मोहम्मद रफी और नुसरत फतेह अली खान के गीत सुनते सुनते बड़े हुए गायक जुबिन नौटियाल ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, स्कूल के दिनों से ही सीखना शुरू कर दिया। बचपन में सुने गीतों ने उन्हें अच्छा और सामाजिक रूप से जिम्मेदार गायक बनने में मदद की। फिर, उन्होंने अपने माता-पिता की संगीत की ललक को भी जीया और हिंदी फिल्म जगत में वह मुकाम हासिल किया, जहां उन्हें यशराज फिल्म्स के लिए गाने का न्यौता मिला। जुबिन नौटियाल से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की एक खास बातचीत।
Jubin Nautiyal Exclusive: सबसे बड़ी शाबाशी वो मिली, जब पापा ये गाना सुनकर बोले, यू हैव अराइव्ड!
Jubin Nautiyal Exclusive: हाल ही में गायक जुबिन नौटियाल आगामी फिल्म ‘सैयारा’ के ‘बर्बाद’ गाने से चर्चा में हैं। आइए सुनते हैं सिंगर के साथ हुई खास बातचीत को।
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यशराज फिल्म्स की आने वाली फिल्म ‘सैयारा’ का गाना ‘बर्बाद’ गाने का न्योता मिलने की उपलब्धि वाले पल का एहसास साझा करेंगे हमारे पाठकों के साथ?
सच पूछें तो ये गाना रिकॉर्ड होते समय मुझे पता नहीं था कि ये किस फिल्म का गाना है! गाने का स्क्रैच सुनकर मुझे ऐसा जरूर लगा कि बहुत टाइम बाद एक इतना पका हुआ गाना मेरे पास आया है। रिकॉर्डिंग के समय ये समझ आया कि ये तो अपनी ही आवाज के लिए बना हुआ गाना है। और, ये चुनाव रहा फिल्म के निर्देशक मोहित सूरी का जिन्होंने ये तय किया कि ये गाना मेरी ही आवाज में अच्छा लगेगा। इसके बाद जब ये पता चला कि ये गाना यशराज फिल्म्स की पिक्चर के लिए रिकॉर्ड हुआ है तो सोने पर सुहागा हो गया।
मोहित सूरी की फिल्मों के संगीत से आपका परिचय कब हुआ?
साल 2005 की बात है, मैं तब 10वीं क्लास में था। उस वक्त ‘जहर’ और ‘कलयुग’ जैसी फिल्में और उनका संगीत लेकर मोहित सूरी मेरे जीवन में आए। ऐसा कम होता है कि पहली बार कोई गाना सुनाई दे, और मन कर जाए कि गिटार उठाकर मुझे भी ये गाना है। 10वीं में मेरे पास संगीत एक विषय के तौर पर था। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की परीक्षाएं मैंने 10वीं के बाद 12वीं में भी दी। फिर ‘आशिकी 2’ आई और उनके गानों की अनोखी आवाजें दिल मे बसने लहीं।
फिल्म ‘कबीर सिंह’ से मुझे लगता है कि आपके गानों को लोगों ने खुलकर सराहना शुरू किया, और उसके बाद आया फिल्म ‘मरजावां’ का तुम ही आना.., इन गानों के दर्द का एहसास कोई असल घटना है जीवन की?
नहीं सर, भगवान ने हर चीज से नवाजा है। बहुत प्यार दिया है। माता-पिता बहुत अच्छे दिए हैं। बहनें बहुत अच्छी दीं। दोस्त यार बहुत अच्छे दिए। फैंस बहुत अच्छे दिए तो शिकायत कुछ नहीं है। दुखी नहीं हूं लेकिन हां, मुझे लगता है जीवन अपने आप में बहुत सारी चीजों का निचोड़ होता है। उसमें अच्छे पल भी होते हैं। दुख के पल भी होते हैं तो जब कुछ सैड गाता हूं तो यह याद करके गाता हूं, जब मैं किसी चीज को लेकर उदास रहा होउंगा।
साल 2011 में आप लोगों को पहली बार दिखने शुरू हुए और अब 2025 है, यानी 14 साल बीत गए, माना जाए कि अब राजतिलक का समय आ गया?
क्या बात है! 14 साल बाद आज अगर अपनी यात्रा में पीछे जाकर देखूं तो खुद को एक बेहतर और तैयार गायक के तौर पर महसूस करता हूं। 14 साल की बात आपकी सही है कि ये समय किसी को भी लगता ही है एक मुकाम हासिल करने में। मैं भी शुरू के दिनों में यही खोज रहा था कि क्या कैसे गाना है, क्या कैसे करना है? लेकिन, आज पता है कि किस तरह से चलना है, किस तरह से आगे काम करना है, मेहनत किस दिशा में करनी है।
संगीत शायद आपको पिताजी से मिला विरासत में..
जी, बिल्कुल माता-पिता (नीना और रामशरण नौटियाल) बहुत ज्यादा संगीत सुनते रहे हैं मेरे, हालांकि हमारे परिवार में किसी ने मुझसे पहले संगीत सीखा नहीं है। माता-पिता संगीत के कमाल के प्रशंसक रहे हैं। उनके कैसटों के बड़े बड़े कलेक्शन रहे हैं, फिल्मी गीतों को डायरियों मे लिखकर याद करने वाले लोग रहे हैं ये।
तो फिर तो बचपन से ही खूब गाने सुने होंगे, किन गायकों के गाने बजते थे आपके घर में?
बचपन में तो रफी साहब ही हमारे घर के पसंदीदा गायक थे। जिस नजाकत से रफी साहब गा देते हैं, उसके प्रशंसक रहे पिता जी। फिर किशोर दा रहे हैं, लता ताई रही हैं, नुसरत साहब के गाने बहुत सुने हैं बचपन में। अच्छा संगीत सुनाया है माता-पिता ने, जब हम बच्चे खिलौने खेल रहे होते थे।
अगर आपको किसी म्यूजिक कंपनी का नियंत्रण दे दिया जाए तो उसके यूट्यूब चैनल से कौन से गाने सबसे पहले हटाना चाहंगे?
मेरा हमेशा से मानना रहा है कि संगीत का हमारे जीवन में एक बहुत ही निजी फर्क पड़ता है। अगर कुछ ऐसे गाने हैं जिनके बोलों ने समाज पर गलत असर डाला है तो उनको तुरंत हटाना चाहूंगा। क्रिएटिव फ्रीडम अपनी जगह है, गाने की सिचुएशन अपनी जगह है लेकिन छोटे-छोटे चार-पांच साल के बच्चे, जिन्हें शायद पता भी नहीं, वे बोल क्या रहे हैं, उनके मुंह से ऐसे गाने सुनते हैं, तो समझ आता है कि संगीत कितना गहरा असर छोड़ता है जीवन में।
आप सुबह उठते ही सबसे पहले क्या करते हैं?
मेरी सफलता में सबसे बड़ा कारक एहसानमंद होना रहा है। सुबह उठकर मैं सबसे पहले ईश्वर को उन सारी चीजों के लिए धन्यवाद देता हूं जो जीवन में मुझे अब तक मिल चुकी हैं। ये भाव मुझे जमीन से जोड़े रहता है। अपने प्रशंसकों का भी मैं काफी एहसानमंद रहता हूं कि वे मुझे मेरे संगीत के बारे में सही राय देते हैं।