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'सलमान के पिता की बदौलत बना ‘शाहरुख खान’, वो जो कहेंगे मैं वो करूंगा'

Mon, 03 Sep 2018 10:19 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 03 Sep 2018 10:19 PM IST
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i made Shahrukh Khan due to Salim Khan
shahrukh khan with salim khan

बॉलीवुड किंग शाहरुख खान का कहना है कि वह अपनी सफलता और प्रसिद्धि के लिए वरिष्ठ पटकथा लेखक सलीम खान के ऋणी हैं। शाहरुख यहां सलमान खान की मेजबानी वाले गेम शो ‘दस का दम 3’ के ग्रांड फिनाले में पहुंचे थे। गौरतलब है कि सलमान खान भी अपने पिता सलीम खान से काफी प्रभावित हैं। शाहरुख (52) ने कहा, ‘संघर्षशील अभिनेता के तौर पर मैं जब पहली बार मुंबई आया था, तब मैं सलमान खान के यहां खाना खाता था जहां सलीम खान जी मेरा बहुत ख्याल रखते थे। यह इन्हीं लोगों के कारण है कि मैं ‘शाहरुख खान’ बन सका। इस शो में मैं सिर्फ सलमान के कारण आया हूं और रहूंगा। लेकिन वह मुझे जहां भी जाने को कहेंगे, मैं चला जाऊंगा।’


 

i made Shahrukh Khan due to Salim Khan
shahrukh khan

क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख की पहली कमाई और पंकज उधास का क्या रिश्ता है। ये बात कई साल पुरानी है जब शाहरुख दिल्ली में ही रहते थे। इस वाकये का खुलासा खुद शाहरुख ने एक ट्वीट के जरिए किया है। उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने इस पैसे से क्या किया था। शाहरुख ने अपने ट्वीट में बताया है कि उनकी पहली कमाई 50 रुपए की थी और वो उन्होंने पंकज उधास के ही एक कॉन्सर्ट में कमाए थे। दरअसल सालों पहले पंकज उधास का एक कॉन्सर्ट दिल्ली में हुआ था जिसमें शाहरुख ने वॉलेंटियर का काम किया था।
 

i made Shahrukh Khan due to Salim Khan
shahrukh khan
इस काम से उन्हें 50 रुपए की कमाई हुई थी जो उनके जिंदगी की पहली कमाई थी। शाहरुख ने बताया कि अपनी पहली कमाई के बाद वो इतने खुश थे कि उन्होंने ट्रेन पकड़ी और उसी पैसे से ताजमहल देखने गए। 

 
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i made Shahrukh Khan due to Salim Khan
Shahrukh Khan
बता दें कि शाहरुख को अपना पहला बड़ा ब्रेक 1988 में टेलीविजन के फौजी सीरियल के रूप में मिला था। इसमें उन्होंने कमांडो अभिमन्यु राय की भूमिका निभाई थी। उनकी पहली बॉलीवुड फिल्म दीवाना थी जो 1992 में आई थी।

 
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pankaj udhas - फोटो : अमर उजाला
हिंदुस्तानी ग़ज़ल गायिकी में दो चमकदार सितारे हुए। जगजीत सिंह और पंकज उधास। दोनों ने ही ग़ज़लों गायिकी की दुनिया को एक नया मुहावरा और तरन्नुम दिया। जगजीत सिंह ने ग़ज़लों को रवायती अंदाज़ से बाहर निकाला तो पंकज उधास ने उसे हर ख़ासो-आम में बे-शुमार शोहरत दिलाई। अपनी मधुर आवाज से ग़ज़ल को लोकप्रिय संगीत के दायरे में लाने का श्रेय पंकज उधास को भी ख़ूब जाता है। गुजरात के राजकोट में 17 मई 1951 को जन्में पंकज उधास की कुछ ग़ज़लें तो ऐसी हैं जिन्हें सुनने के साथ ही  मखमली आवाज़ का अक्स जेहन में उभरता है। इनमें चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल, चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है, एक तरह उसका घर एक तरफ मयकदा, निकलो न बेनकाब जमाना खराब है, दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है हम भी पागल हो जाएंगे कुछ ऐसा लगता है आदि शामिल हैं।
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