बचपन से ही हमने स्कूल की किताबों में और दादी-नानी की कहानियों में बड़े-बड़े नुकीले दांतो वाले और विशालकाय जीवों के बारे में सुना है। उन जीवों को साइंस की भाषा में डायनासोर कहा जाता है। हम लोगों के बचपन का यह जानवर कहानियों और किताबों से निकलकर कब बड़े पर्दे पर आ गया किसी को पता नहीं चला। लेकिन इससे फायदा यह हुआ कि आज बच्चों के पास डायनासोर्स की अलग-अलग तरह की प्रजातियों को समझने के लिए ऐसी कई फिल्में हैं, जिन्हें देख उन्हें उन कहानियों पर विश्वास जरूर होगा। जी हां, हॉलीवुड हमारे सामने कई बार ऐसी फिल्में पेश करता है, जो शायद बॉलीवुड कभी न कर पाता। कम से कम अभी तो उसे वहां तक पहुंचने में बहुत समय लगेगा। ऐसी ही एक साइंस फिक्शन फिल्म 'जुरासिक पार्क' है, जिसे हॉलीवुड इंडस्ट्री ने साल 1993 में रिलीज की थी। इस फिल्म ने दुनिया को डायनासोर की भव्यता से परिचित कराया था। 'जुरासिक पार्क' फ्रैंचाइजी की फिल्में हमारी यादों के एक बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं, जो इन विशाल प्रीहिस्टोरिक डायनासोर्स को शानदार तरीके से हमारे सामने पेश करती हैं। इन फिल्मों को दर्शकों से मिले प्यार के कारण यह फ्रैंचाइजी आज भी हमारे बीच जीवित है। इसकी छठी और कथित रूप से अंतिम फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन', इस शुक्रवार यानी 10 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म से पहले आज हम आपको इसके पिछले पार्ट्स की कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आपके दिलों-दिमाग में इसकी सारी यादें ताजा हो जाएंगी।
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जुरासिक पार्क
यह सब स्टीवन स्पीलबर्ग की 'जुरासिक पार्क' से शुरू हुआ, जो माइकल क्रिचटन द्वारा लिखे गए इसी नाम के नॉवल पर आधारित है। साल 1993 में पहली बार रिलीज होने के बाद इस फिल्म ने दुनिया में तहलका मचा दिया था। इसे अभी भी 1990 के दशक की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक माना जाता है। फ्रैंचाइजी की शुरुआत 'जुरासिक पार्क' के मालिक जॉन हैमंड के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की एक टीम को बुलाने से होती है। वह इस्ला नुब्लर के फिक्शनल आइलैंड में स्थित अपने एक थीम पार्क को पर्यटकों के लिए खोलने से पहले विश्लेषण कराना चाहता है। लेकिन टीम के साथ थीम पार्क में इतनी भयावह चीजें होती हैं कि उनकी जान पर बन आती है। उनका सामना विशालकाय डायनासोर्स से होता है, जिनके मुंह इंसानी खून लग जाता है। वह लोग जैसे तैसे करके अपनी जान बचाते हैं और इस पार्क को लोगों के लिए खोलने से साफ मना कर देते हैं।
द लॉस्ट वर्ल्ड: जुरासिक पार्क
सीरीज की दूसरी फिल्म, 'द लॉस्ट वर्ल्ड: जुरासिक पार्क', पहली फिल्म के चार साल बाद शुरू होती है। कहानी की शुरुआत हैमंड के उसकी कंपनी इनजेन को खोने से होती है। अपने पहले थीम पार्क के ध्वस्त हो जाने के बाद भी वह एक दूसरे आइलैंड, इस्ला सोर्ना के अस्तित्व को बनाए रखने में कामयाब रहा। इस आइलैंड का इस्तेमाल डायनासोर की ब्रीडिंग के लिए किया गया था। यह बात किसी को भी पता नहीं होती है। यह एक कवर-अप का हिस्सा था, जिसने पूरी दुनिया से हैमंड के पिछले प्रोजेक्ट की विफलता को छुपा लिया था। इस आइलैंड में हुई एक दुर्घटना के बाद, हैमंड एक बार फिर से इयान मैल्कम को एक नई टीम के साथ वहां बुलाता है। पूरी टीम को इनजेन कंपनी के नए मालिकों का सामना करना पड़ता है, जब वह इस पार्क के डायनासोर्स की तस्करी करने की कोशिश करते हैं।
जुरासिक पार्क 3
साल 2001 में 'जुरासिक पार्क 3' इस ट्रायलॉजी की आखिरी फिल्म आई थी। फिल्म में डॉ. एलन ग्रांट को डायनासोर की एक प्रजाती वेलोसिरैप्टर पर रिसर्च करते हुए दिखाया जाता है। डॉ.एलन वेलोसिरैप्टर की बुद्धिमत्ता पर रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने इस नए प्रोजेक्ट के लिए कहीं से भी फंड नहीं मिल रहा है। डॉ. एलन, पॉल और अमांडा किर्बी से मिलते हैं, जो उसे धोखे से अपने एक अभियान में शामिल कर लेते हैं। इस कपल ने ग्रांट के उसके प्रोजेक्ट के लिए पैसे देने का वादा किया लेकिन एक शर्त भी रखी, जहां से इस फिल्म की कहानी में ट्विस्ट आ जाता है। पॉल और अमांडा, डॉ.एलन से इस्ला सोर्ना 'द लॉस्ट वर्ल्ड' में दिखाए गए आइलैंड का हवाई दौरा करने की मांग करते हैं। उन्हें पता है कि एलन को फंड चाहिए और वह उसकी मजबूरी का फायदा उठा लेते हैं।
जुरासिक वर्ल्ड
'जुरासिक वर्ल्ड' का निर्माण साल 2004 में ही शुरू होना था लेकिन मेकर्स ऐसा करने में नाकाम रहे। फिल्म लगभग एक दशक बाद साल 2015 में सिनेमाघरों में रिलीज की गई। इस फिल्म में भी कहानी, विज्युलाइजेशन और साउंड इफैक्ट्स का ऐसा समावेश तैयार किया गया था, जिसकी वजह से स्क्रीन से नजरें हटाना मुश्किल हो गया था। कॉलिन ट्रेवोरो द्वारा निर्देशित, 'जुरासिक वर्ल्ड' जुरासिक पार्क फ्रैंचाइजी की चौथी और 'जुरासिक वर्ल्ड' ट्रायोलॉजी में पहली फिल्म थी। आप सोच सकते है कि 'जुरासिक पार्क' ट्रायोलॉजी के 22 साल बाद की कहानी दिखाती इस फिल्म को कितने बेहतर तरीके से पेश किया गया होगा। फिल्म मसरानी ग्लोबल कॉरपोरेशन के सीईओ साइमन मसरानी (इरफान खान) की कहानी सबके सामने लाती है, जिन्होंने 1997 में हैमंड से आइजेन कंपनी को 'जुरासिक पार्क' को खरीदा था। वह इस पार्क में हैमंड द्वारा की गई गलतियों को सुधार कर अपना एक थीम पार्क बनाना चाहते थे, जिसका नाम 'जुरासिक वर्ल्ड' रखा गया था। पहली फिल्मों की तरह ही सीधे-सीधे चलती यह कहानी एक भहयाव्ह रूप ले लेती है। पार्क का जेनेटिक रूप से तैयार किया गया एक हाइब्रिड डायनासोर इंडोमिनस रेक्स गायब हो जाता है और हर जगह कहर बरपाता है।
