फिल्म ‘शराबी’ को रिलीज हुए 37 साल पूरे हो गए। इस फिल्म की याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने कुछ साल पहले लिखा था, “ऐसा लगता है जैसे कि कल की ही बात हो। हम लोग 1983 वाले वर्ल्ड टूर पर थे। इंडस्ट्री में कलाकारों का ऐसा वर्ल्ड टूर पहले कभी नहीं हुआ था। हम लोग अमेरिका और लंदन में कोई 10 शहरों में अपने शोज करके न्यूयॉर्क से ट्रिनिडाड और टोबैगो के लिए उड़े थे और तब मेरे साथ यात्रा कर रहे प्रकाश मेहरा ने मुझे बाप और बेटे के रिश्तों पर एक फिल्म करने का सुझाव दिया। और, बताया कि ये जो बेटा है, वह शराबी है। फिल्म ‘शराबी’ की कहानी अटलांटिक महासागर के ऊपर 35 हजार फिट की ऊंचाई पर उड़ रहे एक जहाज में मुझे सुनाई गई थी।”
Bioscope S2: बिग बी ने पहली बार किया स्टंट निर्देशन, सियासत में न जाते तो बन जाते फिल्म डायरेक्टर
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जब अमिताभ बने स्टंट डायरेक्टर
अमिताभ बच्चन आगे लिखते हैं, “फिल्म ‘शराबी’ की शूटिंग के बीच में ही मैंने अपना हाथ घायल कर लिया था। मेरे हाथ में दीवाली का एक पटाखा फूट गया था। लेकिन मैंने किसी को परेशान नहीं किया और न ही शूटिंग में देरी की। मेरा हाथ बहुत ही ज्यादा घायल था और ठीक तंदूरी चिकन जैसा लग रहा था। पूरे हाथ का हर हिस्सा झुलस गया था लेकिन मैंने काम नहीं रोका।” गौरतलब है कि फिल्म ‘शराबी’ के ज्यादातर दृश्यों में इसीलिए अमिताभ बच्चन अपना एक हाथ पैंट में डाले रहते हैं। अमिताभ बच्चन ने फिल्म में कुछ स्टंट दृश्य भी निर्देशित किए। वह लिखते हैं, “मेरी घड़ी और चेन चुराने वाले बदमाशों से जब मैं बार में भिड़ता हूं तो वह फाइट सीक्वेंस मैंने ही कोरियोग्राफ किया था। वे लम्हे मस्ती के थे।”
प्रकाश मेहरा के अधूरे ख्वाब
वाकई अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘ज़ंजीर’ में उनके करियर का पहला जीवनदान देने वाले प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन की उन दिनों खूब छनती थी और ये पहली फिल्म थी जिसकी शूटिंग सिंक साउंड में हुई। फिल्म के तमाम ऐसे सीन है जिनकी डबिंग प्रकाश मेहरा ने बाद में नहीं की और लोकेशन का असली साउंड ही फिल्म में इस्तेमाल किया। प्रकाश मेहरा फिल्म ‘शराबी’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन की अदाकारी से इतना ज्यादा खुश थे कि उन्होंने अमिताभ को एक फिल्म में निर्देशक बनाने का भी फैसला कर लिया था। फिल्म का नाम था, ‘एक गुनाह और सही’। जो फिल्म अमिताभ बच्चन निर्देशित करने वाले थे, उसकी कहानी मशहूर साहित्यकार धर्मवीर भारती के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ पर आधारित थी। यहां ये जान लेना भी दिलचस्प होगा कि ‘ज़ंजीर’ बनने से पहले इसी उपन्यास पर बन रही एक फिल्म की शूटिंग के दौरान ही अमिताभ और जया भादुड़ी दोनों करीब आए थे। ये फिल्म भी बाद में बनी नहीं।
मेहरा और देसाई में जुबानी जंग
फिल्म ‘शराबी’ रिलीज हुई तो उन दिनों में क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में पढ़ाई कर रहा था। दिसंबर 1983 में रिलीज हुई निर्देशक मनमोहन देसाई की फिल्म ‘मर्द’ कॉलेज के ठीक सामने के थिएटर निशात से उतर चुकी थी और लग चुकी थी निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘शराबी’। किसी को नहीं पड़ी थी कि प्रकाश मेहरा और मनमोहन देसाई के बीच बंबई में क्या महाभारत चल रही है और क्यों मनमोहन देसाई अपनी फिल्म अलंकार थिएटर से हटाए जाने को लेकर गुस्से में हैं? मनमोहन देसाई ने तब फिल्म ‘शराबी’ को लेकर टिप्पणी की थी, ‘एक शराबी ही ‘शराबी’ जैसी फिल्म बना सकता है।’ और, प्रकाश मेहरा का जवाबी हमला था, ‘किसी की मुखालिफत करने में इतना नीचे गिरने की सोच कुली बनाने वाले इंसान की ही हो सकती है।’
फिर बनी प्राण, अमिताभ और मेहरा की तिकड़ी
प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘शराबी’ आज के बाइस्कोप की हमारी फिल्म है। अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा की जुगलबंदी की ये आखिरी हिट फिल्म है। इसी फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक को लेकर दोनों में मनमुटाव हुआ। इसके बाद दोनों की फिल्म ‘जादूगर’ फ्लॉप हुई और दोनों में बातचीत तक बंद हो गई। फिल्म ‘ज़ंजीर’ में अमिताभ बच्चन के नाम की सिफारिश प्रकाश मेहरा से करने वाले प्राण की अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा के साथ तिकड़ी उस फिल्म के 11 साल बाद सीधे यहीं बनी थी। प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन के रिश्ते ‘शराबी’ के बाद क्यों बिगड़े और क्यों अमिताभ बच्चन ने उन्हें और मनमोहन देसाई को आखिर तक नहीं बताया कि दोनों की फिल्में क्रमश: ‘जादूगर’ और ‘तूफान’ तकरीबन एक जैसी हैं, किसी को पता नहीं। हां, अमिताभ बच्चन के रिश्ते कादर खान के साथ क्यों बिगड़े ये बात खुद कादर खान ने ज़माने को बता दी थी। कादर खान शुरू से ही अमिताभ बच्चन को अमित ही कहकर बुलाते थे और सुपरस्टार बनने के बाद उन तक एक निर्माता ये संदेस लेकर आए कि वह अमिताभ बच्चन को ‘सर’ कहकर बुलाया करें। कादर खान ने ये माना नहीं और अपने स्वाभिमान पर अपना संवाद लेखन का करियर कुर्बान कर दिया।