मुंबई में कार्यरत हिंदी फिल्म व मीडिया इंडस्ट्री में अपनी ‘दबंगई’ के बूते निर्माताओं, निर्देशकों, कलाकारों व तकनीशियनों को परेशान करने के आरोपों का सामना करती रही इसके कामगारों व तकनीशियनों की संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (एफडब्लूआईसीई) के दो पदाधिकारियों के खिलाफ प्रख्यात कला निर्देशक राजू सपते को आत्महत्या के लिए उकसाने/बाध्य करने का मुकदमा दर्ज हो गया है। इस बारे में पुणे में कुल पांच लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हुआ है जिनमें से फिल्म मजदूरों का नेता होने का दावा करने वाले एक शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। इस बीच इस मामले में आरोपित फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (एफडब्लूआईसीई) के नेताओं समेत सभी अभियुक्तों पर मकोका लगाए जाने की मांग को लेकर पिंपरी चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त के साथ मजदूर नेताओं की मुलाकात भी हुई है।
राजू सपते सुसाइड केस: फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज के नेता नामजद, मकोका लगाने की मांग
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कला निर्देशक राजू सपते की आत्महत्या का मामला धीरे धीरे महाराष्ट्र की राजनीति में तूल पकड़ने लगा है। महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री सतेज पाटिल के इस मामले में मिली एक शिकायत पर पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश देने के बाद से मामले में हलचल तेज हुई है। राजू ने आत्महत्या से पहले बनाए अपने वीडियो में राकेश मौर्या नामक एक मजदूर नेता का बार बार नाम लिया। राकेश हिंदी फिल्म व मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाली फिल्म स्टूडियो सेटिंग व एलाइड मजदूर यूनियन का कोषाध्यक्ष है और बीजेपी के एक बड़े नेता का करीबी बताया जाता है।
राकेश मौर्या के अलावा हिंदी फिल्म व मीडिया इंडस्ट्री के दो और बड़े नेताओं फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज कोषाध्यक्ष गंगेश्वर श्रीवास्तव और इसी संस्था का महासचिव अशोक दुबे भी इस मामले में नामजद अभियुक्त हैं। फिल्म मजदूरों और कामगारों में रोष इस बात का है कि पुलिस अब तक इन तीनों की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। इस मामले में अब तक जो दो लोगों नरेश विश्वकर्मा और चंदन ठाकरे को ही पुलिस ने पकड़ा है। ऑल इंडिया सिने वर्कर्स यूनियन के नेताओं ने इस बारे में पिंपरी चिंचवड़ जाकर वहां के पुलिस आयुक्त से भी इस बारे में मुलाकात की। यूनियन ने इस पूरे मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की है।
इस बारे में ऑल इंडिया सिने वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता का कहना है कि हिंदी फिल्म व मीडिया इंडस्ट्री अब ज्यादातर मुंबई के बाहर ही काम करती है। इसकी वजह यही लोग हैं। कामगारों के नाम पर हिंदी फिल्म व मीडिया इंडस्ट्री में एक ऐसा गैंग काम कर रहा है जो अंडरवर्ल्ड से भी ज्यादा संगठित तरीके से काम करता है। इन लोगों को पैसा दिए बिना कोई भी फिल्म निर्माता या शो निर्माता मुंबई में सहजता से शूटिंग नहीं कर सकता। इसीलिए हमने इन लोगों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
ऑल इंडिया सिने वर्कर्स यूनियन की तरफ से महाराष्ट्र सरकार को सौंपे अपने पत्र में प्रदेश के एक बड़े बीजेपी नेता का नाम भी हिंदी फिल्म व मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय इन तत्वों को संरक्षण देने के लिए लिया गया है। राजू सपते को आत्महत्या के लिए उकसाने/बाध्य करने वाले जिन लोगों के खिलाफ पुलिस ने नामजद मुकदमा दर्ज कराया है, उन्होंने मुकदमा दर्ज होने के बाद अपने सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें भी लगा रखी हैं जिनमें उन्हें इस नेता के साथ देखा जा सकता है।