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जब गोपालदास नीरज ने लड़ा था चुनाव, दिया था नारा-‘जो चोर हैं वह मुझे वोट न दें’, नतीजों ने चौंकाया

Tue, 11 Dec 2018 12:16 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 11 Dec 2018 12:16 PM IST
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assembly election 2018 Gopaldas neeraj political career
gopal das neeraj - फोटो : file photo
आज देशभर में पांच राज्यों के चुनावों की चर्चा हो रही है। किसी राजनेता को जीत मिली है तो किसी को हार। बॉलीवुड की कुछ ऐसी भी शख्सियत रही हैं जिन्होंने जो राजनीति में आई। भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद के फेमस गानों का सॉन्ग राइटर जब पॉलिटिक्स में उतरा तो पूरा बॉलीवुड हिल गया। अपने फिल्मी करियर की बुलंदियों पर पहुंचने से पहले ही उस जाने-माने गीतकार ने राजनीति की तरफ अपना पहला कदम कानपुर शहर में रखा। हम बात कर रहे हैं मशहूर गीतकार, कवि, फिल्म फेयर पुरस्कार विजेता, पद्म भूषण और पद्मश्री गोपाल दास ‘नीरज’ की। बहुत ही कम लोगों को यह मालूम है कि 60 और 70 दशक में अपने बॉलीवुड गीतों के जरिये लोगों के दिलों में जगह बना चुके गोपाल दास ‘नीरज’ ने चुनाव भी लड़ा था। 
assembly election 2018 Gopaldas neeraj political career
gopal-das neeraj - फोटो : social media
साल 1967 के आम चुनाव में ‘नीरज’ कानपुर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे। अपनी चुनावी सभा में उन्होंने लोगों से अपील की थी कि जो भी भ्रष्ट हों या चोर हों वे उन्हें वोट न दें। बस यही एक बात जनमानस को घर कर गई। और वह 60 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।  उस चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़े एसएम बनर्जी जीते थे। कांग्रेस का प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहा था। ये हैं नीरज के हिट बॉलीवुड गाने...
 
assembly election 2018 Gopaldas neeraj political career
gopal das neeraj - फोटो : file photo
गोपाल दास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को यूपी के इटावा जिले के ग्राम पुरावली में हुआ था। मात्र 6 वर्ष की आयु में पिता गुजर गये। 1942 में एटा से हाई स्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। शुरुआत में इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर नौकरी की। लम्बी बेकारी के बाद दिल्ली जाकर सफाई विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी की। वहां से नौकरी छूट जाने पर कानपुर के डीएवी कॉलेज में क्लर्क रहे फिर बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कम्पनी में पांच वर्ष तक टाइपिस्ट का काम किया। नौकरी करने के साथ प्राइवेट परीक्षाएं देकर 1949 में इंटरमीडिएट, 1951 में बीए और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिंदी से एमए किया। 

कहता है जोकर सारा जमाना (फिल्म-मेरा नाम जोकर )
दिल आज शायर है गम आज नगमा है (फिल्म- गैम्बलर)
खिलते हैं गुल यहां मिल के बिछड़ने को (फिल्म- शर्मीली )
शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब (फिल्म- प्रेम पुजारी )
कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे (फिल्म- नई उम्र की नई फसल )..........
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gopal das neeraj - फोटो : file photo
चुनाव के नतीजे आने के बाद नीरज ने बताया था कि मतदान से ऐन पहले वह चुनाव से हट गए थे। बोले कि कांग्रेस ने सपोर्ट करने की बात कही थी, लेकिन न तो सपोर्ट लिया और न दिया। चुनावी मंच पर श्रोता उन्हें सुनने के लिए लालायित रहते थे। उस चुनाव परिणाम में मिले मतों ने तब सभी नेताओं और पार्टियों को चौंका दिया था। नीरज जी ने बताया था कि ‘जो चोर हैं वह मुझे वोट न दें’ सार्वजनिक अपील का लोगों पर गहरा असर पड़ा था।
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कवि गोपाल दास नीरज को बुके देकर मुलाकात करते गीतकार जावेद अख्तर। - फोटो : अमर उजाला
जनता ने ईमानदारी दिखाते हुए ‘नीरज’ को जमकर वोट दिए थे। उन्होंने कहा था कि सभी साहित्यकारों और रचनाकारों को अपने बीच से एक प्रत्याशी खड़ा करना चाहिए और उसे मिलकर चुनाव लड़ाना चाहिए। इससे जनता को भी किसी साफ-स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति का विकल्प मिलेगा।
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