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Yash Chopra Birthday: सिनेमा से लेकर सिनेमा को ही सबकुछ सौंप गए यश चोपड़ा, हर कदम निभाए ये धर्म

Sun, 27 Sep 2020 07:18 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sun, 27 Sep 2020 07:18 AM IST
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Yash Chopra Birthday Special Know Some Unknown Facts About Director Yash Chopra
यश चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

बंटवारे से पहले सिनेमा की बजाय अपनी हरकतों से चर्चा में रहने वाले यश राज चोपड़ा ने सिनेमा में धर्म का पूरी तरह पालन किया। लाहौर में वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ जुड़े। राष्ट्र धर्म भी उन्होंने सीखा और शासन धर्म भी। धर्म और उपासना पद्धतियों को अलग अलग मानने वाले यश चोपड़ा मानते रहे कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में कामयाब तो बहुत लोग होते हैं, लेकिन कई पीढ़ियों तक यादें उन्हीं की रह जाती हैं, जो जीवन में धर्म के दस लक्षण मानकर चलते हैं। श्लोक तो उन्हें पूरा याद नहीं रहता था लेकिन वह धर्म के 10 लक्षणों के बारे में बात जरूर करते थे, जिस श्लोक की तरफ यश चोपड़ा का इशारा होता, वह ये है:



धृति: क्षमा दमोस्तेयं शौचम् इंद्रियनिग्रह।
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्म लक्षणम्।।

Yash Chopra Birthday Special Know Some Unknown Facts About Director Yash Chopra
यश चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सिनेमा का युगधर्म
श्लोक वैसे तो मनु स्मृति का है, लेकिन यश चोपड़ा की स्मृति के लिए भी बिल्कुल सटीक है। वह कहते थे कि इनमें से अगर 60 फीसदी भी कोई जीवन में अपना ले, तो उसे लोगों का बेइंतेहा प्यार मिल सकता है। इन लक्षणों का यश चोपड़ा ने भी अपने जीवन में पालन किया, तब भी जब बड़े भाई बल्देव राज चोपड़ा ने लाहौर से बुलाकर बंबई (अब मुंबई) में आई एस जौहर के साथ काम सीखने को लगा दिया और तब भी जब अभिनेता जीवन के कहने पर बड़े भाई ने वापस अपने साथ काम पर लगाया। बी आर फिल्म्स में वह मासिक वेतन पर लंबे अरसे तक काम करते, बड़े भाई ने कभी धंधे में हिस्सेदार नहीं बनाया लेकिन जब भी जहां भी मौका मिला, यश चोपड़ा ने अपनी कामयाबी, अपनी शोहरत और अपने कारोबार के विस्तार का श्रेय अपने बड़े भाई यानी बी आर चोपड़ा को ही दिया।

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यश चोपड़ा, विनोद मेहरा, श्रीदेवी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

धैर्य के सारथी
‘यश जी में धैर्य बहुत था। मैंने कभी उनको परेशान होते या हड़बड़ी में काम करते नहीं देखा। उनकी फिल्मों की चर्चा उनकी दृश्यावली के लिए शुरू से होती रही है। बी आर फिल्म्स की नौकरी छोड़कर जब उन्होंने अपनी खुद की कंपनी यश राज फिल्म्स खोली तो वह अपने साथ अपने सबसे भरोसेमंद लोगों को ले आए। मेरे पापा भी उन्हीं में से एक थे।’ सिनेमैटोग्राफर राजू केजी बताते हैं। राजू केजी के पिता केजी यानी कोरगांवकर ने यश चोपड़ा के साथ उनकी बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘धूल का फूल’ में बतौर कैमरा सहायक काम शुरू किया और आगे चलकर यश चोपड़ा की चर्चित फिल्मों ‘इत्तेफाक’, ‘दाग’, ‘दीवार’, ‘कभी कभी’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’ और ‘सिलसिला’ के सिनेमैटोग्राफर बने। ‘सिलसिला’ की मेकिंग का जिक्र करते हुए राजू बताते हैं, ‘यश जी तब नया नया कैमरा खरीद कर लाए थे और एक दिन वह खराब हो गया। शूटिंग रुक गई। पूरी यूनिट परेशान कि अब क्या होगा। तो पापा ने कहा कि आप कहो तो राजू को बुला लेते हैं। मैंने देखा तो मुझे समझ आ गया कि दिक्कत कहां है और मैंने कैमरा ठीक भी कर दिया। उस दिन से यश जी ने पापा के साथ साथ मुझे भी वहीं काम पर रख लिया। मैंने तब देखा कि कैसे एक एक सीन वह जमा कर शूट करते थे। किसी कलाकार का मूड ठीक न हो तो वह शूटिंग रद्द कर देते थे।’ राजू केजी से मिलती जुलती बात श्रीदेवी ने भी मुझे काफी पहले बताई थी, जब उनके पिता का देहांत हुआ और वह ‘लम्हे’ की शूटिंग के बीच में से चेन्नई आ गईं थीं। कोई महीने भर श्रीदेवी अपने घर पर रुकीं, लेकिन एक बार भी यश चोपड़ा के किसी स्टाफ ने उनको फोन करके ये नहीं पूछा कि वह वापस शूटिंग पर कब आएंगी।

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यश चोपड़ा, रेखा, अमिताभ बच्चन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

अमिताभ को किया क्षमा
ये सबको पता है कि अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘जंजीर’ में मिली एंग्री यंगमैन की छवि को ठीक से यश चोपड़ा ने ही ‘दीवार’, ‘त्रिशूल’ और ‘काला पत्थर’ में शक्ल दी। लेकिन, ये कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म ‘सिलसिला’ के फ्लॉप होने के बाद बरसों तक अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा के रिश्तों में खटास बनी रही। अमिताभ बच्चन उन दिनों फिल्म निर्देशकों व निर्माताओं के लिए पारस पत्थर बने हुए थे और यश चोपड़ा भी दूसरे सितारों के साथ फिल्में बनाने लगे थे। लेकिन, एक दिन यश चोपड़ा सुबह सुबह तब चौंके जब अमिताभ बच्चन उनके घर आ पहुंचे। पता चला कि अपने बंगले से वह टहलते हुए ही वहां तक आ गए थे। ये बात बीती सदी के आखिरी साल की है। अमिताभ बच्चन की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी और वह यश चोपड़ा से काम मांगने चले आए थे। उनको पता था कि यशराज फिल्म्स की एक फिल्म ‘मोहब्बतें’ के नाम से बन रही है और उसमें उनके लायक एक दमदार रोल भी है। अमिताभ बच्चन ने इसका जिक्र भर किया और यश चोपड़ा ने उन्हें ये रोल दे दिया। अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा का पुनर्मिलन कामयाब रहा। बाद में अभिषेक बच्चन को भी यश चोपड़ा ने अपनी कंपनी की फिल्म में मौका दिया। फिल्म ‘बंटी और बबली’ के ट्रायल में जब चोपड़ा और बच्चन परिवार की अगली पीढ़ियां एक साथ जुटीं और यश चोपड़ा ने कहा, ‘बच्चों ने बहुत अच्छा काम किया है।’ तो अभिषेक बच्चन और आदित्य चोपड़ा दोनों ने इसे अपने करियर का सबसे बड़ा प्रमाण पत्र माना और इसका जिक्र चलने पर दोनों के चेहरों पर मुस्कान अब भी आ जाती है।

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रानी मुखर्जी - फोटो : फाइल फोटो

दम अपने हुनर का
यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा से अनौपचारिक रूप से भले बतिया लें, लेकिन वह औपचारिक रूप से बात करने या इंटरव्यू देने से बचते हैं। इसकी अपनी अलग वजहे हैं। रानी मुखर्जी जरूर अपने ससुर का नाम सुनते ही उत्साहित हो जाती हैं। बतौर अभिनेत्री जितना भी समय उन्होंने यश चोपड़ा के साथ सेट पर गुजारा है, वह उनके लिए यादगार है। घर पर उन्हें बेटी जैसा प्यार मिला, लेकिन सेट पर वह बताती हैं कि यशजी अनुशासन बनाए रखने की पूरी कोशिश करते थे। एक खास बात रानी मुखर्जी जो यश चोपड़ा के बारे में बताती हैं, वह ये कि उनमें अपनी विधा को लेकर संयम बहुत रहा। वह दम भर भी इस पर से अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देते थे। सिनेमा उनके लिए साधना था। रानी बताती हैं, ‘यश जी को कलाकारों के भाव खुद देखने होते थे। वह फ्रेम से थोड़ा बाहर रहकर वहीं लोकेशन पर हम लोगों के करीब ही रहते थे। पारखी नजरें उनकी इतनी थीं कि जरा सा भी गड़बड़ होने पर वह तुरंत पकड़ लेते थे। आज के निर्देशक शूटिंग होते समय दूर मॉनीटर पर बैठकर फ्रेम में हो रही हरकतें देखते हैं। लेकिन, यश जी को मॉनीटर पर नहीं खुद पर भरोसा था। वह कमाल के फिल्म निर्देशक रहे और मैंने उनसे तमाम बातें बतौर अभिनेत्री और बतौर इंसान भी सीखी हैं। आमतौर पर वह जिंदादिल और खुशमिजाज इंसान थे, हां जब अति हो जाती तो नाराज भी होते थे। जैसे हम लोगों के साथ ‘वीर जारा’ की शूटिंग के वक्त होता रहता था।’

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