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तनख्वाह बढ़ी तो सो नहीं पाए थे अशोक कुमार, मंटो से कही थी मन की बात
Sun, 10 Dec 2017 11:59 AM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षिता
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Updated Sun, 10 Dec 2017 11:59 AM IST
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Ashok Kumar
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बिहार के भागलपुर शहर के आदमपुर मोहल्ले में 13 अक्टूबर, 1911 को पैदा हुए अशोक कुमार उर्फ दादामुनि सभी भाई-बहनों में बड़े थे। उनके पिता कुंजलाल गांगुली मध्य प्रदेश के खंडवा में वकील थे। लगभग छह दशक भूमिकाओं से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले अशोक कुमार 10 दिसंबर, 2001 को इस दुनिया को अलविदा बोल गए।
अशोक कुमार की पुण्यतिथि पर एक नजर उनकी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्सों पर...
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Ashok Kumar
अशोक कुमार जब पहली बार फिल्मी दुनिया में आए, तब उनकी महीने की तनख्वाह पछत्तर रुपये थी। उन दिनों की याद करते हुए अशोक ने एक बार अपने परम मित्र सआदत हसन मंटो को बताया था, 'बाई गॉड, तनख्वाह में इस बढ़ोतरी से मेरी हालत सच में अजीबो-गरीब हो गई थी।'
ढाई सौ रुपये! दफ्तर के खजांची से जब पहली बार मैंने इतनी रकम ली, तो मेरे हाथ अचानक कांपने लगे थे। समझ में नहीं आता था कि इतने सारे रुपये मैं आखिर रखूंगा कहां?
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Ashok Kumar
अशोक कुमार ने कहा, 'मेरा घर कोई आलीशान मकान नहीं, छोटा सा क्वार्टर भर था। एक चारपाई थी, दो तीन टीन की कुर्सिया होंगी और फिर घर के चारों ओर बेतरतीब फैला हुआ जंगल।' उन्होंने कहा, 'रात के अंधेरे में अगर कोई चोर आ जाए और उसे इस बात का पता चल जाए कि मेरे पास इतने सारे रुपये हैं तो मेरी क्या हालत होगी, मैं यही सोचने में लगा हुआ था।'
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Ashok Kumar
अशोक कुमार ने घर लौटते ही बहुत सारी स्कीमें बना डालीं। फिर वहां पहुंचते ही उन नोटों को मैंने अपनी चारपाई के नीचे बिछी दरी के नीचे छिपा दिया। उन्होंने बताया, 'सारी रात मुझे डरावने सपने आते रहे। और सवेरे सोकर उठने के बाद जो पहला काम मैंने किया वह था उन रुपयों को वहां से उठा कर डाकखाने में जमा करने का- सच में!'
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