अभिनय के क्षेत्र में बचपन से ही निर्माताओं की पसंदीदा रहे जगदीप उर्फ सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी का नाम बहुत बड़ा है। बहुत कम ऐसे कलाकार रहे हैं जिसे बिमल रॉय जैसे महान निर्देशक ने अपनी फिल्म में काम करने के लिए खुद बुलाया हो। कॉमेडी में तो जगदीप ने खुद को ऐसे स्थापित कर दिया है कि उनकी जगह शायद ही कोई ले पाए। ये उन कलाकारों में से एक हैं जो फिल्म में सहायक कलाकार का किरदार निभाकर देश के प्रधानमंत्री से पुरस्कृत हुए हैं। आज उनके जन्मदिन पर हम आपको उनके उनके ऐसे किरदारों के बारे में बताते हैं, जिन्हें देखकर आपकी यादें ताजा हो जाएंगी।
इन 10 किरदारों ने किया साबित, जगदीप का नाम सूरमा भोपाली ऐसे ही नहीं है
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किरदार : लालू उस्ताद
फिल्म : दो बीघा जमीन (1953)
उस समय जगदीप एक बाल कलाकार के रूप में काम करते थे। निर्देशक बिमल रॉय ने फणि मजुमदार की फिल्म धोबी डॉक्टर में उन्हें रोते हुए देखा। वहीं से बिमल रॉय ने जगदीप को पसंद किया, और अपनी इस फिल्म में एक जूते पोलिश करने वाले का किरदार दिया। यह एक कॉमेडी किरदार था, जिसमें जगदीप लोगों को चुटीले संवाद बोलकर जूते पोलिश करवाने के लिए बुलाते हैं। साथ ही अपनी बिरादरी वालों पर रौब भी जमाते हैं।
किरदार : इलाइची
फिल्म : आर पार (1954)
अजीब से नाम से ही अंदाजा हो गया होगा कि जगदीप ने इसमें भी एक कॉमेडियन का किरदार ही किया है। गुरु दत्त के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जगदीप ने गुरु दत्त के ही पार्टनर का किरदार निभाया है। शुरुआत से लेकर अंत तक दोनों एक साथ रहते हैं। उनके किरदार की खास बात यह है कि गुरु दत्त पूरे वयस्क हैं, और जगदीप एक बालक। फिर भी बुजुर्गों जैसी बात करते हैं। यही बात उनके किरदार को बड़ा बनाती है।
किरदार : महमूद
फिल्म : हम पंछी एक डाल के (1957)
बच्चों के बेहतरीन काम की वजह से सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का फिल्मफेयर जीतने वाली इस फिल्म में जगदीप ने मुख्य किरदार राजेंद्र मेहरा (मास्टर रोमी) के सहपाठी का किरदार निभाया है। कई और दोस्तों के साथ मिलकर राजेंद्र और महमूद (जगदीप) बाहर घूमने चले जाते हैं। राजेंद्र घर से रूठकर आया था, तो महमूद ऐसा दोस्त था जो उसे बुजुर्गों की तरह समझाया करता था। इस किरदार के लिए जगदीप की बहुत तारीफ हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें खुद पुरस्कृत भी किया था।
किरदार : सूरमा भोपाली
फिल्म : शोले (1975)
रमेश सिप्पी की प्रतिष्ठित फिल्म 'शोले' का तो हर किरदार लोगों को जुबानी याद हैं। यहां से ही जगदीप को सूरमा भोपाली के नाम से ही जाना जाने लगा था। बहुत से लोगों को शायद आज भी नहीं पता होगा कि सूरमा भोपाली का असली नाम जगदीप है। फिल्म में एक फेंकू लकड़ी बेचने वाले के रूप में जगदीप के किस्से सुनने बहुत से लोग जमा रहते हैं। वह डींगें हांकते रहते हैं, और लोग सुनते रहते हैं। जगदीप का यह रूप लोगों की बहुत पसंद आया।