चर्चित वेब सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' में सुभद्रा की भूमिका निभाकर चर्चा में आईं अभिनेत्री राजश्री देशपांडे अब नेटफ्लिक्स की ही सीरीज 'ट्रायल बाय फायर' में लीड रोल निभा रही हैं। दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड पर बनी इस वेब सीरीज में राजश्री देशपांडे ने उन नीलम कृष्णमूर्ति की भूमिका निभाई हैं जिन्होंने अपने दो बच्चों को खोने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए 25 साल लंबी लड़ाई लड़ी। नीलम कृष्णमूर्ति के पति शेखर कृष्णमूर्ति ने भी इस मुहिम में अपनी पत्नी का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। दोनों ने अपने अनुभवों पर एक किताब भी लिखी और इसी किताब के नाम पर बनी है वेब सीरीज 'ट्रायल बाय फायर'। इस सीरीज और किताब पर रोक लगाने के लिए अदालत से गुहार भी लगाई जा चुकी है जिस पर सुनवाई इसी हफ्ते होनी है।
Rajshri Deshpande Interview: ‘उपहार हादसा देश का रिपोर्ट कार्ड है, किसान की बेटी हूं जो करूंगी दिल से करूंगी’
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वेब सीरीज 'ट्रायल बाय फायर' के बारे में बातचीत शुरू होते ही राजश्री देशपांडे बताती हैं, 'मैं किसान की बेटी हूं। काफी समय से सामाजिक कार्यों में जुटी हुई हैं। उस मराठवाड़ा में हमारा घर है जहां हर साल सूखा बहुत पड़ता है। मैंने अपने पिता बलवंत देशपांडे को मौसम की मार झेलते देखा है। फसलों को बर्बाद होते देखा है। समाज के लिए कुछ करने का हौसला मुझे अपनी मां सुनंदा देशपांडे से मिला। और, मैं कह सकती हूं कि यही एक काम है जो मुझे दिली सुकून देता है।'
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मराठवाड़ा का जिक्र छिड़ ही गया तो इस पर ही बात आगे चल पड़ी। राजश्री बताती हैं, '10 साल हो गए मुझे मराठवाड़ा में पानी की समस्या पर काम करते हुए। तीन स्कूल भी बनवाए। मुझे शिक्षा और स्वास्थ्य पर अभी बहुत काम करना है। सामाजिक सुरक्षा पर काम करना है। इसके लिए आपसी प्रेम और दूसरों के प्रति सहानुभूति बहुत जरूरी है। 'ट्रायल बाय फायर' में भी नीलम और शेखर सिर्फ बदले की बात नहीं कर रहे, वे बदलाव की बात कर रहे हैं। ऐसा बदलाव जो सिस्टम में भी आना चाहिए और देश के नागरिकों में भी। उपहार हादसा और इसको लेकर चला मुकदमा इस देश के सिस्टम का रिपोर्ट कार्ड है।'
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एक किसान की बेटी का रुझान अभिनय की तरफ कैसे हो गया? ये पूछने पर राजश्री मुस्कुराते हुए बताती हैं, 'अभिनय का शौक बचपन से है। पहले गांव में नाटक किया करती थी। बहुत सारे कलाकारों की मिमिक्री करती थी। हमारे यहां कोई मेहमान आता तो लोग मुझे ही कहते कि अरे, कुछ करके दिखाओ। ऐसे ही पली बढ़ी हूं मैं। हम ऐसी पृष्ठभूमि से आते हैं जहां एक्टिंग के बारे में सोचना ही बहुत मुश्किल काम है। हमारे माता पिता को तो पता ही नहीं था कि अभिनय से भी पैसे कमाए जा सकते हैं। लेकिन उनको यह विश्वास था कि जो भी करेगी अच्छा ही करेगी।'
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तो अभिनय और समाजसेवा में अब किसकी तरफ पलड़ा भारी है, इस बारे में पूछने पर राजश्री देशपांडे बहुत सधी हुई बात कहती हैं। उनके मुताबिक 'यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है। अभी पता भी नहीं कि कहां तक पहुंची हूं। मुझे ऐसा लगता है कि मैं जो भी काम करना चाहती हूं, भले ही वह फिल्मों में हो, सीरीज में हो या सामाजिक कार्यों में हो, बहुत दिल से करना चाहती हूं। मुझे ऐसा लगता है कि जो भी काम करूं, उसका एक महत्व हो। मै पुणे में पढ़ रही थी तो वहां भी पढ़ाई के साथ साथ नौकरी कर रही थी।'
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