सम्मानित
'रंगमहल' फिल्म में अनवर हुसैन पहली बार खलनायक बने थे, लेकिन इनकी किस्मत यहां धोखा दे गई। रंगमहल के लेब्रोटरी में आग लग गई, जिस कारण ये फिल्म आई ही नहीं। इनके भाई फिल्म 'रोमियो जूलियट' बना रहे थे। इसमें अनवर को लिया गया। कहा जाता है कि इस पिक्चर के लिए पहले याकूब को लिया गया था, लेकिन वो बीमार थे। इसके बाद मजहर को चुना गया, लेकिन शूटिंग के दिन वो भी नहीं आ पाए। इसके बाद अनवर को ये रोल दे दिया गया। ये फिल्म लोगों को भा गई। पत्रकारों की एक टीम ने अनवर को सम्मानित भी किया।