बीते साल सिनेमाघरों में ‘फुकरे 3’ और ‘ओएमजी 2’ में अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी की इस साल की पहली फिल्म 'मैं अटल हूं' अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बने पंकज से एक खास बातचीत।
Pankaj Tripathi Interview: ईश्वर सबके साथ नहीं रह सकता, वह माता-पिता के रूप में मिलता है
बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न पंकज त्रिपाठी की इस साल की पहली फिल्म 'मैं अटल हूं' अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बने पंकज बाजपेयी से एक खास बातचीत।
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फिल्म 'मैं अटल हूं' के लिए निर्माता विनोद भानुशाली का प्रस्ताव आने पर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
दरअसल, मैं समझ ही नहीं पाया कि क्या प्रतिक्रिया दूं। प्रस्ताव के साथ उन्होंने मुझे एक फोटो दिखाया जो मेरा ही था लेकिन मैं पहचान नहीं पाया कि वह मैं ही हूं। उन्होंने अटलजी के गेटअप में मेरा वह फोटो कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से बनाया था। मेरे मन में पहला ख्याल यही आया कि क्या मैं इस किरदार को निभाने के योग्य हूं? मैंने पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम किया है, इसका मूल्यांकन मैं दर्शकों पर छोड़ता हूं।
कभी अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने या देखने का मौका मिला?
मैं अटलजी का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं। उनको सुनने पटना के गांधी मैदान की दो रैलियों में जाना मुझे अब भी याद है। उनकी बायोपिक करने का सबसे बड़ा खतरा यही मुझे समझ आया कि कहीं मैं उनकी मिमिक्री करता यानी नकल उतारता न दिखूं। बतौर अभिनेता मैं उनका व्यक्तित्व जी सकता हूं। उनके विचार पकड़ सकता हूं लेकिन उनकी आवाज? वह मैं नहीं निकाल सकता। मैं अटल जैसा दिख नहीं सकता, अटल जैसा सुनाई नहीं दे सकता लेकिन, हां अभिनय के जरिये मैंने ये करने की पूरी कोशिश की है कि 'मैं अटल हूं'। अटलजी को लोगों ने देखा है। मैं उन जैसा नहीं बन सकता। फिल्म देखकर लोगों करुणा और देशभक्ति का भाव जगे, बस यही हमारी कोशिश है।
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विकास के नवोन्मेष का पहला काम अटल बिहारी वाजपेयी ने किया, आपका अपना अनुभव उनके कार्यों को लेकर क्या रहा है?
अद्भुत ही रहा है। परमाणु परीक्षण से लेकर हाईवे के निर्माण और नदियों को आपस में जोड़ने तक की सारी योजनाएं कालजयी हैं। अब मैं चंदेरी में 'स्त्री 2' की शूटिंग करने के लिए मुंबई से ग्वालियर तक सीधे हवाई जहाज से पहुंच सकता हूं। दिल्ली से कन्याकुमारी तक हाईवे का सफर भी किया है। विकास को लेकर उनकी परिकल्पना अद्भुत रही है।
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अटल के व्यक्तित्व निर्माण में उनके माता पिता का बड़ा योगदान रहा, क्या इसे फिल्म में दिखाया गया है?
हां, इस पक्ष को हमने फिल्म में दिखाया है। उनके बचपन की कुछ निर्णायक घटनाएं हैं, लेकिन अटलजी का समूचा व्यक्तित्व और कृतित्व दो घंटे की फिल्म में समेट पाना बहुत मुश्किल है। फिल्म में ऐसी घटनाओं का चयन किया गया है कि अगर उसे एक धागे में पिरो दिया जाए तो एक कहानी सी लगे।
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