संगीत की दुनिया के साथ साथ ये फानी दुनिया भी छोड़ गए गायक भूपिंदर सिंह की शांति सभा में पहुंचे लोगों को देखकर ये एक बार फिर यकीन हो चला कि मायानगरी मुंबई में सब शोहरत के साथी ही हैं। उनकी याद में हुई प्रार्थना सभा संगीत दुनिया का एक भी मौजूदा सितारा नजर नहीं आया। नजर आए तो भूपिंदर सिंह के बस वही साथी जो उनका साथ बरसों से देते रहे। सुख दुख के साथी रहे और उनकी इस प्रार्थना सभा में भी नम आंखों से उन्हें याद करते रहे।
Bhupinder Singh: भूपिंदर को अंतिम विदाई देने पहुंचे गिनती के सितारे, नहीं नजर आया बॉलीवुड का कोई बड़ा चेहरा
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मुंबई में अंधेरी स्थित चार बंगला गुरुद्वारे में दिवंगत गायक भूपिंदर सिंह की याद में प्रार्थना सभा के आयोजन में दिवंगत पुण्यात्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए संगीतकार उत्तम सिंह, गायक रूप कुमार राठौड़, सोनाली राठौड़, रेखा भारद्वाज, अरविंदर सिंह, सुदेश भोसले, जसवंत सिंह, पंकज उधास, सुदेश भोसले और शैलेंद्र सिंह ने संगीत की दुनिया की नुमाइंदगी की। संगीत का कारोबार करने वाली बड़ी कंपनियों टी सीरीज, एचएमवी, टिप्स, वीनस, सोनी म्यूजिक, जी म्यूजिक का कोई भी बड़ा पदाधिकारी यहां नजर नहीं आया।
हिंदी सिनेमा की नुमाइंदगी करने के लिए भी यहां बस पूनम ढिल्लो, हर्षिता कश्यप, राकेश बेदी, सिद्धार्थ काक, टीकू तलसानिया, निर्देशक मधुर भंडारकर, विवेक शर्मा, शशि रंजन, अशोक पंडित जैसे लोग ही मौजूद दिखे। ना कोई बड़ा सितारा आया और ना ही मौजूदा दौर का बड़ा निर्देशक। भूपिंदर सिंह की याद में इन लोगों ने आपस में एक दूसरे को अपने किस्से साझा किए। दुनिया छोड़ गए संगीत सितारे भूपिंदर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और समझा कि यही जीवन का अंतिम सत्य है।
भूपिंदर सिंह की पत्नी मिताली सिंह और बेटे अमरदीप सिंह के लिए यह बहुत ही दुखद पल रहा। संगीतकार उत्तम सिंह समय से पहले पहुंच गए और प्रार्थना सभा के खत्म होने के काफी बाद तक रहे। रूप कुमार राठौड़ और सोनाली राठौड़ आए और मुश्किल से 10 मिनट रुककर ही निकल गए। पूनम ढिल्लो और रेखा भारद्वाज जरूर देर तक मिताली को सांत्वना देते दिखे।
चार बंगला के जिस गुरुद्वारे में शाम 4.30 से 5.30 तक ये प्रार्थना सभा आयोजित की गई, वहां इस दरम्यान शबद कीर्तन और गुरबानी चलती रही। ये कार्यक्रम ऐसी जगह आय़ोजित किया गया, जिसके चार पांच किमी के दायरे में ही हिंदी सिनेमा के सारे दिग्गज सितारे, गायक, संगीतकार और सारी बड़ी फिल्म निर्माण कंपनियों के दफ्तर है। लेकिन चढ़ते सूरज को ही सलाम करने वाली मायानगरी की माया ऐसे मौकों पर ही सामने आती है जब कोई हाशिये पर चला गया सितारा दुनिया छोड़ता है और उसकी अंतिम यात्रा या प्रार्थना सभा में बस गिनती के लोग पहुंचते हैं।