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बाइस्कोप: पढ़िए आज ही के दिन रिलीज हुई फिल्म ‘अभिमान’ के 10 दिलचस्प किस्से, जानिए क्या है ‘अमिया’?

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 27 Jul 2020 01:29 AM IST
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Abhimaan this day that year series by pankaj shukla 27 july 1973 bioscope Amitabh bachchan jaya
अभिमान - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

कभी आपने ध्यान देने की कोशिश की हीरो और हीरोइन के नामों के आद्याक्षर मिलाकर युगल नाम रखने का चलन कब से शुरु हुआ होगा भला? सैफ अली खान और करीना कपूर के सैफीना से पहले ब्रैड पिट और एंजेलीना जोली का नाम ब्रैंजलीना चलन में आया था, लेकिन इन दोनों के अलग होने के बाद सैफ और करीना ने भी सैफीना नाम से दूरी ही बना लेना ठीक समझा। लेकिन, इनसे पहले भी और हिंदी सिनेमा में ही ये कोशिश बीती सदी के सबसे बड़े सितारे अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी भी कर चुके हैं। चौंक गए ना? अब क्या करें, हमारा तो काम ही है बाइस्कोप सीरीज में हर रोज आपको कोई न कोई चौंकाने वाली जानकारी देते रहना। इन दोनों ने अपने नामों के हिज्जे मिलाकर एक नाम बनाया था अमिया। अमिताभ का अमि और जया का या। अमिया वैसे तो उत्तर प्रदेश में कच्चे आमों को कहते हैं लेकिन जिस दौर में ये नाम दोनों ने मिल बैठकर सोचा होगा, बहुत संदेह होता है कि किसी आम के बाग में अमिया खाते ही सोचा होगा। इस नाम की चर्चा आज इसलिए क्योंकि इसी नाम के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म थी 27 जुलाई 1973 को रिलीज हुई फिल्म ‘अभिमान’ और यही फिल्म हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म भी है।



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Abhimaan this day that year series by pankaj shukla 27 july 1973 bioscope Amitabh bachchan jaya
अभिमान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

साल 1973 अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी के जीवन का रीति काल रहा है। दोनों की मोहब्बत भी जोरों पर थी और दोनों के सितारे भी कम जोर पर नहीं थे। दोनों का विवाह इसी वर्ष 3 जून को हुआ। शादी से ठीक पहले दोनों की फिल्म ‘जंजीर’ सुपरहिट हुई। जया तो खैर तब तक खुद ही सुपरस्टार बन चुकी थीं। अमिताभ के लिए ‘जंजीर’ का हिट होना किसी ईश्वरीय आशीर्वाद से कम नहीं था और दोनों का विवाह तो खैर था ही ईश्वरीय आशीर्वाद। शादी के ठीक बाद रिलीज हुई फिल्म ‘अभिमान’ में अमिताभ की आभा और उनका रूप दर्शनीय था तो जया का लावण्य और मोहक चेहरा फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बना। ‘

आनंद’ में अमिताभ को राजेश खन्ना के साथ मौका दे चुके निर्देशक ऋषिकेष मुखर्जी को कुछ कुछ तो समय का अंदाजा भी था और आने वाले समय का भान भी। तभी तो फिल्म की शुरूआत हाउसफुल के बोर्ड से होती है। सुबीर के हाउसफुल शो के बोर्ड से। फिल्म ‘अभिमान’ की कहानी सुबीर और उमा की कहानी है। दोनों बहुत ही अच्छा गाते हैं। सुबीर के तमाम चाहने वाले हैं। इन चाहने वालों में से कुछ चाहने वाले आधी रात को फोन पर बतियाने की कामना रखने वाली देह कंचनाएं भी हैं। सुबीर हिट सिंगर है। और, उसकी मुलाकात एक दिन उमा से होती है। उमा और सुबीर संगीत को लेकर दो अलग अलग ध्रुवों जैसी सोच रखने वाले प्राणी हैं। लेकिन विपरीत के आकर्षण का नियम यहां लागू होता है और दोनों शादी कर लेते हैं।

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Abhimaan this day that year series by pankaj shukla 27 july 1973 bioscope Amitabh bachchan jaya
अभिमान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रिसेप्शन में ही दोनों के जीवन में आने वाले तूफान का संकेत मिल जाता है और तूफान तब आता है जब लोग सुबीर से ज्यादा उमा की आवाज पसंद करने लगते हैं। सुबीर को ये पचता नहीं है। दोनों में झगड़ा होता है। उमा घर छोड़कर अपने मायके आ जाती हैं, जहां उसे पता चलता है कि वह मां बनने वाली है। सुबीर का गुस्सा और बढ़ता है कि उमा ने ये बात उसे बताई क्यों नहीं। लेकिन होनी को कुछ और मंजूर होता है। उमा का गर्भपात हो जाता है। वह बिल्कुल टूट जाती है। उधर, सुबीर भी मन बहलाने की तमाम कोशिशों के बावजूद उबर नहीं पाता। दोनों फिर मिलते हैं। सुबीर खुद उमा से गाने का अनुरोध करता है। उसका अभिमान मिट चुका है।

फिल्म ‘अभिमान’ अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी ने अपने अपने पैसों को मिलाकर बनाई थी। अमिताभ बच्चन की कुछ साल पहले की एक ट्वीट बताती है कि फिल्म के बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर काफी गलतफहमी फिल्म की रिलीज के चार दशकों बाद तक बनी रही। बताते हैं कि जब ये फिल्म बनी तो अमिताभ व जया दोनों अपनी शादी में मशगूल थे और उन दोनों के तत्कालीन सेक्रेट्री ही इस फिल्म का पूरा काम देखते थे। इस चक्कर में कागजों के मामले में दोनों का काम कच्चा रह गया। फिल्म ने तब तो खास कमाई बॉक्स ऑफिस पर नहीं की थी और साल 1973 में रिलीज फिल्मों की लिस्ट में इसका नंबर 20वां रहा। लेकिन, बाद में फिल्म के डिजिटल राइट्स और सैटेलाइट राइट्स करोड़ों में बिके।

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Abhimaan this day that year series by pankaj shukla 27 july 1973 bioscope Amitabh bachchan jaya
अभिमान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म एक तरह से देखा जाए तो ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन का एक बड़ा हस्ताक्षर भारतीय वैवाहिक जीवन पर है। जैसा कि फिल्म में एक संवाद भी है कि ये अभिमान छोटी छोटी बातों का होता है। पर, वैवाहिक जीवन में जहर घोल जाता है। संजय लीला भंसाली ने प्रेमी युगल के बीच नितांत वैयक्तिक भावुक दृश्य गढ़ने जरूर ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में देखकर ही सीखे होंगे। जैसे फिल्म ‘हम दिल चुके सनम’ में समीर लोगों की निगाहें बचाकर नंदिनी को छेड़ता है, वैसा ही कुछ यहां सुबीर करता है उमा को सामने पाकर।

ये अठखेलियां और शोखियां ही फिल्म में दोनों के रिश्ते की ऊष्मा बन जाती है। ये अलग बात है कि जब इस फिल्म की शूटिंग हुई तब दोनों की शादी नहीं हुई थी लेकिन परदे पर ही पति पत्नी का खेल खेलना अमिताभ और जया को इस फिल्म में खूब रास आया और परदे पर ये दिखता भी है। दोनों का ये अभिनय ही फिल्म ‘अभिमान’ की असाधारण कहानी को अद्वितीय स्तर तक ले जाने में कामयाब होता है। जया भादुड़ी ने इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड भी जीता हालांकि ये पुरस्कार उन्हें फिल्म ‘बॉबी’ के लिए डिंपल कपाड़िया के साथ साझा करना पड़ा।

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Abhimaan this day that year series by pankaj shukla 27 july 1973 bioscope Amitabh bachchan jaya
अभिमान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म में छोटे छोटे घटनाक्रम भी ऐसे गढ़े हैं जो जीवन का विस्तार देखने वाले के मस्तिष्क में अंकित रह जाते हैं। फिल्म में अमिताभ के सेक्रेट्री चंदर का रोल असरानी ने किया है। बाद में इस सेक्रेट्री के पास उमा का काम भी आता है। चंदर जब अपने काम से इस्तीफा देकर जा रहा होता है तो फोन की घंटी बजती है और आदतन वह उस ओर बढ़ जाता है। फिर उसे एहसास होता है कि नहीं मैं तो नौकरी छोड़ चुका हूं। इस सीन का असर और इसमें एक वफादार के दिल की भावना का बखूबी प्रदर्शन ऋषिकेश मुखर्जी ने करने में कामयाबी पाई। सीन वह भी बहुत मार्मिक है जिसमें फैंस सुबीर के हाथ से ऑटोग्राफ बुक्स छीनकर उमा की तरफ भागते हैं। चित्रा के साथ वक्त बिताकर सुबीर को उमा को भुलाने की कोशिश करने वाले सीन भी बेहतरीन निर्देशकीय क्षमता का नमूना हैं।

राग रागिनी’ के नाम से बननी शुरू हुई फिल्म ‘अभिमान’ की कहानी की प्रेरणा ऋषिकेश मुखर्जी को कहां से मिली, इसे लेकर भी तमाम अलग अलग तरह की बातें चलती रही हैं। मुखर्जी के करीब रहे लोग बताते हैं कि ये फिल्म मशहूर सितार वादक रवि शंकर और उनकी पत्नी अन्नपूर्णा देवी की असल कहानी है। दोनों के अलगाव के बाद वह अन्नपूर्णा देवी से मिलने भी गए थे और कहा ये भी जाता है कि अन्नपूर्णा देवी की अनुमति लेकर ही ऋषिकेश मुखर्जी ने ये फिल्म शुरू की। कुछ लोग इस कहानी को गायक किशोर कुमार और उनकी पहली पत्नी रूमा घोष के रिश्तों की बानगी बताते हैं। वैसे ये फिल्म हिट हॉलीवुड मूवी ‘ए स्टार इज बॉर्न’ से काफी मिलती जुलती है। इसी कहानी पर फिल्म ‘आशिकी 2’ भी बनी है। ‘अभिमान’ का रीमेक वैसे तमिल में भी बन चुका है। और, श्रीलंका में तो बताते हैं कि ये फिल्म करीब 85 हफ्ते लगातार एक ही सिनेमाघर में लगी रही।

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