अभिनेता वरुण धवन और जान्हवी कपूर की फिल्म 'बवाल' को लेकर मुंबई फिल्म जगत में एक और बवाल शुरू होता नजर आ रहा है। इंडस्ट्री में ये चर्चा आम है कि ये फिल्म इस तरह से बुनी गई कि इसकी शूटिंग के जरिये न सिर्फ शेनेगर वीजा वाले देशों के पर्यटन उद्योग को फायदा पहुंचे बल्कि इसके जरिए अधिक से अधिक सब्सिडी भी बटोरी जा सके। फिल्म 'बवाल' को करीब 80 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि इस बारे में फिल्म के निर्माता साजिद नाडियाडवाला अभी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
Bawaal: क्या सिर्फ सब्सिडी के लिए बनाई गई ‘बवाल’, जानिए क्या कहते हैं हिंदी फिल्म इंटस्ट्री के एक्सपर्ट
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विदेश में शूटिंग के दौरान तमाम देशों में 40 से 50 प्रतिशत की लागत इस शर्त पर वापस की जाती है कि इससे वहां के दर्शनीय स्थलों का प्रचार होगा। यूरोप के तमाम देश इसीलिए इन दिनों हिंदी फिल्मों और देश की दूसरी भाषाओं की फिल्मों के निर्माताओँ के पसंदीदा स्थल बने हुए हैं। इसके जरिये फिल्म सितारों की पिकनिक सी होती रहती है और निर्माता के माथे पर शिकन इसलिए नहीं आती क्योंकि उनके दिए गए खर्चे के बिल पर उन्हें एक तय राशि वापस मिल जाती है।
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फिल्म 'बवाल' ज्यादातर शूटिंग पेरिस, बर्लिन, पोलैंड, एम्सटर्डम, क्राकोव और वारसा में की गई। मुंबई में ये चर्चा आम है कि सब्सिडी की वजह से ही इस फिल्म की कहानी को इन स्थानों में रखते हुए बुना गया। और, इसी वजह से कहानी अपने मूल मुद्दे से भटक गई। फिल्म के लखनऊ के दृश्यों की शूटिंग भी लखनऊ में न होकर मुंबई के ही स्टूडियो में क्रोमा पर की गई बताई जा रही है।
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अगर ये बात सच है कि फिल्म 'बवाल' को सब्सिडी के तौर पर विदेश में 80 करोड़ रुपये मिले हैं तो फिल्म का बजट भी करीब करीब इतना ही है। यानी कि फिल्म को अमेजन प्राइम वीडियो से जो भी रकम मिली वह फिल्म का मुनाफा बन चुकी है। फिल्म 'बवाल' को मिली सब्सिडी को लेकर फिल्म के निर्माता साजिद नाडियाडवाला से भी बात करने की कोशिश की गई लेकिन इस बाबत भेजे गए संदेश का अब तक उनसे जवाब नहीं मिला है।
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इस बारे में ट्रेड विशेषज्ञ कोमल नाहटा कहते हैं, 'आज के निर्माता काफी होशियार हो गए हैं। कहानियों का चयन ही ऐसा करते हैं कि विदेशी लोकेशन पर फिल्म की शूटिंग की जा सके, खास तौर पर वहां जहां पर फिल्म को सब्सिडी मिल सके। हालांकि, फिल्म 'बवाल' की जहां तक बात है तो मुझे ऐसा कहीं नहीं लगा कि फिल्म के सीन बिना जरूरत के वहां शूट किए गए हैं। फिल्म की कहानी ही ऐसी लिखी गई है कि उसे उन लोकेशंस पर शूट किया जा सके।'
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