बॉलीवुड में इन दिनों नेपोटिज्म की बहस जमकर छिड़ी हुई है। अभिनेता ही नहीं बल्कि म्यूजिक डायरेक्टर्स, सिंगर्स और अब तो निर्देशक भी इस बहस में शामिल हो गए हैं। सभी अपने आप को नेपोटिज्म का शिकार बता रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि इंडस्ट्री में अब होड़ मचने लगी है और इस होड़ में सभी अपने आप को ज्यादा पीड़ित बताने में लगे हुए हैं। इसी होड़ में शामिल हुए हैं अब निर्देशक सुधीर मिश्रा।
सुधीर मिश्रा ने बताई बॉलीवुड में निर्देशकों की हैसियत, शेखर कपूर ने दी बेहतरीन सलाह
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अब निर्देशक सुधीर मिश्रा ने ट्वीट के जरिए इंडस्ट्री में निर्देशकों की हलत के बारे में बात की है। सुधीर मिश्रा ने अपने ट्वीट में सुपरवाइजर्स का जिक्र किया है। तो वहीं शेखर कपूर ने भी सुधीर मिश्रा को एक बेहतरीन सलाह दी है। सिर्फ शेखर ही नहीं बल्कि हंसल मेहता और अपूर्व असरानी ने भी सुधीर के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
सुधीर मिश्रा ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट के जरिए ट्वीट करते हुए लिखा, 'यहां निर्देशकों की शक्ति को छीनने का जानबूझकर प्रयास किया गया है। अब हर जगह सुपरवाइजर होते हैं।'
There is deliberate attempt to take away the power of Directors . Now there are supervisors everywhere .
सुधीर के इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए शेखर ने लिखा, 'क्योंकि मैंने खुद कभी भी मॉनीटर का सेट पर इस्तेमाल नहीं किया। मैं एक्शन बोलने से पहले ही मॉनीटर स्विच ऑफ कर दिया करता था। और मुझे उन सो कॉल्ड सुपरवाइजर्स के चेहरे पर परेशानी देखना पसंद था। यदि कोई बराबरी से खड़ा रहता तो मैं कह देता था कि एक जगह पर दो निर्देशक नहीं हो सकते। अगर है तो उन्हें लात मारकर बाहर कर दो।'
Because i never use a monitor on set myself. I switch off the monitor just before i say ‘action’! I love the anxiety on the faces of the so called ‘supervisors’ on the set. And if there is a standoff, i say there cannot be two Directors in one film. Kick em out @IAmSudhirMishra https://t.co/xJCFuPb1J2
सिर्फ शेखर ही नहीं बल्कि हंसल मेहता और अपूर्व असरानी ने भी सुधीर मिश्रा के इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हंसल मेहता ने सुधीर की बात का समर्थन करते हुए लिखा, 'हम लोगों को कला के क्षेत्र में बहुत ही भद्दे तरीके से रिप्रेजेंट किया गया है। इसलिए हम इनकी चपेट में आ गए।'
We are the most poorly represented creative community in India. And hence vulnerable.