हिंदी सिनेमा में नायिका प्रधान फिल्मों को कारोबारी सफलता मिलने का जो दौर फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ से लौटा, उसमें दीपिका पादुकोण की ‘पीकू’, सोनम कपूर की ‘नीरजा’, अनुष्का शर्मा की ‘एनएच 10’, रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी’ जैसी फिल्मों ने और इजाफा किया है। अब नुसरत भरूचा की फिल्म ‘जनहित में जारी’ 10 जून को रिलीज होने को है। पंकज शुक्ल से इस खास बातचीत में नुसरत बता रही हैं, इस फिल्म के सामाजिक पहलुओं, महिलाओं को सुरक्षित यौन संबंध के प्रति सजग होने और फिल्म से मिलने वाले महिला सशक्तिकरण के संदेश के बारे में।
Janhit Mein Jaari: नुसरत भरूचा की महिलाओं को सलाह, सुरक्षित यौन संबंध आपका अधिकार है, इसे हक से मांगो...!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपकी आने वाली फिल्म ‘जनहित में जारी’ का विषय जब पहली बार आपके सामने आया तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी? मन में कहीं कोई हिचकिचाहट थी?
नहीं, बिल्कुल नहीं। पूरी कहानी सुनने से पहले मैंने इसका सार सुना था। फिल्म के निर्माता राज शांडिल्य ने ये कहानी सुनाई थी। मैं इसे सुनकर ही बहुत उत्साहित हो गई क्योंकि मैं जानती हूं कि ये विषय है थोडा पेचीदा लेकिन राज का कहानी और पटकथा लिखने का तरीका इतना सहज, सरल और मजाकिया है कि ये सीधे दिल को छू जाता है। मुझे तभी समझ आ गया था कि वह ही ऐसे विषय को बनाने के लिए बिल्कुल सही निर्माता हैं। फिल्म जब हमने शुरू की थी तो लोगों को इसे लेकर जो भी शक सुबहा रहे, वे सारे फिल्म का ट्रेलर आने के बाद दूर हो गए। ट्रेलर की सब तरफ तारीफ हो रही है और महिला सशक्तिकरण की ये नई आवाज बन रही है।
तो कंडोम बेचने वाली एक लड़की के इस किरदार के बारे में आपने अपने घर पर चर्चा की तो क्या कहना था घरवालों का?
मैं अपनी फिल्मों के विषयों को लेकर घर पर चर्चा करती नहीं हूं क्योंकि मेरे माता पिता की ये कभी ख्वाहिश नहीं रही कि मैं अभिनेत्री बनूं। लेकिन, मैं बन गई। मैंने कभी घर पर अपनी फिल्मों की बातें, कहानियां नहीं बताईं। फिल्म ‘छोरी’ के बारे में भी उनको पता नहीं था। उन्होंने थिएटर में देखा तो पता चला कि ये क्या पिक्चर थी। फिल्म ‘जनहित में जारी’ का विषय भी ऐसा है कि जिसे हमने पूरी जिम्मेदारी के साथ बनाया है और इस पर किसी और से चर्चा करने की जरूरत मुझे लगी नहीं।
महिलाओं को यौन संबंध के दौरान सुरक्षा की जो मांग करनी चाहिए, उसके बारे में आपका क्या मत है?
मुझे पता नहीं कि सुरक्षित यौन संबंध की मांग करने से लड़कियां हिचकिचाती क्यों हैं। लेकिन, मैं ये कह सकती हूं कि अगर युवतियां, महिलाएं सुरक्षित यौन संबंध की जिद करने लगें और तो सुरक्षा कवच के इस्तेमाल की दर भी बढ़ेगी और इसका प्रतिशत भी। दिक्कत क्या है कि आज भी एक लड़की केमिस्ट की दुकान पर जाकर अपने लिए कंडोम नहीं खरीद सकती है। वह अगर चाहेगी भी वह अपने पुरुष साथी को बोलेगी कि कि आप खरीद कर ले आओ या आप जाकर ले आओ। इसमें संकोच क्यों, जब सबके परिवार हैं। सब शादी करते हैं। सब बच्चे पैदा करते हैं। उनके बच्चों की भी शादियां कराते हैं। तो बच्चे पैदा करने का क्या तरीका है, ये तो सबको पता है ना!
सुरक्षित यौन संबंध अवांछित गर्भधारण को रोकने में भी बहुत बड़ी मदद कर सकते हैं...
बिल्कुल सही बात। अवांछित गर्भधारण असुरक्षित यौन संबंध के चलते ही हो जाता है। मान लो कि दंपती उस समय बच्चे पैदा करने और उनका सही पालन पोषण करने की मानसिक और आर्थिक स्थिति में नहीं है। ये भी सकता है कि जो पिता बनने जा रहा है, वह खुद अभी अपने करियर में कुछ बन नहीं पाया है। दोनों के जीवन की योजना न बन पाई हो और ऐसे में गर्भधारण हो जाए तो ये सब परिवार पर बहुत असर डालता है। होने वाले बच्चे पर बहुत असर डालता है। उसे अगर विकसित होने के लिए सही आर्थिक मदद और सही माहौल न मिले तो उसका जीवन भी प्रभावित होता है।