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सिंगर नहीं एक्टर बनना चाहते थे मुकेश, शादी में गाए एक गाने की वजह से बन गए सुरों के सरताज
Sun, 22 Jul 2018 07:45 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 22 Jul 2018 07:45 AM IST
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लाखों करोड़ों दिलों को अपनी गायकी से छू लेने वाले गायक मुकेश ने एक से बढ़कर एक गाने गाएं है जो आज के दौर में भी लोगों की जुबां पर चढ़े हुए हैं। 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में जन्मे मुकेश का पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। हिंदी सिनेमा में मुकेश की आवाज का ऐसा जादू छाया कि कई दशकों तक वो गायकी की दुनिया में राज करते रहे। मुकेश की आवाज को पहली बार पहचाना उनके एक दूर के रिश्तेदार मोतीलाल ने। दरअसल मुकेश उनकी बहन की शादी में गाना गा रहे थे। मोतीलाल मुकेश को मुंबई ले आए और यहां उन्होंने रियाज का पूरा इंतजाम किया।
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वैसे तो मुकेश ने कई एक्टर्स को अपनी आवाज दी लेकिन उनके गाए गाने सबसे ज्यादा राज कपूर के साथ हिट हुए। मुकेश की आवाज ने तो जैसे राज कपूर के करियर में भी जादू ही फूंक दिया था। राज कपूर के लिए मुकेश ने इतने सारे गाने गाए कि उन्हें राज कपूर की आवाज कहा जाने लगा। 'जीना यहां मरना यहां', 'जीना इसी का नाम है' से लेकर 'सजन रे झूठ मत बोलो' और 'दोस्त दोस्त ना रहा' जैसे ढेरों ऐसे गाने हैं जिसने राज कपूर के करियर को नई ऊंचाईयों दीं।
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मुकेश ने फिल्मों में गायकी के साथ एक्टिंग में भी हाथ आजमाया। फिल्म 'निर्दोष' (1941) से मुकेश ने अपना एक्टिंग डेब्यू किया था। फिल्म में मुकेश के अपोजिट एक्ट्रेस नलिनी जयवंत थीं। मुकेश ने इसके बाद कुछ और फिल्मों में भी एक्टिंग की लेकिन वो सफल नहीं हो सके।
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1976 में अमेरिका में मुकेश का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। कहा जाता है कि मुकेश की मौत की खबर से सबसे ज्यादा सदमा राज कपूर को पहुंचा था। अनायास ही उनके मुंह से निकल पड़ा था, 'मुकेश के जाने से मेरी आवाज और आत्मा दोनों चली गईं।'
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अमेरिका में मुकेश का कॉन्सर्ट था। सुबह-सुबह उठकर तैयारी कर ही रहे थे ही कि अचानक ही उनके सीने में दर्द उठा। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया ना जा सका। आज भले ही मुकेश इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन सुरीले तरानों के रूप में वो आज भी हमारे जेहन में जिंदा हैं।
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