पद्मिनी कोल्हापुरे का नाम लेते ही जहन में चुलबुलापन और शरारत से भरा चेहरा सामने उभरता है। 80 के दशक की मशहूर अभिनेत्री पद्मिनी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर बाल कलाकार के रूप में की थी। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री तो हैं हीं साथ ही एक अच्छी गायिका भी हैं। एक नवंबर 1965 को मुंबई में जन्मीं पद्मिनी अपना 55वां जन्मदिन मना रही हैं।
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पद्मिनी कोल्हापुरे
- फोटो : फाइल
पद्मिनी कोल्हापुरे के पिता पंढरीनाथ कोल्हापुरी एक संगीतकार थे। तीन बहनों में पद्मिनी दूसरे नंबर पर हैं। उनकी बड़ी बहन शिवांगी कपूर हैं, जो कि शक्ति कपूर की पत्नी हैं। इस तरह पद्मिनी, अभिनेत्री श्रद्धा कपूर की मौसी लगती हैं। पद्मिनी की छोटी बहन तेजस्विनी कोल्हापुरे भी एक अभिनेत्री हैं।
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देव आनंद, पद्मिनी कोल्हापुरी
- फोटो : instagram/padminikolhapure
पद्मिनी ने छोटी उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘यादों की बारात’ में पद्मिनी ने बाल कलाकार के रूप में कोरस गाया था। आशा भोसले ने पद्मिनी का नाम देव आनंद को सुझाया, जिसके बाद उन्हें फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ में काम मिला। यह फिल्म 1975 में रिलीज हुई थी। इसके बाद पद्मिनी ने ‘ड्रीम गर्ल’, ‘साजन बिना सुहागन’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ सहित अन्य फिल्में बाल कलाकार के तौर पर की।
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फिल्म गहराई
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
1980 में रिलीज हुई फिल्म ‘गहराई’ से पद्मिनी ने तहलका मचा दिया। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने न्यूड सीन दिया था। उस दौर में न्यूड सीन देना बहुत बड़ी बात होती थी। इस सीन के बाद मुख्य अभिनेत्री के तौर पर काम करना उनके लिए आसान नहीं था।
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'इंसाफ का तराजू' में पद्मिनी कोल्हापुरी
- फोटो : फिल्म
1980 में ही पद्मिनी कोल्हापुरे की एक और फिल्म आई ‘इंसाफ का तराजू’। इस फिल्म में भी पद्मिनी के बोल्ड सीन थे। फिल्म में पद्मिनी नाबालिग लड़की के किरदार में होती हैं। उन पर दुष्कर्म का सीन फिल्माया गया था। बोल्ड सीन की वजह से पद्मिनी की आलोचना भी हुई। उन्हें एडल्ट अभिनेत्री कहा जाने लगा था। हालांकि वो अपनी छवि बदलने में कामयाब रहीं और कई हिट फिल्में दीं जिनमें 'वो सात दिन', 'प्यार झुकता नहीं', 'आज का दौर', ‘प्रेम रोग’ और 'सौतन' हैं। पद्मिनी आखिरी बार 2019 में रिलीज हुई फिल्म 'पानीपत' में नजर आई थीं।