{"_id":"5e00a2708ebc3e87ec7ffd62","slug":"mohammad-rafi-birth-annivarsary-funeral-watch-emotional-video","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Video: लाखों फैंस के बीच निकली थी मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा, उस दिन आसमान भी रोया था","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
Video: लाखों फैंस के बीच निकली थी मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा, उस दिन आसमान भी रोया था
अपनी गायकी से सबके दिलों पर राज करने वाले मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को हुआ था। मोहम्मद रफी पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में जन्में थे और वहां से मुंबई ही नहीं दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई। उन्हें शहंशाह-ए-तरन्नुम भी कहा जाता था। रफी साहब बहुत कम बोलने वाले, जरूरत से ज्यादा विनम्र और मीठे इंसान थे। उनकी बहू यास्मीन खुर्शीद बताती हैं कि न तो वह शराब या सिगरेट पीते थे और न ही पान खाते थे। इस महान शख्सियत की जयंती पर आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें।
2 of 9
Mohammed Rafi
हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 31 जुलाई 1980 को रमजान के महीने में रफी इस दुनिया से विदा हो गए। रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था।
3 of 9
Mohammed Rafi
मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कॉन्सर्ट में गाने की अनुमति दी थी। साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 9
मोहम्मद रफी
मोहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया था। मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते हैं। उस वक्त लाखों लोग यात्रा में शरीक हुए थे। कहा गया था कि रफी ने निधन पर आसमान भी फूट फूटकर रोया था।
विज्ञापन
5 of 9
मोहम्मद रफी
मोहम्मद रफी ने न केवल गायिकी बल्कि एक्टिंग में भी हाथ आजमाया था। रफी साहब ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' फिल्म में बतौर एक्टर काम किया था। यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और ताबड़तोड़ कमाई की। मोहम्मद रफी ने ज्यादातर गाने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए गाए। उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए करीब 369 गाने गाए थे, जिसमें 186 गाने सोलो शामिल हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।