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बाइस्कोप: आज ही के दिन रिलीज हुई QSQT, अपनी फिल्म के पोस्टर खुद ही लगाते दिखे थे आमिर खान

पंकज शुक्ल, मुंबई Published by: shrilata biswas Updated Wed, 29 Apr 2020 08:58 PM IST
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This day that year series by Pankaj Shukla 29 april 1988 bioscope Aamir khan juhi Chawla QSQT
कयामत से कयामत तक - फोटो : फाइल

बंबई के मौसम के बारे में जानकारी रखने वाले जानते हैं कि मार्च और अप्रैल के महीनों में शहर का पारा चालीस के आस-पास पहुंचने लगता है। इतनी गर्मी ही बंबई के मस्त मौसम में रहने के आदी हो चुके लोगों के लिए बहुत होती है और इसी गर्मी में अब से कोई 32 साल पहले एक लड़का कभी ऑटो रिक्शा के पीछे तो कहीं किसी दीवार पर पोस्टर लगाता नजर आ जाता था। पोस्टर पर किसी का चेहरा तो नहीं होता, पर इस पर लिखा होता, हू इज आमिर खान? आस्क द गर्ल नेक्स्ट डोर यानी कि आमिर खान कौन है? पड़ोस की लड़की से पूछो। सुबह, शाम, दोपहर कभी भी ये पोस्टर चिपकाते दिख जाने वाला लड़का था आगे चलकर मार्केटिंग जीनियस और मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से मशहूर हुए हीरो आमिर खान जिसे मशहूर निर्माता निर्देशक नासिर हुसैन अपनी अगली फिल्म से लांच करने जा रहे थे।

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This day that year series by Pankaj Shukla 29 april 1988 bioscope Aamir khan juhi Chawla QSQT
aamir khan and juhi chawla - फोटो : social media

नासिर हुसैन की गिनती उन दिनों हिंदी सिनेमा के चंद सबसे कामयाब फिल्म निर्माता निर्देशकों में होती थी। वह परेशान थे अपने बेटे से जो आईआईटी की पढ़ाई बीच में छोड़ चुका था और अमेरिका से भी पढाई अधूरी छोड़ बंबई लौट चुका था। मंसूर खान नाम के इस लड़के को म्यूजिक से इतनी मोहब्बत थी कि उसे दूरदर्शन पर आने वाले गजलों के एक कार्यक्रम को नई स्टाइल में एडिट करने की धुन सवार हुई और अपने कार्यक्रम को वह कैसे बनाएगा, इसके लिए उसने पायलट एपिसोड के तौर पर एक फिल्म बना डाली। ये फिल्म नासिर हुसैन को पसंद आ गई। नासिर हुसैन वैसे तो तमाम हिट फिल्में बना चुके थे लेकिन उनकी पिछली दो फिल्में 'मंजिल मंजिल' और 'जबरदस्त' फ्लॉप हो चुकी थीं। तो तय हुआ कि नए चेहरों को लेकर कम बजट की वैसी ही फिल्म बनाई जाए जैसी कभी मेरा नाम जोकर फ्लॉप होने पर राज कपूर ने बनाई थी।

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aamir khan - फोटो : file photo

नासिर हुसैन ने फिल्म की कहानी भी लिख रखी थी और एक दिन मंसूर खान को बुलाकर उन्हें इस फिल्म के निर्देशन का जिम्मा सौंप दिया। मंसूर खान ने आमिर खान को फिल्म के हीरो के तौर पर फाइनल करने से पहले तमाम नए लड़कों के स्क्रीन टेस्ट लिए। फिर तय हुआ कि घर का लड़का ही इन सबमें सबसे ठीक है। घर का लड़का यानी आमिर खान। नासिर हुसैन के भाई ताहिर हुसैन का बड़ा बेटा। मंसूर खान ने फिल्म की कहानी को बिल्कुल वैसा ही रखा जैसा कि उनके पिता नासिर हुसैन चाहते थे लेकिन सिर्फ शुरू के 11 सीन तक यानी जैसे ही फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट्स शुरू होते हैं, फिल्म उस रास्ते चली जाती है जिधर मंसूर खान ने सोची थी।

This day that year series by Pankaj Shukla 29 april 1988 bioscope Aamir khan juhi Chawla QSQT
Aamir Khan, Reena Dutta - फोटो : Social Media

आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता ने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान बहुत मेहनत की। फिल्म के सुपरहिट गाने ‘पापा कहते हैं’ में वह जरा देर के लिए दिखती भी हैं। पर तब आमिर खान को इस बात की सख्त मनाही थी कि वह रिलीज से पहले किसी को अपनी शादी के बारे में कतई नहीं बताएंगे। फिल्म कयामत से कयामत तक में आपको महाभारत के अर्जुन भी नजर आएंगे। वह इससे पहले की नासिर हुसैन की दोनों फिल्मों मंजिल मंजिल और जबरदस्त में भी थे। इन कलाकार का असली नाम फिरोज है। फिल्म में मकरंद देशपांडे, शाहजाद खान और आमिर के भाई फैसल खान ने भी छोटे छोटे रोल किए हैं। इमरान खान ने फिल्म में आमिर के बचपन का रोल किया है।

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aamir khan - फोटो : social media

मंसूर खान को फिल्म कयामत से कयामत तक के लिए उनके पिता ने अपनी टीम के संगीतकार आरडी बर्मन और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी विरासत में दिए। मंसूर की एक दो मीटिंग भी हुईं आरडी बर्मन से पर बात उन्हें कुछ जमी नहीं। उन दिनों आनंद मिलिंद कुछ फिल्मों में संगीत दे चुके थे। मंसूर को अपनी फिल्म के संगीत के लिए बिल्कुल नई सोच वाले संगीतकार चाहिए थे जो उनके हिसाब से धुनों में प्रयोग कर सकें और गीतकार को लिखने के लिए कुछ नया दे सकें। आनंद मिलिंद इस मामले में खरे साबित हुए और उन्होंने जो धुन बनाई उस पर मजरूह सुल्तानपुरी ने गाना लिखा, ‘पापा कहते हैं’। 70 साल के थे मजरूह सुल्तानपुरी जब उन्होंने ये गाना लिखा। उन्होंने मंसूर के मंसूबे भांप लिए थे और मजरूह सुल्तानपुरी की तमाम खासियतों में ये बात खासतौर से शामिल रही है कि उनके गाने हमेशा वक्त के साथ कदमताल करते रहे। तो देव आनंद की फिल्म तीन देवियां के लिए साल 1965 में ‘ऐसे तो ना देखो’ लिखने वाले मजरूह सुल्तानपुरी फिल्म कयामत से कयामत तक में ‘गजब का है दिन देखो जरा’ लिख रहे थे। फिल्म के सारे गाने हिट रहे और बरसों तक उदित नारायण ही आमिर खान की पर्दे पर आवाज बने रहे। आगे बढ़ने से पहले सुन लेते हैं, फिल्म का ये सुपरहिट गाना..

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