बॉलीवुड में शुरुआत से देशभक्ति फिल्में बनती रही हैं। आजादी के क्रांतिकारियों से लेकर कई असल घटनाओं पर आधारित फिल्में बनी हैं। जिन्हें दर्शकों का खूब प्यार तो मिला ही, साथ ही बॉक्स ऑफिस पर भी ऐसी फिल्में सुपरहिट रही हैं। 15 अगस्त में कुछ ही दिन रह गए हैं ऐसे में हम आपको 5 फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जो हमारे अंदर देशभक्ति का जज्बा पैदा करती हैं।
Independence Day: बॉलीवुड की ये 5 सुपरहिट फिल्में, जो भर देती हैं देशभक्ति की भावना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1997 में बनी निर्देशक जेपी दत्ता की 'बॉर्डर' बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है। इस फिल्म की कहानी एक सत्य घटना से प्रेरित है। राजस्थान के लांग्ला पोस्ट पर 120 भारतीय जवान सारी रात पाकिस्तान का सामना करते रहे थे। फिल्म में सनी देओल, जैकी श्रॉफ, अक्षय खन्ना, सुनील शेट्टी और पुनीत इस्सर ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
यशराज बैनर की 2007 में रिलीज हुई 'चक दे इंडिया' शाहरुख खान की अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक माना जाता है। फिल्म में शाहरुख खान ने कबीर खान नाम के एक भारतीय हॉकी खिलाड़ी और कोच का किरदार निभाया था। इसमें शाहरुख द्वारा बोला गया डायलॉग '70 मिनट' आज भी लोगों को नहीं भूलता। फिल्म के एक सीन में शाहरुख महिला खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते हुए कहते हैं 'मुझे स्टेट्स के नाम ना सुनाई देते हैं, ना दिखाई देते हैं, सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है- इंडिया'
फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' एथलीट मिल्खा सिंह की बायोपिक है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में फरहान अख्तर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। भारत-पाक बंटवारे के दौरान जान बचाकर दिल्ली पहुंचे मिल्खा सिंह एक रिफ्यूजी कैंप में अपनी बहन से मिलते हैं और यहीं से कहानी शुरू होती है। फिल्म के आखिर में जब मिल्खा सिंह फीनिशिंग लाइन पार करके जीत हासिल करते हैं तो फिल्म हर भारतीय के अंदर देशभक्ति का जज्बा जगा देती है।
अक्षय कुमार की फिल्म 'एयरलिफ्ट' कुवैत से भारतीयों को छुड़ाए जाने वाले ऑपरेशन पर बनी है। रंजीत कात्याल नाम के एक कारोबारी बने अक्षय कुमार की मदद भारत सरकार करती है। यह फिल्म सत्य घटना पर आधारित है। रंजित कात्याल ने 90 के दशक में खाड़ी संकट के दौरान अनगिनत भारतीय परिवारों को कुवैत और इराक से बाहर निकालने में मदद की थी।