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किस्सा: जब दिलीप साहब ने जेल में बिताए पूरे 24 घंटे, लोग कहने लगे थे 'गांधीवाला'
'अदाकार-ए-आजम' दिलीप कुमार नहीं रहे...ये खबर सुबह ही सामने आ चुकी है, लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं। दिलीप कुमार ने आज हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली। दिलीप साहब के निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और दिलीप साहब से जुड़े तमाम किस्से कहानियां चल रही हैं। कोई उनकी फिल्मों की बात कर रहे है तो कोई उनकी अदाकारी की। कोई उनके और मधुबाला के अधूरे इश्क को याद कर रहा है तो कोई दिलीप-सायरा की मुकम्मल चाहत की। दिलीप साहब की पत्नी और अदाकारा सायरा बानो उनकी आखिरी सांस तक उनके साथ रहीं। तमाम किस्से कहानियों के बीच हम आपको दिलीप कुमार के जेल जाने के वाकये से रूबरू कराने जा रहे हैं। जी हां, दिलीप साहब जेल भी गए थे और यही नहीं इसके बाद उन्हें 'गांधीवाला' भी कहा जाने लगा।
दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान में हुआ था और उनका पहला नाम यूसुफ खान था। बाद में उन्हें पर्दे पर दिलीप कुमार के नाम से शोहरत मिली। एक्टर ने अपना नाम एक प्रोड्यूसर के कहने पर बदला था, जिसके बाद उन्हें स्क्रीन पर दिलीप कुमार के नाम से लोग जानने लगे। जब दिलीप कुमार का जन्म हुआ तो भारत अंग्रेजों का गुलाम था। उन दिनों उन दिनों गांधी जी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारी देश को आजादी दिलाने की लड़ाई लड़ रहे थे। दिलीप साहब भी इन आंदोलनों का हिस्सा रह चुके हैं।
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दिलीप कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
एक बार पुणे के एक क्लब में दिलीप ने अंग्रेजों के खिलाफ एक भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने अंग्रेज सरकार की खूब आलोचना की, जिसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया था। भाषण देते हुए दिलीप कुमार ने कहा था कि आजादी की लड़ाई जायज है और ब्रिटिशों की वजह से ही हिन्दुस्तान में सारी मुसीबतें पैदा हो रही हैं। इस क्रान्तिकारी भाषण पर तालियां तो खूब बजीं लेकिन वहां पुलिस आ गई और दिलीप साहब को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने उन्हें अंग्रेज सरकार के खिलाफ बोलने के जुर्म में जेल में डाल दिया।
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दिलीप कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
इस वाकये का जिक्र दिलीप साहब ने अपनी आत्मकथा ‘दिलीप कुमार: द सब्सटांस एंड द शैडो’ में करते हुए लिखा है कि, "फिर क्या था, ब्रिटिश विरोधी भाषण के लिए मुझे जेल भेज दिया गया। जहां कई सत्याग्रही बंद थे।" उन्होंने आगे लिखा, "तब सत्याग्रहियों को गांधीवाले कहा जाता था। दूसरे कैदियों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गया। सुबह मेरे पहचान के एक मेजर आए तो मैं जेल से छूटा। मैं भी गांधीवाला बन गया था।"
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दिलीप कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
यूं तो दिलीप साहब लेजेंड के तौर पर जाना जाता है लेकिन वो असल जिंदगी में काफी शरारती थे। उनकी ऑटो बायोग्राफी के फॉरवर्ड में सायरा बानो ने लिखा है, "साहब कभी-कभी हेलन के गाने मोनिका ओ माय डार्लिंग में उनकी हूबहू एक्टिंग करते हुए डांस करते थे और वैसे ही कपड़े पहनकर, वैसे ही अदाएं। मैं ये देखकर हैरान रह गई थी।"
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दिलीप कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
बॉलीवुड के ‘ट्रेजेडी किंग’ दिलीप कुमार को बहुत से लोग अपना आदर्श मानते हैं। लेकिन दिलीप साहब पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना आदर्श मानते थे। उनके कहने पर उन्होंने 1962 में नॉर्थ बॉम्बे से वीके कृष्ण मेनन के लिए चुनाव अभियान में भी हिस्सा लिया था। 2000 से 2006 तक वह राज्यसभा सदस्य भी रहे। उन्होंने अपने जीवन के हर पहलू को बखूबी जिया।
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